वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:सूडान में नज़र आए जातीय सफ़ाए और जनसंहार के स्पष्ट चिह्न, भविष्य में भी बड़े अत्याचारों के गम्भीर ख़तरे की चेतावनी.ग़ाज़ा पट्टी और पश्चिमी तट में भी 'जातीय सफ़ाए' की गहरी आशंकाओं पर संयुक्त राष्ट्र ने जताई गम्भीर चिन्ता.यूक्रेन में रूसी हमले जारी, ठप सेवाओं व समर्थन में कटौती से भीषण दबाव में महिलाएँ.भारत में AI IMPACT SUMMIT आयोजित, यूएन प्रमुख ने कहा “एआई सबकी होना चाहिए.”और सुनेंगे AI Impact Summit में शिरकत करने वाले, वरिष्ठ यूएन अधिकारियों के विचार..

जब दुनिया तेज़ रफ़्तार वीडियो, रील्स और एआई टैक्नॉलॉजी से तैयार आवाज़ों से भरी हुई है, तब भी सम्वाद का एक ऐसा माध्यम भी है जो दिखाई दिए बना ही, लोगों की ज़िन्दगी में आज भी मौजूद है…रेडियो. ये केवल खब़रें सुनाने का साधन नहीं है, बल्कि संकट के समय में लोगों की आख़िरी उम्मीद, अकेलेपन में साथ देने वाली आवाज़ और अँधेरे हालात में भरोसे की एक किरण भी है...

बाढ़, चक्रवाती तूफ़ान, ताप लहरों समेत अन्य आपदाओं की समय रहते चेतावनी देने में, कृत्रिम बुद्धिमता (AI) आधारित उपायों के ज़रिए न केवल मदद मिल सकती है, बल्कि इससे जान-माल की हानि में कमी लाना भी सम्भव है.संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (UNDRR) के प्रमुख कमल किशोर, AI Impact Summit में हिस्सा लेने के लिए भारत में हैं, जहाँ उन्होंने यूएन न्यूज़ की अंशु शर्मा के साथ एक ख़ास बातचीत में बताया कि एआई की मदद से, समय रहते पता लगाया जा सकता है कि कौन-से इलाक़े और लोग सबसे अधिक जोखिम में हैं, ताकि ज़रूरतों के अनुरूप समय पर तैयारी की जा सके और राहत पहुँचाई जा सके. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि एआई का उपयोग, हमेशा नैतिक तरीक़े से, लोगों की निजता की रक्षा करते हुए और मानवीय निगरानी के साथ होना चाहिए, ताकि इसका लाभ सभी तक पहुँचे और कोई भी पीछे नहीं छूट जाए.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:सूडान के अल फ़शर शहर में भयावह हिंसा को दिया गया अंजाम, मानवाधिकार कार्यालय ने जताई युद्ध अपराधों की आशंका.संयुक्त राष्ट्र ने इसराइल से, पश्चिमी तट में क़ब्ज़ा बढ़ाने के लिए उठाए क़दमों को वापिस लेने का किया आग्रह.हिंसक चरमपंथ और आतंकवाद को हवा देने के लिए नई, उभरती टैक्नॉलॉजी के दुरुपयोग पर बढ़ती चिन्ता.महिलाएँ उच्च शिक्षा में आगे, मगर विज्ञान व गणित विषयों में हिस्सेदारी अब भी केवल 35 प्रतिशत. एआई और डिजिटल टैक्नॉलॉजी के इस दौर में भी रेडियो है, संचार का एक सशक्त माध्यम.

हर वर्ष, 13 फ़रवरी को, विश्व रेडियो दिवस पर, हम उस माध्यम की अहमियत को रेखांकित करते हैं जो सीमाओं से परे जाकर लोगों को जोड़ता है. इसी भावना को आगे बढ़ाता है रेडियो उड़ान, भारत का एक अनूठा रेडियो स्टेशन, जिसे मुख्य रूप से दृष्टिहीन संचालित करते हैं और जो जानकारी व आत्मविश्वास के ज़रिए विकलांगजन को सशक्त बनाता है. रेडियो उड़ान किन मायनों में अलग है, इसकी शुरुआत कैसे हुई और इसका असर किन ज़िन्दगियों पर पड़ा, यह जानने के लिए यूएन न्यूज़ की अंशु शर्मा ने रेडियो उड़ान के संस्थापक, दानिश महाजन से बातचीत की, जिन्होंने अपने सफ़र और उद्देश्य के बारे में विस्तार से बताया.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:संकटग्रस्त समुदायों तक जीवनरक्षक सेवाएँ पहुँचाने के लिए, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने वित्तीय सहायता की अपील की.अमेरिकी संसद ने एचआईवी/एड्स के विरुद्ध लड़ाई के लिए, 6 अरब डॉलर के पैकेज को दी स्वीकृति, यूएन ने किया स्वागत.विश्व भर में कैंसर के 40 फ़ीसदी मामलों में रोकथाम सम्भव, बचाव उपायों पर बल.अमेरिका-रूस परमाणु सन्धि की अवधि हुई समाप्त, यूएन प्रमुख ने कहा विश्व के लिए एक 'गम्भीर क्षण'.भारतीय शान्तिरक्षक वैश्विक शान्ति और सुरक्षा में महत्वपूर्ण...सुनेंगे यूएन रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर स्टेफ़ान प्रीज़नर के विचार.एआई के ज़रिए बच्चों की 'डीपफ़ेक' यौन सामग्री में उछाल, UNICEF की चेतावनी.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:यूएन महासचिव ने पेश की अपने कार्यकाल के अन्तिम वर्ष की प्राथमिकताएँ, उभरते तनावों और लापरवाही भरे क़दमों के ख़तरनाक दुष्परिणामों के प्रति चेतावनी.एक अहम मोड़ पर खड़े ग़ाज़ा पट्टी में हालात पर, सुरक्षा परिषद की एक उच्चस्तरीय बैठक में चर्चा.यूएन प्रमुख ने 'अन्तरराष्ट्रीय हॉलोकॉस्ट स्मरण दिवस' पर दिया मानवता के लिए एकजुटता का सन्देश.विश्व स्वास्थ्य संगठन ने, स्कूल में बच्चों के लिए पोषणयुक्त भोजन से जुड़ी गाइडलाइन्स की जारी.दक्षिण सूडान में शान्ति समझौते पर ख़तरे के बीच, बाढ़ और मानवीय संकट से जूझ रहे हैं समुदाय...एक विशेष बातचीत.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:यूएन उप महासचिव ने बहुपक्षवाद और वैश्विक नियमों की रक्षा का किया आह्वान, महासभा अध्यक्ष ने अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के प्रति घटते सम्मान पर जताई चिन्ता.ग़ाज़ा में पुनर्निर्माण की चर्चाओं के बीच, यूएन एजेंसियों ने तत्काल मानवीय राहत को बताया एक अहम प्राथमिकता .संक्रमण के दौर से गुज़र रहे सीरिया में, हिंसक झड़पों से मौजूदा प्रगति पर जोखिम.बढ़ते जल संकट से जूझती दुनिया, अब 'जल दिवालिएपन' के दौर में प्रवेश कर चुकी है, अरबों लोग चपेट में.प्रकृति को बचाने में कम, उसे नुक़सान पहुँचाने में हो रहा है कहीं अधिक ख़र्च.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:यूक्रेन में रूसी सैन्य हमलों और भीषण सर्दी की दोहरी मार, बुनियादी ज़रूरतों के लिए जूझ रहे हैं आम लोग.ईरान में चिन्ताजनक स्थिति पर, संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से किया - अधिकतम संयम बरतने का आग्रह.ग़ाज़ा में सर्द मौसम में तूफ़ान का क़हर, बाढ़ के गम्भीर ख़तरे वाले क्षेत्रों में रहने के लिए विवश 8 लाख लोग.यूएन एंतोनियो गुटेरेश ने, दरारों, असमानताओं व संघर्षों के दौर में, पारस्परिक सहयोग को बताया - इस वर्ष के लिए अपनी प्राथमिकता.वायु प्रदूषण से जूझते दक्षिण एशिया में, स्वच्छ हवा के लिए समाधानों से उपजी उम्मीद.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:सूडान में हिंसक युद्ध के 1000 दिन, आम नागरिकों के लिए नारकीय स्थितियूक्रेन के अनेक शहरों पर व्यापक हमलों में लोगों की परेशानियाँ बढ़ीं, वहीं ईरान में महंगाई के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान अनेक लोग हताहत.अन्तरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका के पीछे हटने की घोषणा, यूएन ने जताया विश्व समुदाय की सेवा जारी रखने का संकल्प. म्याँमार में हो रहे चुनावों की वैधता और स्वतंत्रता पर सवाल, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने की कोशिश का आरोप.भारत के ओडिशा में यूनीसेफ़ के प्रयासों से कैसे आ रहा है स्कूली लड़कियों के जीवन में बदलाव.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:ग़ाज़ा में बारिश, ठंड, जलभराव की वजह से फ़लस्तीनी आबादी के लिए गम्भीर हालात, उधर सूडान में हिंसक टकराव से प्रभावित आबादी की पीड़ा पर गहरी चिन्ता.अफ़ग़ानिस्तान में, 2026 में भी गम्भीर मानवीय संकट बने रहने की आशंका, आर्थिक बदहाली और प्राकृतिक आपदाओं से हालात बदतर.कोविड-19 अब भी बन सकता है गम्भीर संक्रमण की वजह, मगर वैक्सीन है बचाव का एक असरदार उपाय.संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका के बीच समझौता, 17 देशों में मानवीय राहत के लिए 2 अरब डॉलर की मदद.यूएन प्रमुख का नए वर्ष पर सन्देश, वैश्विक शान्ति, न्याय और युद्धों के बजाय निर्धनता के विरुद्ध लड़ाई पर बल.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:श्रीलंका में क़रीब एक महीना पहले आए चक्रवाती तूफ़ान दित्वाह से प्रभावित 10 लाख से अधिक लोग अब भी सहायता पर निर्भर.म्याँमार में चुनाव से पहले, हिंसा और दमन के मामलों में तेज़ी पर चिन्ता, उधर मध्य अफ़्रीकी गणराज्य - CAR में भी चुनावों को बताया गया अहम.ईरान के परमाणु कार्यक्रम व अप्रसार के मुद्दे पर सुरक्षा परिषद में नहीं बनी सहमति, आपसी वार्ता के ज़रिए समाधान पर बल.अफ़ग़ानिस्तान के पहाड़ी इलाक़ों में कठोर सर्दियों का प्रकोप, यूएन खाद्य एजेंसी WFP बनी सहारा.यूएन पर्यावरण कार्यक्रम के ‘पृथ्वी चैम्पियन' पुरस्कार से सम्मानित, भारत की सुप्रिया साहू के साथ एक विशेष बातचीत.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा वर्ष 2025 के ‘Champions of the Earth' पुरस्कार के लिए दुनिया भर से चुने गए पाँच लोगों में भारत की सुप्रिया साहू भी शामिल हैं. तमिलनाडु सरकार में सहायक मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत सुप्रिया साहू को, हाल ही में यूनेप ने, ‘प्रेरणा और कार्रवाई' की श्रेणी में सम्मानित किया है. सुप्रिया अत्यधिक गर्मी से निपटने के लिए व्यावहारिक उपायों पर काम कर रही हैं. इनमें स्कूलों में ‘ठंडी छत' पहल, प्रकृति की बहाली, और जलवायु जोखिमों को ध्यान में रखकर, ढाँचा विकास को आगे बढ़ाना शामिल है. यूएन न्यूज़ की अंशु शर्मा के साथ एक ख़ास बातचीत में उन्होंने बताया कि तमिलनाडु जैसे प्रदेश के लिए जलवायु परिवर्तन के असर कम करने और अनुकूलन के लिए अभी से तैयार होना क्यों अहम है...

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:ग़ाज़ा में फ़िलहाल अकाल टला, मगर लाखों लोग अब भी भूख व कुपोषण की चपेट में.सूडान में कोर्दोफ़ान के अल-ओबेद इलाक़े पर हमले की आशंका, नए सिरे से विस्थापन का जोखिम.पारम्परिक चिकित्सा पद्यति पर दूसरा शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में सम्पन्न, दिल्ली घोषणापत्र के साथ, सामने आया वैश्विक स्वास्थ्य रोडमैप.दुनिया भर में बढ़ते मतभेदों, संघर्षों, टकरावों, अनिश्चितताओं और चुनौतियों के हालात में, यूएन मुख्यालय में 'विश्व ध्यान दिवस' की महत्ता पर चर्चा.फ़रवरी 2026 में भारत में होगा एआई शिखर सम्मेलन. इस सिलसिले में यूएन मुख्यालय में हुई प्रारम्भिक चर्चा.

पारम्परिक चिकित्सा पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का दूसरा वैश्विक शिखर सम्मेलन, नई दिल्ली में 17 से 19 दिसम्बर 2025 तक आयोजित किया गया. WHO और भारत सरकार के आयुष मंत्रालय की साझेदारी में हुए इस सम्मेलन में दुनिया भर से नीति - निर्माता, वैज्ञानिक, चिकित्सक और आदिवासी ज्ञान-धारक शामिल हुए. चर्चा का केन्द्र, पारम्परिक चिकित्सा को विज्ञान, साक्ष्य और ज़िम्मेदार व्यवहार के आधार पर स्वास्थ्य प्रणालियों में सुरक्षित और नैतिक तरीक़े से जोड़ने पर रहा.यूएन न्यूज़ की अंशु शर्मा ने, शिखर सम्मेलन के दौरान, आयुष मंत्रालय के जामनगर स्थित आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसन्धान संस्थान की निदेशक डॉक्टर तनुजा मनोज नेसारी के साथ ख़ास बातचीत की, जिसमें उन्होंने शिखर सम्मेलन की प्रमुख प्राथमिकताओं, उभरते साक्ष्यों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवाचारों व आगे की दिशा पर विस्तृत जानकारी दी.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:सूडान और ग़ाज़ा में हिंसा के कारण, आम लोगों की पीड़ाएँ हैं जारी, यूएन एजेंसियों के यथासम्भव सहायता प्रयास भीबच्चों पर सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए, कुछ ऑस्ट्रेलिया में लगी पाबन्दियाँप्रकाश उत्सव दीपावली बना अब वैश्विक त्यौहार, यूनेस्को की जीवन्त विरासत सूची में मिली जगहमहिलाओं का स्वास्थ्य केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवारों के लिए है अहम, भारत में WHO की जागरुकता मुहिमदुनिया के अनेक देशों में बढ़ रहा है, पारम्परिक चिकित्सा पद्यति का प्रयोग. अगले सप्ताह नई दिल्ली में WHO सम्मेलन

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:दक्षिणपूर्व एशिया के अनेक देशों में बाढ़ का क़हर, 1 करोड़ से अधिक लोगों पर गाज.सूडान में हिंसक युद्ध की आग फिर भड़की, और ग़ाज़ा में लोगों के लिए चिकित्सा सुविधा बनी दूर की कौड़ी.मलेरिया पर नियंत्रण में हुई है प्रगति, मगर दवा प्रतिरोध से उपज रहा है एक नया जोखिम.एक भारतीय किशोर - देव करन को मिला यूएन सम्मान, तालाब साफ़ करने की उनकी मुहिम ला रही है रंग.समाज में, विकलांगजन के वास्तविक समावेशन से ही होती है समाज की असल प्रगति.

दिल्ली से सटे नोएडा के 17 वर्षीय देव करन ने ग्रामीण इलाक़ों में तालाबों की अनदेखी को नज़रअन्दाज़ करने के बजाय, कुछ ऐसा करने का बीड़ा उठाया, जिसने अनेक तालाबों की सफ़ाई के लिए, लोगों नई ऊर्जा भर दी है. देव करन ने इस काम के लिए वर्ष, 2024 में Pondora नामक संस्था शुरू की - एक ऐसी पहल जो सामुदायिक भागेदारी और किफ़ायती तकनीक की मदद से भारत के तालाबों का मानचित्रण, पुनर्स्थापन और संरक्षण करती है. उनकी परियोजना, अहम जल-स्रोतों को बचाने व टिकाऊ जल प्रबन्धन के बारे में युवजन व समुदायों को जागरूक एवं सक्रिय बनाती है.देव करन को, जिनीवा स्थित यूएन मुख्यालय में आयोजित युवा कार्यकर्ता सम्मेलन (YAS25) में सम्मानित दुनिया के पाँच चुनिन्दा युवा परिवर्तनकारियों में स्थान मिला है. यह सम्मेलन तकनीक के ज़रिए सामाजिक एवं पर्यावरणीय बदलाव ला रहे युवाओं को पहचान देता है.इस वर्ष सम्मेलन का विषय था “From Hashtag to Action”, यानि ऑनलाइन आवाज़ों को वास्तविक ज़मीनी बदलाव में बदलना.यूएन न्यूज़ हिन्दी की अंशु शर्मा ने, जिनीवा से हाल ही में भारत वापिस लौटे देव करन के साथ, नई दिल्ली स्थित यूएन कार्यलय में ख़ास बातचीत की और उनकी परियोजना के बारे में जानकारी हासिल की.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:दुनिया भर में, हज़ारों महिलाएँ, अपनों के ही हाथों होती हैं हिंसा की शिकार, इस माहौल में बड़े हो रहे, करोड़ों बच्चे भी संकट में.करोड़ों बच्चे, ख़सरा से बचाने वाली वैक्सीन से हैं वंचित, नतीजतन, 95 हज़ार लोगों की मौतें.दिल्ली की हवा में घुल रहा है विषैला प्रदूषण, स्वास्थ्य आपदा जैसे बने हालात.17 साल की उम्र में एचआईवी से संक्रमित हुईं पूजा मिश्रा. मगर, डर और कलंक को पीछे छोड़कर, कैसे बनीं युवाओं की आवाज़.रियाद में आयोजित वैश्विक सम्मेलन UNIDO) में, मानवता व पृथ्वी की भलाई पर केन्द्रित औद्योगिक विकास पर ज़ोर.

पटना की पूजा मिश्रा का विवाह, 15 वर्ष की आयु में करा दिया गया था और 17 साल की छोटी सी उम्र में उन्हें मालूम हुआ कि वो एचआईवी से संक्रमित हो गई थीं. तब से अब तक अनगिनत चुनौतियों का सामना करते हुए, आज पूजा का संक्रमण पूरी तरह दबा हुआ है, और वो देशभर के युवाओं की मज़बूत आवाज़ बन चुकी हैं. पूजा अब, भारत में एचआईवी के साथ जी रहे लोगों का राष्ट्रीय गठबन्धन (NCPI+) की राष्ट्रीय युवा समन्वयक के रूप में, युवाओं के अधिकार, मानसिक स्वास्थ्य और इलाज जारी रखने की अहमियत पर काम करती हैं और अपने यूट्यूब चैनल “Youth Speak Now” से हज़ारों युवाओं तक भरोसेमन्द जानकारी पहुँचाती हैं.पूजा मिश्रा ने, विश्व एड्स दिवस (1 दिसम्बर) के अवसर पर यूएन न्यूज़ हिन्दी की सहयोगी अंशु शर्मा के साथ एक ख़ास बातचीत में बताया कि किस तरह वह डर और कलंक से निकलकर, नेतृत्व करने और युवाओं को प्रोत्साहित करने के मुक़ाम तक पहुँचीं; और क्यों वह चाहती हैं कि सभी युवा अपनी दवा, अपने हक़ और अपनी आवाज़ के साथ मज़बूती से खड़े हों.

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...कॉप30 अपने अन्तिम चरण में, जलवायु संकल्पों को ठोस वास्तविकता में बदलने का इम्तेहान.42 करोड़ बच्चे अत्यधिक निर्धनता में जीवन बिताने को विवश, अफ़्रीका और एशिया में है अधिक संख्या.डिजिटल जगत में बढ़ती हिंसा की शिकार बनती महिलाएँ, क़ानूनी सुरक्षा क्यों है ज़रूरी...दुनिया भर में क़रीब साढ़े 3 अरब लोग, आज भी सुरक्षित शौचालय से वंचित, पर्याप्त धन व पक्के इरादे की ज़रूरत.सुरक्षा परिषद में वीटो शक्ति से उत्पन्न होता गतिरोध एक बड़ी समस्या, बहुपक्षीय संस्थाओं में कमज़ोर पड़ता भरोसा.

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...ब्राज़ील के बेलेम में, यूएन जलवायु शिखर सम्मेलन – COP30 में वैश्विक सरगर्मियाँ, स्वास्थ्य, खाद्य असुरक्षा और प्रवासन जैसे मुद्दों को भी जलवायु कार्रवाई में शामिल किए जाने पर ज़ोर.यूएन मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने, सूडान के अल फ़शर में हुए अत्याचारों को बताया - अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के रिकॉर्ड पर धब्बा.ग़ाज़ा में यूएन सहायता प्रयास जारी, इस बीच 90 प्रतिशत बच्चे मानसिक रोगों की चपेट में.धन की कमी से डगमगा रही है टीबी यानि तपैदिक का अन्त करने की मुहिम, हालाँकि उपचार में सफलता भी.एशिया प्रशान्त के अनेक देशों में, अतिरिक्त पोषण से युक्त गेहूँ और चावल की आपूर्ति से, बच्चों व महिलाओं को अनेक लाभ.

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...हिंसक टकराव से जूझ रहे सूडान के अल फ़शर शहर में आम लोगों पर भयावह अत्याचारों को अंजाम दिए जाने की ख़बरें, यूएन ने हिंसा पर विराम लगाने का किया आग्रहब्राज़ील के बेलेम में जलवायु सम्मेलन कॉप30 से पहले, महासचिव का आग्रह, बढ़ते तापमान की रफ़्तार को थामना होगासामाजिक विकास के लिए संकल्पों को वास्तविक बदलाव में तब्दील करने के आहवान के साथ दोहा में शिखर बैठक का समापनअफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम पोस्त की खेती पर प्रतिबन्ध के बाद उसमें गिरावट का रुझान जारीक़ानून व्यवस्था की पुनर्बहाली से होकर जाती है, लोकतंत्र की राह, सुनिएगा एक बातचीत

हिंसक संघर्ष से गुज़र रहे या फिर शान्ति समझौते के बाद लोकतंत्र की दिशा में आगे बढ़ने के लिए इच्छुक देशों में कोर्ट-कचहरी, जेल, क़ानून व्यवस्था अक्सर ध्वस्त हो चुकी होती है, और इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि वहाँ क़ानून के शासन को फिर से बहाल किया जाए. दक्षिण सूडान में यूएन शान्तिरक्षा मिशन (UNMISS) में ‘क़ानून का शासन व सुरक्षा क्षेत्र में सुधार' विभाग के निदेशक अनीस अहमद ने यूएन न्यूज़ हिन्दी के सचिन गौड़ के साथ बातचीत में बताया कि ढह चुकी क़ानून व न्यायिक व्यवस्था को फिर से खड़ा करने के लिए मोबाइल कोर्ट समेत अन्य दीर्घकालिक उपायों का सहारा लिया जाता है ताकि आमजन की समस्याओं का निपटारा हो और संस्थाओं में लोगों का भरोसा फिर से जग सके.कृत्रिम बुद्धिमता (एआई), टैक्नॉलॉजी, भ्रामक, जानबूझकर फैलाई जाने वाली ग़लत जानकारी जैसी समस्याओं से न्यायिक व क़ानून व्यवस्था की पुनर्बहाली में चुनौतियाँ और गहरी हुई हैं. उन्होंने कहा कि हर देश, हर समाज की तस्वीर अलग होती हैं, और इसलिए वहाँ स्थानीय सन्दर्भ के अनुरूप ही समाधान विकसित किए जाते हैं.

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...सूडान के अल फ़शर में, हाल के दिनों में RSF की भयावह हिंसा में साढ़े चार सौ से अधिक लोगों का जनसंहार. भारी संख्या में लोगों का पलायन.पूरे ग़ाज़ा पट्टी में, हाल के इसराइली हवाई हमलों के बावजूद, यूएन एजेंसियाँ सहायता प्रयासों में सक्रिय, इसराइली हमलों में 100 से अधिक लोगों की मारे जाने की ख़बरें.यूक्रेन में ऊर्जा ठिकानों पर रूस के सिलसिलेवार हमलों पर गहरी चिन्ता, युद्ध ले रहा है - टैक्नोलॉजी टकराव का रूप.संयुक्त राष्ट्र के युवा मामलों के सहायक महासचिव डॉक्टर फ़ेलिपे पाउलियर ने अपनी भारत यात्रा के दौरान, देशभर के अनेक युवा परिवर्तनकारियों से की मुलाक़ात.क्या ऐसा सम्भव है कि सामाजिक विकास के मार्ग में कोई भी पीछे नहीं छूटे. कुछ ऐसे ही मुद्दों पर प्रगति का जायज़ा लेने के लिए, 4-6 नवम्बर को, दोहा में हो रहा है – दूसरा विश्व सामाजिक विकास सम्मेलन.

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़िया...संयुक्त राष्ट्र हुआ 80 वर्ष का, 24 अक्टूबर को यूएन दिवस के अवसर पर, इस विश्व संगठन के उद्देश्यों के लिए फिर से वैश्विक एकजुटता की अपील.ग़ाज़ा युद्धविराम, व्यापक इसराइल-फ़लस्तीन टकराव के सबसे विनाशकारी चरणों में से एक को समाप्त करने का एक दुर्लभ अवसर, कहा मध्य पूर्व के लिए एक वरिष्ठ यूएन दूत ने.हरे-भरे वन हैं पृथ्वी के फेफड़े और इनसानों की आजीविका का सहारा, मगर फिर भी विशाल पैमाने पर क्यों हो रही वनों की कटाई.साइबर अपराध पर क़ाबू पाने के लिए, एक यूएन कन्वेंशन की जा रही है हस्ताक्षर के लिए प्रस्तुत. दुनिया भर में लोगों को मिल सकेगी धोखाधड़ी से सुरक्षा.विकलांग जन के समावेशन के मुद्दे पर, हाल ही में भारत के गोआ में सम्पन्न हुए - पर्पल फ़ेस्टिवल में हुआ, WeCare नामक फ़िल्म महोत्सव भी.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल हैं...विश्व भर में कुल निर्धन आबादी का 80 फ़ीसदी हिस्सा, सूखा, बाढ़, गर्मी और वायु प्रदूषणों जैसे जलवायु जोखिमों की चपेट में भीग़ाज़ा में नाज़ुक हालात में लागू युद्धविराम के बीच, ज़रूरतमन्द फ़लस्तीनी आबादी तक मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए प्रयास67 करोड़ लोग आज भी भूखे पेट सोने के लिए मजबूर, विश्व खाद्य दिवस पर इस चुनौती पर पार पाने का आहवानयूएन शान्तिरक्षा अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने, व नई उभरती चुनौतियों से निपटने पर चर्चा के लिए नई दिल्ली में बैठकऔर, अपना असर खो रही हैं एंटीबायोटिक दवाएं, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने फिर किया आगाह

भारत के गोवा राज्य में आयोजित होने वाला 'पर्पल फ़ेस्ट' विकलांग व्यक्तियों के लिए समर्पित एक अनोखा उत्सव है, जो समावेशन, सुलभता और समान अवसरों की भावना को उजागर करता है. इस वर्ष, इस महोत्सव में देश और दुनिया भर से लोग एकत्र हुए. सन्देश स्पष्ट था - सच्चा विकास तभी सम्भव है जब हर व्यक्ति की भागेदारी सुनिश्चित हो.इस अवसर पर यूएन न्यूज़ हिन्दी की अंशु शर्मा ने गोवा के सामाजिक कल्याण मंत्री सुभाष फलदेसाई से बातचीत में यह समझने की कोशिश की कि इस पहल के पीछे राज्य सरकार की क्या सोच और दृष्टिकोण है.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल हैं...ग़ाज़ा में युद्धविराम समझौते की घोषणा का ज़ोरदार स्वागत और ख़ुशी व उम्मीदों की लहर. यूएन एजेंसियों ने मानवीय सहायता आपूर्ति के लिए बढ़ाई अपनी सक्रियता.वेनेज़ुएला की मारिया मचाडो को मिला नोबेल शान्ति पुरस्कार, लोगों की लोकतांत्रिक आशाओं को बढ़ावा देने में अहम योगदान को मिली पहचान.गम्भीर मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहे हैं योरोप के स्वास्थ्यकर्मी, आ रहे हैं आत्महत्या तक के विचार.एक अरब से अधिक लोगों को तम्बाकू की लत, ई-सिगरेट के सेवन में भी भारी इज़ाफ़ा.सम्मानजनक रोज़गार हर व्यक्ति का अधिकार है, फिर भी दुनिया भर में क्यों हैं चिन्ताजनक हालात.हिन्दी दिवस पर, यूएन मुख्यालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल हैं...युद्ध से बदहाल ग़ाज़ा में मातृत्व और प्रसव सेवाओं पर गहरा असर, बड़े पैमाने पर विस्थापन का सिलसिला भी है जारी.भारत में दुर्गा पूजा उत्सव, धर्म, कला और सामाजिक सन्देश का संगम …मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची का हिस्सा.दुनिया भर में, अरबों लोगों के जीवन से बिजली अब भी गुल, और कैसे होगी हर व्यक्ति की स्वच्छ उर्जा तक पहुँच.औषधीय व सुगन्धित पौधे हैं स्वास्थ्य, विरासत और आजीविका के अनमोल भंडार, इन्हें सहेज कर रखा जाना है ज़रूरी.2 अक्टूबर को अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर, यूएन मुख्यालय में विशेष कार्यक्रम, गाँधीजी की विचारधारा आज और भी प्रासंगिक.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल हैं...यूएन महासभा के 80वें सत्र के उच्च स्तरीय जनरल डिबेट के लिए, यूएन मुख्यालय में जुटे विश्व भर के नेता, मुख्यालय बना कूटनैतिक हलचल का केन्द्र.यूएन महासभा के 80वें सत्र में विभिन्न मुद्दों पर उच्च स्तरीय सम्मेलन, AI, परमाणु हथियारों, मानसिक स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन पर हुई चर्चा.SDG मीडिया ज़ोन में हुई सतत विकास लक्ष्यों पर गहन चर्चा, युवाओं ने भी की अपनी आवाज़ बुलन्द.और, भारत की जिनाली मोदी को मिला यूनेप का युवा पृथ्वी चैम्पियन पुरस्कार, केले के कचरे से चमड़े का किया उत्पादन.

कहीं बाढ़, तो कहीं सूखा. या तो नदियों में बहुत अधिक जलस्तर है या फिर उसकी भीषण कमी महसूस की जा रही है. विश्व भर में ऐसे मौसमी रुझान देखने को मिल रहे हैं, जिनका पहले से अनुमान लगा पाना कठिन होता जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र की विश्व मौसम विज्ञान एजेंसी ने अपनी एक नई रिपोर्ट में चेतावनी जारी है कि 2024 में जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन की वजह से गहरा दबाव रहा और चरम मौसम घटनाओं, जैसेकी सूखा, तूफ़ान या बाढ़ से समाजों और अर्थव्यवस्थाओं को नुक़सान पहुँचा. यूएन न्यूज़ हिन्दी के सचिन गौड़ ने इस रिपोर्ट पर और जानकारी के लिए मौसम विज्ञान संगठन की वैज्ञानिक अधिकारी सुलग्ना मिश्रा के साथ बात की.उन्होंने बताया कि ग्लेशियर क्षेत्रों में यह लगातार तीसरा वर्ष है जब व्यापक पैमाने पर हिमनदों का पिघलना जारी रहा. बाढ़, सूखे व बारिश के रुझानों में आ रहे बड़े, असामान्य बदलाव अब नई सामान्य स्थिति बनती जा रही है.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल हैं...न्यूयॉर्क में यूएन मुख्यालय में, वार्षिक वैश्विक पंचायत के लिए सज चुका है मंच, ज्वलन्त मुद्दों पर अपनी राय रखने के लिए विश्व भर से जुटेंगे नेता.अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान द्वारा, लड़कियों की शिक्षा पर लगाई गई रोक को हुए चार वर्ष, 70 लाख बच्चे कक्षाओं से बाहर.2024 में जलवायु परिवर्तन ने जल संसाधनों पर डाला गहरा दबाव, चरम मौसम से आम जीवन और अर्थव्यवस्था भी प्रभावित… यूएन विशेषज्ञ सुलग्ना मिश्रा बताएंगी रिपोर्ट के अहम निष्कर्ष.विश्व में लैंगिक समानता की धीमी प्रगति, यूएन वीमेन एशिया-प्रशान्त की निदेशक क्रिस्टीन अरब से जानेंगे कि कहाँ रह गई है कमी.अरबों लोग आज भी पानी और बुनियादी स्वच्छता से वंचित, सतत विकास लक्ष्य - 6 की प्राप्ति, वास्तविकता से कितनी दूर... जानेंगे एसडीजीनामा में.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल हैं...सम्प्रभु फ़लस्तीनी राष्ट्र की स्थापना के समर्थन में यूएन महासभा में प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित उधर दोहा में इसराइल के हमले पर चिन्ता और ग़ाज़ा में हर तरफ़ पसरी है मौत की गन्ध. नेपाल में कई दिनों की अशान्ति के बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को बनाया गया अन्तरिम प्रधानमंत्री. अफ़ग़ानिस्तान में भीषण भूकम्प से भारी तबाही के कारण पहले से जारी मानवीय सहायता में उत्पन्न हुई बाधा, राहत के लिए सहायता धनराशि जुटाने की अपील भी. करोड़ों बच्चे भरपेट, स्वस्थ भोजन नहीं मिलने की वजह से कम वज़न के शिकार, तो दूसरी ओर, हानिकारक भोजन खाने के कारण करोड़ों बच्चे मोटापे की चपेट में भी. लैंगिक असमानता है सामाजिक प्रगति में बड़ी बाधा, कितना ज़रूरी है सतत विकास लक्ष्य -5, जानेंगे एसडीजीनाम में.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल हैं...अफ़ग़ानिस्तान में भीषण भूकम्प से हुई व्यापक बर्बादी के बाद, ज़रूरतमन्दों तक सहायता पहुँचाने में जुटी यूएन एजेंसियाँ.ग़ाज़ा में इसराइली सैन्य कार्रवाई हुई तेज़, लोग फिर विस्थापित होने के लिए मजबूर, मानवीय सहायता प्रयासों के लिए बढ़ी मुश्किलें.भारत के उत्तरी राज्यों में आई बाढ़ से जान-माल की भीषण हानि पर गहरा दुख.दुनियाभर में 75 करोड़ से अधिक वयस्क निरक्षर, सभी के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने के लक्ष्य की राह अभी कितनी दूर…जानेंगे एसडीजीनामा में.और, महिलाएँ, वैश्विक आबादी का आधा हिस्सा, लेकिन समाचार जगत में उनकी महज एक-चौथाई उपस्थिति.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल हैं...ग़ाज़ा में भयावह हालात का अन्त नहीं, व्यापक अकाल की आशंका भी, यूएन महासचिव ने फिर दोहराई युद्धविराम, मानवीय सहायता और बन्धकों की रिहाई की अपील.लड़कियों की शिक्षा पर तालेबान की पाबन्दियों के बावजूद, उनकी पढ़ाई लिखाई के लिए अफ़ग़ान नागरिकों में विशाल समर्थन.विश्व खाद्य कार्यक्रम और भारत के बीच समझौते से, संकटग्रस्त इलाक़ों में पोषण और अन्न की आपूर्ति में सुधार की उम्मीद.प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से गहरा रहा है झीलों के लिए संकट. इस प्राकृतिक धरोहर को बचाने के प्रयास हैं ज़रूरी.सतत विकास लक्ष्य 3: बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और टीकाकरण से कैसे पड़ेगी मज़बूत समाज और अर्थव्यवस्था की नींव.

विश्व खाद्य संगठन (WFP) और भारत ने वैश्विक भूख से लड़ने के लिए एक नया समझौता किया है. इस साझेदारी के तहत भारत, WFP को पोषक तत्वों में समृद्ध चावल उपलब्ध कराएगा. यह चावल संकटग्रस्त देशों में ज़रूरतमन्द लोगों तक पहुँचाया जाएगा ताकि कुपोषण से बचाव हो सके.भविष्य में चावल के अलावा, अन्नपूर्ति मशीनें, जन पोषण केन्द्र, स्मार्ट वेयरहाउसिंग और विशाल अनाज भंडारण तम्बू जैसी तकनीकों पर भी मिलकर काम किया जाएगा.यह समझौता क्या है और क्यों इतना अहम माना जा रहा है, इस पर विस्तार से जानकारी के लिए, नई दिल्ली में हमारी सहयोगी अंशु शर्मा ने बात की, भारत में विश्व खाद्य कार्यक्रम के संचार व मीडिया प्रमुख, परविन्दर सिंह से.

भारत में संयुक्त राष्ट्र सूचना केन्द्र (UNIC) ने 1M1B (1Million for 1Billion) संस्थान के साथ साझेदारी में एक कार्यक्रम आयोजित किया, जहाँ भारत के कोने-कोने से आए युवा परिवर्तनकर्ता, अपने सपनों और संघर्षों की कहानियाँ लेकर आए. ये युवा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी नई तकनीक को केवल किताबों से आगे बढ़ाकर, ज़मीनी वास्तविकता में बदल रहे हैं - गाँवों की समस्याओं से लेकर शहरों की चुनौतियों तक. उनके विचार और नवाचार न केवल जीवन बदल रहे हैं, बल्कि समाज की हर परत को छू रहे हैं. नई दिल्ली में हमारी सहयोगी अंशु शर्मा ने 1M1B के संस्थापक, मानव सुबोध से बातचीत करके, यह जानना चाहा कि एआई को गाँव-गाँव, शहर-शहर ले जाने के लिए वो किस तरह से काम कर रहे हैं.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल हैं...यूएन एजेंसियों ने, लगभग 23 महीनों के युद्ध से त्रस्त ग़ाज़ा में की अकाल की पुष्टि. लगभग पाँच लाख लोग भुखमरी की चपेट में.दुनिया भर में हर दिन भोजन की अरबों थालियों के बराबर खाना कर दिया जाता है बर्बाद, जबकि दूसरी तरफ़ करोड़ों लोग रह जाते हैं भूखे पेट. सतत विकास लक्ष्य-2, इसी भूख के संकट को ख़त्म करने पर नज़र टिकाता है. जानेंगे विस्तार से एसडीजी-नामा में.दक्षिण एशिया में बारिश और बाढ़ का क़हर. पाकिस्तान और भारत में सैकड़ों लोगों की मौतें, और सम्पत्तियों का भारी नुक़सान.बच्चों को अनुशासित करने के लिए अक्सर घरों और स्कूलों में दिया जाता है शारीरिक दंड, मगर WHO के अनुसार, ऐसा दंड, जीवन भर उनके दिलो-दिमाग़ और विकास को करता है प्रभावित.पश्चिम बंगाल में, कुछ महिलाओं ने संभाली, अपने गाँवों को खुले स्थानों में शौच करने के चलन से छुटकारा दिलाने की ज़िम्मेदारी, कैसे हो रहा है ये सम्भव.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल हैं...ग़ाज़ा में युद्ध और बेदख़ली ने बढ़ाई लोगों की पीड़ा, विकलांगों और बच्चों पर गहरा असर. इस बीच भुखमरी और गहराई.वर्ष 2024 में, 4 हज़ार से अधिक लोग अशान्ति में यौन हिंसा के शिकार, अफ़ग़ान महिलाओं की स्थिति भी चिन्ताजनक.प्लास्टिक प्रदूषण रोकने के उपायों पर नहीं बन सकी अन्तरराष्ट्रीय सहमति.श्रीलंका को अतीत के साए से निकलकर, बेहतर भविष्य के लिए काम करने का सुझाव.दुनिया भर में, 80 करोड़ लोग अब भी निर्धनता के अँधेरे में, कैसे मिलेगा छुटकारा...चर्चा एसडीजीनामा में....AI के बढ़ते प्रयोग के मद्देनज़र, महिलाओं को, इस तकनीक में सक्षम बनाने के लिए, यूएन वीमेन का एक AI स्कूल.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल हैं...ग़ाज़ा में मानवीय संकट और गहराया, 12 हज़ार से अधिक बच्चे कुपोषण से पीड़ित, उधर ग़ाज़ा पर इसराइल के पूर्ण सैन्य क़ब्ज़े की ख़बरों पर गहरी चिन्ता.अवाज़ा सम्मेलन में, 32 भूमिबद्ध देशों के लिए व्यापार व विकास रणनीति पर चर्चा, और जिनीवा में वैश्विक प्लास्टिक सन्धि वार्ता.एशिया-प्रशान्त में बाघों की वापसी के बारे में, संरक्षण प्रयासों ने किस तरह जगाई नई उम्मीद.माहवारी निर्धनता का व्यापक संकट, इस साल भी, करोड़ों महिलाएँ स्वच्छता उत्पादों से क्यों हैं वंचित.संयुक्त राष्ट्र की एक युवा स्वयंसेविका शिखा श्रीकान्त के साथ ख़ास बातचीत - धरती बचाने में मदद करने की उनकी मुहिम के बारे में.

दुर्लभ प्रजातियों को बचाना हो या सतत जीवनशैली को बढ़ावा देना - एक स्वस्थ धरती ही समृद्ध समाज की नींव है. पेड़ लगाना, सफ़ाई करना या जागरूकता बढ़ाना - हर छोटा क़दम मायने रखता है, और जब ये क़दम युवाओं के हों, तो असर और भी गहरा होता है. 28 जुलाई को विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस था और 12 अगस्त को अन्तरराष्ट्रीय युवा दिवस. इस उपलक्ष्य में हमारी सहयोगी अंशु शर्मा ने बात की भारत में UNV की युवा स्वयंसेवक, शिखा श्रीकान्त से, जो अपने जुनून व अनुभव से धरती की रक्षा में विशेष योगदान दे रही हैं.