This Program in Hindi is to preach the everlasting Gospel of the Lord Jesus Christ. “For God so loved the world that He gave His only begotten Son, that whoever believes in Him should not perish but have everlasting life”. Jesus Christ is Coming soon यह कार्यक्रम हिन्दी में प्रभु येशू के सनातन सुसमा…

पाप की शुरुआत एक रहश्य है। प्रेम का परमेश्वर अपने सब सृजे प्राणियों को स्वतंत्र चुनाव दिया है, और उनसे स्वेच्छा आज्ञाकारी चाहता है।

बुद्धिमान कुवारियाँ अ पने दिये और अपने साथ अतिरिक्त तेल भी लीं। मूर्ख कुवारियाँ अपने दिये लिए परन्तु अपने साथ पर्याप्त तेल नहीं लीं।

परमेश्वर इस्राएलियों के लिए समुद्र के बीच रास्ता बनाए फिर उसी सागर में उनके दुश्मन मिस्र की सेना को डूबा दिये तब मूसा और इस्राएलियों ने विजय के गान गाया।

जब इस्राइल मिस्र से निकला और मरुभूमि में मिस्र की सेना उनकी पीछा करते आ रहे थे तो परमेश्वर का दूत बादल में मिस्र के सेना और इस्राइल के बीच आ गया।

मिस्र की विपत्तियाँ में परमेश्वर ने इसराइलियों को बचाया और मिस्र राष्ट्र के जादूगरों में भरोसा रखने की मूर्खता का एहसास किया गया।

मिस्र की विपत्तियाँ में परमेश्वर ने इसराइलियों को बचाया और मिस्र राष्ट्र के जादूगरों में भरोसा रखने की मूर्खता का एहसास किया गया।

मिस्र में प्रत्येक विपत्ति आने से पहले, मूसा को फिरौन से उसके स्वरूप और प्रभावों का वर्णन करना था, ताकि राजा चाहे तो उससे बच सके।

मूसा पहाड़ों के मध्य प्रकृति में परमेश्वर से उसके महानता के विषय और अपने भेड़ों को देखभाल करने के लिए धैर्य सीखा।

विश्वास से यूसुफ ने, जब वह मरने पर था, तो इस्त्राएल की सन्तान के निकल जाने की चर्चा की, और अपनी हड्डियों के विषय में आज्ञा दी।

याक़ूब मिस्र में मरने पर विश्वास का देश कनान में दफनाये जाने का चाह रखता था क्योंकि उसका मन प्रतिज्ञा के देश में गड़ा था।

युसुफ अपने को प्रकट करने से पहले अपने भाइयों को जाँचना चाहते थे कि उनमें सच्चा पश्चाताप हुआ है और उनमें सच्चा परिवर्तन आया है।

कनान में अकाल के कारण याक़ूब के बेटों को अनाज़ खरीदने मिस्र जाना हुआ जहाँ के राज्यपाल उनसे सख्त व्यवहार किया। उन्हें अब मालूम नहीं था कि वह उनका भाई है।

एक समय युसुफ पोतिफर के घर में दास का काम करता था पर अब वह राजा फिरौन का विश्वस्त मंत्री के रूप में पूरे मिस्र देश की सेवा कर रहा था।

पूरे मिस्र देश में केवल युसुफ ही था जो राजा फिरौन के स्वपन का सही अर्थ बतला सकता था।

याक़ूब का अपने बेटे युसुफ के प्रति एहसान करना और कुर्ता देना उसके अन्य बच्चों में ईर्षा पैदा की और उसे मिस्र में गुलाम के लिए बेच देने में परिणामित हुआ।

याक़ूब अपने कनान वापसी में बेथेल जाने के पूर्व अपने परिवार को मूर्तिपूजा के अपवित्रता से मुक्त होने का निर्देश दिया जिसमें सबने सहयोग किया।

याकूब एसाव से मिलने में भयभीत था, परन्तु उसके सच्चे पश्चाताप और परमेश्वर के वादों में दृढ़ विश्वास और भरोसा ने उसे सफल और विजयी बनाया।

याकूब उस पूरे रात प्रार्थना में बिताना चाहता था, क्योंकि उसे अपने बड़े भाई से मिलने में डर था; तब उसकी मुलाकात अनजाने में परमेश्वर के दूत से हो गया।

याकूब मेसोपोटामिया में बीस साल रहने के बाद लबान से भागता है क्योंकि उसका कृपा जो याकूब के प्रति था वह नहीं रहा और उसे बहुत बार धोखा भी दिया था।

याक़ूब के लिए परमेश्वर द्वारा विशेष आशीष प्राप्त करने की योजना थी, परन्तु धोखे से अपने पिता से आशीष प्राप्त करने के कारण उसे अपने भाई से भागना पड़ा।

यहूदी लोग परमेश्वर के उद्देश्य को पूरा करने में असफल रहे, और उनसे दाख की बारी छीन ली गई क्योंकि उन्होने मसीह को स्वीकार नहीं किया।

परमेश्वर ने यहूदी जाति को विशेष आशीष देने के लिए चुना था और यहूदी राष्ट्र को संसार में सर्वश्रेष्ट राष्ट्र बनाने की प्रतिज्ञ की थी।

जो यीशु से प्रेम करते हैं, उसकी आज्ञाओं को मानेंगे। अच्छे कार्य परमेश्वर के प्रेम को नहीं खरीदते, पर प्रगट करते हैं कि हम उस प्रेम को प्राप्त किए हैं।

ईमानदारी की परीक्षा शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में होती है।

केवल वे ही सच्चे वंशज माने जाते हैं जो ईश्वर की आवाज़ का पालन करके अब्राहम के साथ आध्यात्मिक रूप से सामंजस्य स्थापित करते हैं।

धनवान व्यक्ति और लाजर के दृष्टांत में, मसीह दिखाते हैं कि इस जीवन में मनुष्य अपने अनन्त भाग्य का निर्णय करते हैं।

“चौकस रहो, और हर प्रकार के लोभ से अपने आप को बचाए रखो; क्योंकि किसी का जीवन उसकी सम्पत्ति की बहुतायत से नहीं होता।”

परमेश्वर हमारे बहुत पापों को क्षमा किए हैं, इसलिए हमें दूसरों के पापों को क्षमा करना है।

दावत का निमंत्रण सबसे पहले यहूदी लोगों को दिया गया था; जब उन्होंने इस आह्वान को अस्वीकार कर दिया, तो सुसमाचार का आह्वान अन्यजातियों को दिया जाता है।

दावत का निमंत्रण सबसे पहले यहूदी लोगों को दिया गया था; जब उन्होंने इस आह्वान को अस्वीकार कर दिया, तो सुसमाचार का आह्वान अन्यजातियों को दिया जाता है।

फरिसी का मनोदृष्टि दिखलता था कि वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने को निश्चित था परन्तु जिस शर्त पर उद्धार प्रतिज्ञा किया गया है उसे मानने को तैयार नहीं था।

यीशु के पास आने में पीछे न रहें जब तक कि आप अपने आप को बेहत्तर न बना लें, या उतना अच्छा न बन जाएँ कि आप ईश्वर के पास आने के लायक हों, अन्यथा आप आएंगे ही नहीं।

वह पिता का प्रेम ही था जो उड़ाऊ पुत्र को घर की तरफ ले जा रहा था।

अब्राहम कनान में जहाँ भी जाता एक वेदी बनाता और ईश्वर की उपासना करता। लूत से अलग होने के समय वह भूमि की चुनाव करने के लिए लूत को पहला अवसर दिया।

अब्राहम अपनी पत्नी सारा को अपनी बहन बता कर मिस्र में उसे बड़ी संकट में डाल दिया था, परंतु मिस्र में विपत्ति भेजकर परमेश्वर अब्राहम की महान रक्षा किया।

परमेश्वर अब्राहम को अपने देश से प्रतिज्ञा के देश जाने के लिए बुलाया जहाँ उसे परमेश्वर की आज्ञा को पूरा करने में संबंधियों और मित्रों का बाधा नहीं रहेगा।

जल-प्रलय के पश्चात अविश्वासियों ने परमेश्वर के विद्रोह में अपने बड़ाई और प्रशिद्धता के लिए शीनर में एक गुम्मट बनाया।

सब्त की तरह, सप्ताह की उत्पत्ति भी सृष्टि के समय हुई थी, और बाइबल के इतिहास के माध्यम से यह संरक्षित होकर हम तक पहुँचा है।

जैसे परमेश्वर नूह और उसके परिवार को जहाज में सुरक्षित रखा, उसी तरह वह जगत के अंत में धर्मियों को बचा लेगा जब पापियों का आग से नाश होगा।

हनोक लम्बे समय तक परमेश्वर के साथ चला और परमेश्वर उसे जिंदा स्वर्ग ले लिया।

नूह की पीढ़ी के लोग नाश हुए क्योंकि वे परमेश्वर के दास नूह के द्वारा उसके भेजे गए चेतौनियों पर विश्वास नहीं किए।

नूह का परीक्षा था कि उपहास के बीच परमेश्वर के वचन में विश्वास करके अपने काम में डटे रह और जहाज के अंदर भी वर्षा आने तक परमेश्वर पर भरोसा रखे रह।

नूह ने परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार पापी जगत में अपने और अपने परिवार को बचाने के लिए एक विशाल जहाज़ बनाया।

हनोक लम्बे समय तक परमेश्वर के साथ चला और परमेश्वर उसे जिंदा स्वर्ग ले लिया।

हाबिल ने विश्वास और आज्ञाकारिता को चुना और कैन ने अविश्वास और विद्रोह को चुना।

मनुष्य का उद्धार केवल परमेश्वर के एकमात्र पुत्र के जीवन की बलिदान से संभव था, जो दूतों का सेनापति था; किसी दूत का बलिदान बचा नहीं सकता था।

परमेश्वर की आज्ञा का उलंघन कर, आदम और हव्वा ने वर्जित वृक्ष के फल खाये, और उन्हें निराशा, दु:ख, पीड़ा और मृत्यु मिला।

अदन में आदम और हव्वा को परीक्षा की अवधि में रखा गया था। वे आज्ञा मानकर जीवित रह सकते थे, या अवज्ञा करके नष्ट हो सकते थे।