This Program in Hindi is to preach the everlasting Gospel of the Lord Jesus Christ. “For God so loved the world that He gave His only begotten Son, that whoever believes in Him should not perish but have everlasting life”. Jesus Christ is Coming soon यह कार्यक्रम हिन्दी में प्रभु येशू के सनातन सुसमा…

परमेश्वर एक “खुली” सरकार चलाते हैं। महान विवाद के अंत में उनके आत्म-त्याग, भलाई, न्याय, प्रेम और व्यवस्था के विषय सब सवाल खत्म हो जाएंगे।

आप दिन-प्रतिदिन अपना जीवन परमेश्वर के हाथों में सौंपते जाएँ, और इस प्रकार आपका जीवन मसीह के जीवन के अनुसार अधिकाधिक ढलता जाएगा।

ईश्वरत्व में से एक मनुष्य बनने को तैयार हुआ कि हमें अपना प्रतिस्थापन और ज़मानत प्रदान की जा सके और हमें हमारे पाप-पूर्व पूर्णता में वापस लाया जा सके।

ब्रह्मांड का प्रभु, अपनी पूर्णता, शक्ति और महिमा के कारण, सबसे अलग है - अर्थात, पवित्र - बाकी सब से ऊपर।

ईश्वरत्व में से एक मनुष्य बनने को तैयार हुआ कि हमें अपना प्रतिस्थापन और ज़मानत प्रदान की जा सके और हमें हमारे पाप-पूर्व पूर्णता में वापस लाया जा सके।

ईश्वरत्व अस्तित्व और प्रकृति में तीन दिव्य सत्ताओं से मिलकर बना है, जो उद्देश्य और कार्य में एकीकृत हैं, किन्तु व्यक्तित्व में भिन्न हैं।

अपने सृजित प्राणियों के सृष्टिकर्ता, न्यायाधीश और उपकारकर्ता के रूप में, परमेश्वर समस्त ब्रह्माण्ड पर प्रभुता रखता है।

हमारा परमेश्वर सदाकाल से सदाकाल तक का परमेश्वर है। उसे छोड़ और कोई परमेश्वर नहीं है। वे हमें सबसे कठिन परिस्थिति में भी बचा सकते हैं।

यीशु मसीह मनुष्यों को उद्धार करने के लिए इस जगत में जन्म लिया। उसे अपने जीवन में अपनाने से हमें प्रेम, आनन्द, शांति और आशीष मिलती हैं।

जैसे प्रकाशितवाक्य के सात कलिसियायों को महान संघर्ष में यीशु के चेतावनी और प्रोत्साहन हैं, वैसे हमें भी हैं।

पतरस के लेखन में महान-विवाद विषय की भरमार है जैसे कि वह इस वास्तविक संघर्ष से वकिफ था और हमें सचेत रहने की चेतावनी दी है।

पौलुस परमेश्वर का शक्तिशाली सेवक था। उसके लेखन में महान-विवाद विषय की भरमार है।

यीशु को अपने अनुयायियों के सामने सबसे बड़ी बाधा उनकी पूर्वधारणाएँ थीं। दस दिनों की प्रार्थना और परमेश्वर की उपस्थिति में घनिष्ठ संगति इसमें बदलाव लायीं।

यीशु की शक्ति शैतान से अधिक शक्तिशाली है, और यदि उसके अनुयाई उससे चिपके रहेंगे तो शैतान उन्हें पराजित नहीं कर सकता है।

यीशु की शिक्षा द्वारा हम महान विवाद को समझ सकते हैं।

यीशु ने जंगल में शैतान पर विजय पाने के लिए पवित्रशास्त्र का इस्तेमाल किया। और हम भी पवित्र शास्त्र का इस्तेमाल करके शैतान पर जीत प सकते हैं।

न्यायियों का समय पवित्र इतिहास में एक अराजक काल था। फिर भी, परमेश्वर अपने बच्चों को बचाने के लिए उद्धारकर्ता भेजता जब वे उसे पुकारते।

विद्रोह और पाप परमेश्वर द्वारा बनाई गई हर चीज़ को नष्ट कर देते हैं। पर, परमेश्वर की विश्वासयोग्यता, अपने परेशान बच्चों को बचाने में जारी रहती है।

मनुष्य को कभी भी मरने के लिए नहीं बनाया गया था; हमें परमेश्वर की योजना में भरोसा करना है।

पाप की शुरुआत एक रहश्य है। प्रेम का परमेश्वर अपने सब सृजे प्राणियों को स्वतंत्र चुनाव दिया है, और उनसे स्वेच्छा आज्ञाकारी चाहता है।

उसकी ज्योति को चमकाएँ, जिस तरह बुद्धिमान कुवारियों ने तेल के साथ अपने दीयों के द्वारा दूल्हा के सम्मान के लिए उसके राह को उंजियाला की।

बुद्धिमान कुवारियाँ अ पने दिये और अपने साथ अतिरिक्त तेल भी लीं। मूर्ख कुवारियाँ अपने दिये लिए परन्तु अपने साथ पर्याप्त तेल नहीं लीं।

परंपरा पर आधारित अशाश्त्रीय सिद्धान्त, उत्पीड़न, भ्रस्टाचार और कई पादरियों की आध्यात्मिक गिरावट सुधार के लिए पुकार के प्रमुख कारण थे।

अंत के दिनों में, व्यापक धर्म-त्याग के समय में, परमेश्वर की शेष कलिसिया होगी जो उसके आज्ञाओं को मानते और यीशु के विश्वास को रखते।

आज़ ख्रीस्त कलिसिया के माध्यम से सभी को अपने परिवार के सदस्य बनने के लिए निमंत्रण करता है। कलिसिया में सभी निर्णयें मसीह के आत्मा के अनुसार, उसके वचन से निर्देशित होकर लिए जाना चाहिए।

चूँकि परमेश्वर चाहता है कि “सारी बातें सभ्यता और क्रमानुसार की जाएँ” वह सुसमाचार की घोषणा, लोगों का पोषण, और उनके वरदानों का उपयोग के लिए कलिसिया का संगठन चाहता है।

कलिसिया का विवरण एक शरीर, मंदिर, दुल्हन, “ऊपर के यरूसलेम”, परिवार, सत्य का खंभा और नींव, और सेना के रूप में किया गया है।

कलिसिया विश्वासियों का समुदाय है जो यीशु मसीह को प्रभु और उद्धारकर्त्ता के रूप में स्वीकार करते हैं।

आत्मा से भरा जीवन, मेल-मिलाप का जीवन, बाइबल-अध्ययन, प्रार्थना और फलदायक जीवन, और आराधना का जीवन मसीह में बढ़ने के प्रमाण चिन्ह हैं।

मसीह का क्रूस पर मृत्यु पाप और बुरे शक्तियों पर विजय था और उसके लहू से हमारा विजय का आश्वासन देता है और हमें परिपकता की जीवन की ओर ले जाता है।

पवित्र आत्मा हमारे लिए मसीह की सिद्धता लता है। विश्वास द्वारा मसीह का उत्तम चरित्र हमारा हो जाता है।

बच्चपन से लेकर युवा अवश्था तक और फिर पूर्ण पुरुसत्व तक यीशु अकेला शुद्धता और विश्वास में जीया।

जैसा परमेश्वर ने छोटा यीशु को हेरोदेस से अपने स्वर्गदूतों और युसुफ और मरियम के द्वारा रक्षा किया, उसी प्रकार वह अपने बिश्वासी बच्चों का रक्षा करता है।

पूरब के ज्ञानी लोग यीशु के तारे देखे क्योंकि वे सच में ज्ञानी थे, इसमें कि वे परमेश्वर के शास्त्त्रों में ढूढ़ें, और उसके निर्देश का पालन किया।

यीशु ख्रीस्त के अर्पण के साथ बलिदान और भेंट का प्रतीक लगभग वास्तविक में बदलने वाला था।

यीशु जन्मा कि वह मनुष्य की दरिद्रता में अपना धन लाये, मनुष्य के पाप के जगह अपना धार्मिकता दे, और अपना जीवन मरते मनुष्य के लिए दे।

यहूना का परमेश्वर का कार्य में नम्रता ने उसे महान बनाया।

यीशु का दिव्य शक्ति जन्म से अंधा व्यक्ति को दोनों शारीरिक और आत्मिक दृष्टि प्रदान किया।

यीशु उस व्यक्ति को जो 38 साल से लंगड़ा था सब्बत के दिन चंगा किया जो जीने की आखरी आशा खो रहा था।

यीशु के अनुग्रह और क्षमा ने एक पापिन को परिवर्तित कर उसके जीवन में नई शुरुआत दी।

यहूदा के पास सुअवसर था की वह यीशु के साथ रहे और उसके जीवन और सेवा को नजदीकी से देखे; फिर भी वह उद्धार को अस्वीकार किया।

यीशु जीवन का पानी देता है, जिसे, यदि मनुष्य पीता है, वह कभी फिर प्यासा नहीं होगा।

यीशु जहाँ भी गया, वह निराशा को खुशी में बादल दिया।

यीशु के पास किसी भी कुल के लोगों को चंगा करने में कोई दीवार नहीं है।

यीशु हमें हमारे सभी रोगों से चंगा कर सकता है और हमें अपने पापों से बचा सकता है ।

यीशु की उपस्थिति और उसके प्रेम ने यहूना को परिवर्तित किया।

अंधा बरतिमाई दाऊद का पुत्र, यीशु, को चंगा के लिए पुकारा, और चंगा हुआ।

यीशु गरीबों तथा मत्ती जैसे धनवानों के लिए भी उद्धार लाया।