वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ... ग़ाज़ा में युद्धविराम के दौरान भी बच्चों की मौत की बढ़ती संख्या पर गहरी चिन्ता, विशाल मानवीय ज़रूरतों के बीच वित्तीय सहायता की अपील.अमेरिका-ईरान समझौते का स्वागत, परमाणु सत्यापन में सहयोग को तैयार IAEA. अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान फ़रमान से बाल विवाह बढ़ने और महिलाओं के अधिकारों पर असर की आशंका.अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, नहीं हो सकती नफ़रत फैलाने का बहाना, ऑनलाइन हेट स्पीच पर चिन्ता. और, 2025 में बाल अधिकार उल्लंघन चरम पर, सरकारी बल अधिक ज़िम्मेदार.मानव स्वास्थ्य व कल्याण, मानसिक शान्ति और ख़ुशहाल जीवन के लिए, 21 जून को मनाया जा रहा है अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस.

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...होर्मुज़ में तनाव व संकट बरक़रार, एक जहाज़ पर हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मौत. यूएन प्रमुख ने की शान्ति स्थापना की अपील.अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं पर सत्तारूढ़ तालेबान शासन का दमन बढ़ा, मानवाधिकारों का सम्मान किए जाने की पुकार.काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य -DRC में इबोला पर क़ाबू पाने के लिए तेज़ प्रयास जारी, मगर संक्रमण कोविड से भिन्न. दुनिया भर में शरणार्थियों की संख्या हुई कुछ कम, मगर अब भी करोड़ों को व्यापक मदद की दरकार.मानवाधिकार हैं मानवता के डीएनए का हिस्सा, कहा उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने, वैश्विक मानवाधिकार गठबन्धन आया वजूद में.भारत में लोगों को तम्बाकू सेवन की लत छुड़ाने में मददगार साबित हो रही है राष्ट्रीय परामर्श सेवा.

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ:अन्तरराष्ट्रीय शान्तिरक्षा दिवस पर उन साढ़े चार हज़ार से अधिक शान्तिरक्षकों का सम्मान, जिन्होंने किया अपना सर्वोच्च बलिदान. इस बीच शान्तिरक्षा के दौरान असाधारण सेवा के लिए सम्मानित होने वालों में एक भारतीय मेजर अभिलाषा बराक भी शामिल.काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला पर क़ाबू पाने के प्रयास जारी, सावधानियों की भी पुकार.म्याँमार में 2017 में जानलेवा दमन से बचने के लिए पनाह लेने बांग्लादेश पहुँचे रोहिंग्या शरणार्थियों को नहीं भुला देने की पुकार.भोजन का सुरक्षित होना है बेहद ज़रूरी, भोजन में लापरवाही से हो जाती हैं लाखों मौतें.

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ:काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में घातक इबोला वायरस का प्रकोप जारी, विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम जुटी नियंत्रण प्रयासों में.साल 2025 में हिंसक टकराव सम्बन्धी यौन हिंसा मामलों में दोगुना उछाल, युद्ध के एक हथियार के रूप में किया गया इस्तेमाल.यूक्रेन युद्ध बेक़ाबू होने के जोखिम के बीच, सुरक्षा परिषद की आपात बैठक, मौत का घातक चक्र रोकने का आग्रह.रिकॉर्ड ध्वस्त कर देने वाले गर्म वर्षों की ओर बढ़ रही है दुनिया, यूएन मौसम विज्ञान एजेंसी की चेतावनी.और अन्तरराष्ट्रीय शान्तिरक्षक दिवस पर लेबनान में सेवारत भारतीय मेजर समेत चार यूएन शान्तिरक्षकों को मिला सम्मान.

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ:काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला वायरस का प्रकोप, नियंत्रण प्रयासों में जुटी यूएन एजेंसियाँ.ग़ाज़ा में स्वास्थ्य सेवाएँ ठप और बिगड़ रहे हैं मानवीय हालात, यूएन ने की शान्ति स्थापना की अपील.अफ़ग़ान शरणार्थियों के मेज़बान देशों से आग्रह, शरण चाहने वालों को उनकी इच्छा के विरुद्ध अफ़ग़ानिस्तान वापिस न भेजा जाए.बढ़ते शहरीकरण के बीच सुरक्षित और समावेशी शहरों की चुनौती पर भारत में UN -Habitat के नीलेश प्रकाश राजाध्यक्ष के बातचीत.और सुनेंगे - दक्षिण सूडान में महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों पर, वहाँ तैनात एक भारतीय चिकित्सक का निजी अनुभव.

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ:ग़ाज़ा पट्टी और पश्चिमी तट व लेबनान में इसराइली सैन्य हमले जारी, हिंसा और विस्थापन की चपेट में लाखों लोग.यूक्रेन में रूसी सैन्य बल ने किया अब तक का सबसे गहन व लम्बे समय तक चलने वाले हमला.हंटावायरस से प्रभावित MV होंडियस जहाज़ का मिशन हुआ पूरा, WHO ने कहा - फ़िलहाल जोखिम कम.खाद्य पैकेजिंग में रीसायकिल प्लास्टिक का प्रयोग हो सकता है ख़तरनाक, विशेषज्ञों की चेतावनी.'निकोटीन पाउच' के जाल में फँस रहे युवा व किशोर, WHO ने इसके लुभावने आक्रामक प्रचार पर जारी किया बड़ा ऐलर्ट.

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ:लेबनान में लागू नाज़ुक युद्धविराम के बावजूद, लोगों की हत्याओं व विस्थापन का सिलसिला जारी.तेल की बढ़ती क़ीमतों ने फिर उजागर किया प्लास्टिक और जीवाश्म ईंधन के बीच का सम्बन्ध.अटलांटिक महासागर में एक क्रूज़ जहाज़ पर फैला हंटावायरस प्रकोप, WHO ने कहा, यह कोविड जैसी किसी नई महामारी की शुरुआत नहीं.संयुक्त राष्ट्र ने की प्रवासन समझौते पर प्रगति की समीक्षा, भारत के ‘e-Migrate' मॉडल की सराहना और प्रवासी अधिकारों पर ज़ोर. दुनिया भर में लगभग 3 अरब लोग पर्याप्त आवास से वंचित, आगामी विश्व शहरी मंच के 13वें सत्र में होगी चर्चा.

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ:मध्य पूर्व क्षेत्र में जारी हिंसक युद्ध और होर्मुज़ समुद्री मार्ग में व्यवधान का आर्थिक असर दुनिया भर में, लेबनान में और बिगड़ रहे हैं मानवीय हालात.संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक का भारत दौरा, मुश्किल भरे दौर में एकजुटता की की अपील.नागरिकों की ख़ुशहाली के बारे में क्यों दिया जाता है – भूटान का उदाहरण. बताएंगे - भूटान में यूएन रैज़िडैंट कोऑर्डिनेटर – गौरव रे.दुनिया भर में सैन्य बजटों में हो रही है बेतहाशा वृद्धि, इससे - लोगों के विकास का अधिकार किस तरह होता है प्रभावित.सऊदी अरब में 'शोषणकारी कफ़ाला' व्यवस्था को समाप्त करने की अपील, प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा, गरिमा और अधिकार सुनिश्चित करने पर बल.

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...दुनिया भर में सबसे अधिक भूख, सिमटी कुछ चुनिन्दा युद्धग्रस्त देशों में.लेबनान में इसराइली हमलों से मानवाधिकारों के गम्भीर उल्लंघन पर चिन्ता, हिज़बुल्लाह के हमलों से भी अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून का उल्लंघन.मध्य पूर्व में संकट से तेल व गैस के बाद अब खनिजों की भारी कमी, देशों के बीच मची होड़.कामकाज के लम्बे घंटे, रोज़गार की असुरक्षा और कार्यस्थल पर उत्पीड़न जैसे जोखिमों के कारण, हर साल हो जाती है लगभग 9 लाख लोगों की मौत.तेज़ गति से भागती कृत्रिम बुद्धिमत्ता - यानि AI पर - क्यों है नियम रूपी लगाम कसे जाने की ज़रूरत.

इस सप्ताह के बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...लेबनान में कई सप्ताह से धधक रहे हिंसक टकराव पर विराम की घोषणा, यूएन महासचिव ने किया स्वागतस्वास्थ्य सेवाओं पर भीषण दबाव, बच्चों के लिए जोखिम, विस्थापित आबादी के लिए गहरी पीड़ा सूडान में गृहयुद्ध के तीन वर्ष, आम नागरिकों की विशाल आवश्यकताएँ, बर्लिन में एकजुटता सम्मेलन रॉकेट से होने वाला उत्सर्जन और अन्तरिक्ष में फैलता प्रदूषण बढा रहा है चिन्ताएँसंयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव के चयन की प्रक्रिया शुरू, कुछ दिलचस्प जानकारीऔर, यूएन में युवा फ़ोरम में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुँची भारत की युवा कार्यकर्ता के साथ बातचीत

इस सप्ताह के बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...मध्य पूर्व में अमेरिका व ईरान के दरम्यान युद्धविराम की घोषणा के बाद, कुछ शान्ति के आसार, मगर तनाव और भ्रम अब भी बरक़रार. शनिवार को पाकिस्तान में होने वाली है बातचीत.सूडान में भीषण युद्ध को हो रहे हैं तीन वर्ष, जिस दौरान हुई है भयावह क्रूरता और यौन हिंसा. लाखों लोग अब भी विस्थापित.अतीत की तुलना में महिलाओं का औसत जीवन हुआ लम्बा मगर स्वास्थ्य कसौटी पर हालात अब भी बहुत अच्छे नहीं, आख़िर क्या हैं कारण.पृथ्वी पर जीवन के लिए अत्यन्त ज़रूरी – पानी की अहमियत को आख़िर इनसान क्यों नहीं समझ पा रहा है.कहावत है कि Health is Wealth यानि स्वास्थ्य ही असली सम्पदा है मगर फिर लोग क्यों हैं बेपरवाह.

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...यूएन प्रमुख ने मध्य पूर्व युद्ध का दायरा फैलने और इसके गम्भीर वैश्विक प्रभावों के बारे में जताई गहरी चिन्ता, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के अनुरूप समाधान निकाले जाने पर ज़ोर. मध्य पूर्व युद्ध ने तेल व गैस जैसे ऊर्जा साधनों की आपूर्ति पर डाला गम्भीर असर, दक्षिण एशिया क्षेत्र भी अछूता नहीं. ऐसे में सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे अक्षय साधनों की तरफ़ बढ़त के लिए बढ़ रही है हिमायत.मुख्य रूप से फ़लस्तीनियों के लिए, मृत्युदंड का प्रावधान करने वाले इसराइली क़ानून को रद्द किए जाने की पुकार.यूएन प्रमुख ने मुख्यालय में की, न्यूयॉर्क सिटी के मेयर ज़ोहरान ममदानी के साथ मुलाक़ात.

इस सप्ताह के बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...ईरान के मिनाब बालिका स्कूल पर हुए हमले में मृत छात्राओं के लिए न्याय की पुकार, मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने, अमेरिका से जाँच के नतीजे प्रकाशित करने की भी मांग की.यूएन प्रमुख ने मध्य पूर्व में युद्ध को बताया नियंत्रण के बाहर, Diplomacy का सहारा लेने की अपील, बिगड़ते हालात से वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर मंडराता ख़तरा.यूक्रेन में युद्ध के चार वर्ष बाद भी, आम लोगों के लिए लगातार बढ़ रहा है ख़तरा, मानवाधिकार परिषद में चर्चा.400 वर्षों तक जारी रही पार-अटलांटिक दास प्रथा है, मानवता के विरुद्ध गम्भीर अपराध, पीड़ितों के लिए न्याय और मुआवज़ा मुहैया कराने की मांग वाला प्रस्ताव यूएन महासभा में,पारित.नवीन उपकरणों व नुस्ख़ों की मदद से हो सकता है टीबी का अन्त. WHO ने जारी कीं नई सिफ़ारिशें.दुनिया भर में हर साल एक अरब टन भोजन कर दिया जाता है बर्बाद, जिसे बचाकर करोड़ों लोगों का पेट भरा जा सकता है.

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...मध्य पूर्व में धधकते युद्ध में जान-माल की व्यापक हानि, लाखों लोग विस्थापित.यूएन महासचिव ने कहा, हिंसक टकराव को बेक़ाबू होने से रोकना होगा', युद्ध पर कूटनीति की विजय है ज़रूरी.अफ़ग़ानिस्तान के सीमावर्ती इलाक़ों में पाकिस्तान के साथ झड़पों और ईरान में संकट ने बढ़ाई अफ़ग़ान नागरिकों की मुश्किलें.ग़ाज़ा पट्टी से मरीज़ों को, बेहतर इलाज के लिए बाहर ले जाने के लिए खोली गई है रफ़ाह सीमा चौकी.5 वर्ष की आयु से पहले ही हो रही है, लगभग 50 लाख बच्चों की मौत, यूएन की एक नई रिपोर्टऔर, विश्व जल दिवस के अवसर पर एक विशेष बातचीत - किस तरह की जा सकती है इस अहम संसाधन की रक्षा.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:ईरान, लेबनान समेत मध्य पूर्व के अनेक देश भीषण संकट की चपेट में, ईंधन आपूर्ति व खाद्य क़ीमतों पर बढ़ता प्रभाव, लगातार बिगड़ रही है मानवीय स्थिति.मध्य-पूर्व की उथल पुथल और पाकिस्तान के साथ झड़पों ने बढ़ाई अफ़ग़ानिस्तान के लोगों की मुश्किलें.रूस द्वारा यूक्रेनी बच्चों को जबरन अपने नियंत्रण वाले इलाक़ों में ले जाया जाना, मानवाधिकार जाँचकर्ताओं ने बताया 'मानवता के विरुद्ध अपराध'. विश्व भर में लगभग दो-तिहाई बच्चों के साथ ऑनलाइन डराए-धमकाए की घटनाएँ, मामलो में हो रही है लगातार वृद्धि.महिलाओं की स्थिति पर आयोग के 70वें सत्र की हुई शुरूआत, न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में दुनिया भर से जुट रहे हैं प्रतिनिधि.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:ईरान पर इसराइल व अमेरिका की बमबारी और ईरान के जवाबी हमलों का सिलसिला जारी, मध्य पूर्व में तनाव चरम पर, लगभग 16 देश हिंसक टकराव की चपेट में.पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान के सीमावर्ती इलाक़ों में सैन्य झड़पों से हज़ारों लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर.विश्व के किसी भी देश में नहीं है महिलाओं के लिए पूर्ण क़ानूनी समानता, महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों के उल्लंघन के मामलों में उछाल.पारिस्थितिकी तंत्र और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम हैं औषधीय पौधे.1 अरब से अधिक लोग मोटापे की चपेट में, समाधान की सख़्त आवश्यकता.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:पाकिस्तान- अफ़ग़ानिस्तान के बीच झड़पों के बाद, पहले से ही संकट का सामना कर रहे अफ़ग़ान नागरिकों के लिए बढ़ी चिन्ता.यूक्रेन युद्ध को हुए चार वर्ष, यूएन महासभा ने लगाई स्थाई शान्ति व युद्धविराम की पुकार.यूएन मादक पदार्थ नियंत्रण बोर्ड – INCB बड़ी ड्रग खेप रोकने में सफल, फ़ेंटानिल की 1.6 अरब जानलेवा डोज़ का ख़तरा टला.3 अरब लोगों के पास पर्याप्त आवास नहीं, वहीं दुनिया भर में 5 वर्ष में, 1 अरब लोगों को अपनी भूमि और घर खो देने का डर. मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय की प्रवक्ता रवीना शमदासानी से, मानवाधिकारों की अहमियत और भारत में AI किड के नाम से मशहूर अजू के साथ हुई ख़ास बातचीत की झलकियाँ...

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:सूडान में नज़र आए जातीय सफ़ाए और जनसंहार के स्पष्ट चिह्न, भविष्य में भी बड़े अत्याचारों के गम्भीर ख़तरे की चेतावनी.ग़ाज़ा पट्टी और पश्चिमी तट में भी 'जातीय सफ़ाए' की गहरी आशंकाओं पर संयुक्त राष्ट्र ने जताई गम्भीर चिन्ता.यूक्रेन में रूसी हमले जारी, ठप सेवाओं व समर्थन में कटौती से भीषण दबाव में महिलाएँ.भारत में AI IMPACT SUMMIT आयोजित, यूएन प्रमुख ने कहा “एआई सबकी होना चाहिए.”और सुनेंगे AI Impact Summit में शिरकत करने वाले, वरिष्ठ यूएन अधिकारियों के विचार..

जब दुनिया तेज़ रफ़्तार वीडियो, रील्स और एआई टैक्नॉलॉजी से तैयार आवाज़ों से भरी हुई है, तब भी सम्वाद का एक ऐसा माध्यम भी है जो दिखाई दिए बना ही, लोगों की ज़िन्दगी में आज भी मौजूद है…रेडियो. ये केवल खब़रें सुनाने का साधन नहीं है, बल्कि संकट के समय में लोगों की आख़िरी उम्मीद, अकेलेपन में साथ देने वाली आवाज़ और अँधेरे हालात में भरोसे की एक किरण भी है...

बाढ़, चक्रवाती तूफ़ान, ताप लहरों समेत अन्य आपदाओं की समय रहते चेतावनी देने में, कृत्रिम बुद्धिमता (AI) आधारित उपायों के ज़रिए न केवल मदद मिल सकती है, बल्कि इससे जान-माल की हानि में कमी लाना भी सम्भव है.संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (UNDRR) के प्रमुख कमल किशोर, AI Impact Summit में हिस्सा लेने के लिए भारत में हैं, जहाँ उन्होंने यूएन न्यूज़ की अंशु शर्मा के साथ एक ख़ास बातचीत में बताया कि एआई की मदद से, समय रहते पता लगाया जा सकता है कि कौन-से इलाक़े और लोग सबसे अधिक जोखिम में हैं, ताकि ज़रूरतों के अनुरूप समय पर तैयारी की जा सके और राहत पहुँचाई जा सके. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि एआई का उपयोग, हमेशा नैतिक तरीक़े से, लोगों की निजता की रक्षा करते हुए और मानवीय निगरानी के साथ होना चाहिए, ताकि इसका लाभ सभी तक पहुँचे और कोई भी पीछे नहीं छूट जाए.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:सूडान के अल फ़शर शहर में भयावह हिंसा को दिया गया अंजाम, मानवाधिकार कार्यालय ने जताई युद्ध अपराधों की आशंका.संयुक्त राष्ट्र ने इसराइल से, पश्चिमी तट में क़ब्ज़ा बढ़ाने के लिए उठाए क़दमों को वापिस लेने का किया आग्रह.हिंसक चरमपंथ और आतंकवाद को हवा देने के लिए नई, उभरती टैक्नॉलॉजी के दुरुपयोग पर बढ़ती चिन्ता.महिलाएँ उच्च शिक्षा में आगे, मगर विज्ञान व गणित विषयों में हिस्सेदारी अब भी केवल 35 प्रतिशत. एआई और डिजिटल टैक्नॉलॉजी के इस दौर में भी रेडियो है, संचार का एक सशक्त माध्यम.

हर वर्ष, 13 फ़रवरी को, विश्व रेडियो दिवस पर, हम उस माध्यम की अहमियत को रेखांकित करते हैं जो सीमाओं से परे जाकर लोगों को जोड़ता है. इसी भावना को आगे बढ़ाता है रेडियो उड़ान, भारत का एक अनूठा रेडियो स्टेशन, जिसे मुख्य रूप से दृष्टिहीन संचालित करते हैं और जो जानकारी व आत्मविश्वास के ज़रिए विकलांगजन को सशक्त बनाता है. रेडियो उड़ान किन मायनों में अलग है, इसकी शुरुआत कैसे हुई और इसका असर किन ज़िन्दगियों पर पड़ा, यह जानने के लिए यूएन न्यूज़ की अंशु शर्मा ने रेडियो उड़ान के संस्थापक, दानिश महाजन से बातचीत की, जिन्होंने अपने सफ़र और उद्देश्य के बारे में विस्तार से बताया.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:संकटग्रस्त समुदायों तक जीवनरक्षक सेवाएँ पहुँचाने के लिए, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने वित्तीय सहायता की अपील की.अमेरिकी संसद ने एचआईवी/एड्स के विरुद्ध लड़ाई के लिए, 6 अरब डॉलर के पैकेज को दी स्वीकृति, यूएन ने किया स्वागत.विश्व भर में कैंसर के 40 फ़ीसदी मामलों में रोकथाम सम्भव, बचाव उपायों पर बल.अमेरिका-रूस परमाणु सन्धि की अवधि हुई समाप्त, यूएन प्रमुख ने कहा विश्व के लिए एक 'गम्भीर क्षण'.भारतीय शान्तिरक्षक वैश्विक शान्ति और सुरक्षा में महत्वपूर्ण...सुनेंगे यूएन रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर स्टेफ़ान प्रीज़नर के विचार.एआई के ज़रिए बच्चों की 'डीपफ़ेक' यौन सामग्री में उछाल, UNICEF की चेतावनी.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:यूएन महासचिव ने पेश की अपने कार्यकाल के अन्तिम वर्ष की प्राथमिकताएँ, उभरते तनावों और लापरवाही भरे क़दमों के ख़तरनाक दुष्परिणामों के प्रति चेतावनी.एक अहम मोड़ पर खड़े ग़ाज़ा पट्टी में हालात पर, सुरक्षा परिषद की एक उच्चस्तरीय बैठक में चर्चा.यूएन प्रमुख ने 'अन्तरराष्ट्रीय हॉलोकॉस्ट स्मरण दिवस' पर दिया मानवता के लिए एकजुटता का सन्देश.विश्व स्वास्थ्य संगठन ने, स्कूल में बच्चों के लिए पोषणयुक्त भोजन से जुड़ी गाइडलाइन्स की जारी.दक्षिण सूडान में शान्ति समझौते पर ख़तरे के बीच, बाढ़ और मानवीय संकट से जूझ रहे हैं समुदाय...एक विशेष बातचीत.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:यूएन उप महासचिव ने बहुपक्षवाद और वैश्विक नियमों की रक्षा का किया आह्वान, महासभा अध्यक्ष ने अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के प्रति घटते सम्मान पर जताई चिन्ता.ग़ाज़ा में पुनर्निर्माण की चर्चाओं के बीच, यूएन एजेंसियों ने तत्काल मानवीय राहत को बताया एक अहम प्राथमिकता .संक्रमण के दौर से गुज़र रहे सीरिया में, हिंसक झड़पों से मौजूदा प्रगति पर जोखिम.बढ़ते जल संकट से जूझती दुनिया, अब 'जल दिवालिएपन' के दौर में प्रवेश कर चुकी है, अरबों लोग चपेट में.प्रकृति को बचाने में कम, उसे नुक़सान पहुँचाने में हो रहा है कहीं अधिक ख़र्च.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:यूक्रेन में रूसी सैन्य हमलों और भीषण सर्दी की दोहरी मार, बुनियादी ज़रूरतों के लिए जूझ रहे हैं आम लोग.ईरान में चिन्ताजनक स्थिति पर, संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से किया - अधिकतम संयम बरतने का आग्रह.ग़ाज़ा में सर्द मौसम में तूफ़ान का क़हर, बाढ़ के गम्भीर ख़तरे वाले क्षेत्रों में रहने के लिए विवश 8 लाख लोग.यूएन एंतोनियो गुटेरेश ने, दरारों, असमानताओं व संघर्षों के दौर में, पारस्परिक सहयोग को बताया - इस वर्ष के लिए अपनी प्राथमिकता.वायु प्रदूषण से जूझते दक्षिण एशिया में, स्वच्छ हवा के लिए समाधानों से उपजी उम्मीद.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:सूडान में हिंसक युद्ध के 1000 दिन, आम नागरिकों के लिए नारकीय स्थितियूक्रेन के अनेक शहरों पर व्यापक हमलों में लोगों की परेशानियाँ बढ़ीं, वहीं ईरान में महंगाई के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान अनेक लोग हताहत.अन्तरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका के पीछे हटने की घोषणा, यूएन ने जताया विश्व समुदाय की सेवा जारी रखने का संकल्प. म्याँमार में हो रहे चुनावों की वैधता और स्वतंत्रता पर सवाल, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने की कोशिश का आरोप.भारत के ओडिशा में यूनीसेफ़ के प्रयासों से कैसे आ रहा है स्कूली लड़कियों के जीवन में बदलाव.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:ग़ाज़ा में बारिश, ठंड, जलभराव की वजह से फ़लस्तीनी आबादी के लिए गम्भीर हालात, उधर सूडान में हिंसक टकराव से प्रभावित आबादी की पीड़ा पर गहरी चिन्ता.अफ़ग़ानिस्तान में, 2026 में भी गम्भीर मानवीय संकट बने रहने की आशंका, आर्थिक बदहाली और प्राकृतिक आपदाओं से हालात बदतर.कोविड-19 अब भी बन सकता है गम्भीर संक्रमण की वजह, मगर वैक्सीन है बचाव का एक असरदार उपाय.संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका के बीच समझौता, 17 देशों में मानवीय राहत के लिए 2 अरब डॉलर की मदद.यूएन प्रमुख का नए वर्ष पर सन्देश, वैश्विक शान्ति, न्याय और युद्धों के बजाय निर्धनता के विरुद्ध लड़ाई पर बल.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:श्रीलंका में क़रीब एक महीना पहले आए चक्रवाती तूफ़ान दित्वाह से प्रभावित 10 लाख से अधिक लोग अब भी सहायता पर निर्भर.म्याँमार में चुनाव से पहले, हिंसा और दमन के मामलों में तेज़ी पर चिन्ता, उधर मध्य अफ़्रीकी गणराज्य - CAR में भी चुनावों को बताया गया अहम.ईरान के परमाणु कार्यक्रम व अप्रसार के मुद्दे पर सुरक्षा परिषद में नहीं बनी सहमति, आपसी वार्ता के ज़रिए समाधान पर बल.अफ़ग़ानिस्तान के पहाड़ी इलाक़ों में कठोर सर्दियों का प्रकोप, यूएन खाद्य एजेंसी WFP बनी सहारा.यूएन पर्यावरण कार्यक्रम के ‘पृथ्वी चैम्पियन' पुरस्कार से सम्मानित, भारत की सुप्रिया साहू के साथ एक विशेष बातचीत.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा वर्ष 2025 के ‘Champions of the Earth' पुरस्कार के लिए दुनिया भर से चुने गए पाँच लोगों में भारत की सुप्रिया साहू भी शामिल हैं. तमिलनाडु सरकार में सहायक मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत सुप्रिया साहू को, हाल ही में यूनेप ने, ‘प्रेरणा और कार्रवाई' की श्रेणी में सम्मानित किया है. सुप्रिया अत्यधिक गर्मी से निपटने के लिए व्यावहारिक उपायों पर काम कर रही हैं. इनमें स्कूलों में ‘ठंडी छत' पहल, प्रकृति की बहाली, और जलवायु जोखिमों को ध्यान में रखकर, ढाँचा विकास को आगे बढ़ाना शामिल है. यूएन न्यूज़ की अंशु शर्मा के साथ एक ख़ास बातचीत में उन्होंने बताया कि तमिलनाडु जैसे प्रदेश के लिए जलवायु परिवर्तन के असर कम करने और अनुकूलन के लिए अभी से तैयार होना क्यों अहम है...

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:ग़ाज़ा में फ़िलहाल अकाल टला, मगर लाखों लोग अब भी भूख व कुपोषण की चपेट में.सूडान में कोर्दोफ़ान के अल-ओबेद इलाक़े पर हमले की आशंका, नए सिरे से विस्थापन का जोखिम.पारम्परिक चिकित्सा पद्यति पर दूसरा शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में सम्पन्न, दिल्ली घोषणापत्र के साथ, सामने आया वैश्विक स्वास्थ्य रोडमैप.दुनिया भर में बढ़ते मतभेदों, संघर्षों, टकरावों, अनिश्चितताओं और चुनौतियों के हालात में, यूएन मुख्यालय में 'विश्व ध्यान दिवस' की महत्ता पर चर्चा.फ़रवरी 2026 में भारत में होगा एआई शिखर सम्मेलन. इस सिलसिले में यूएन मुख्यालय में हुई प्रारम्भिक चर्चा.

पारम्परिक चिकित्सा पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का दूसरा वैश्विक शिखर सम्मेलन, नई दिल्ली में 17 से 19 दिसम्बर 2025 तक आयोजित किया गया. WHO और भारत सरकार के आयुष मंत्रालय की साझेदारी में हुए इस सम्मेलन में दुनिया भर से नीति - निर्माता, वैज्ञानिक, चिकित्सक और आदिवासी ज्ञान-धारक शामिल हुए. चर्चा का केन्द्र, पारम्परिक चिकित्सा को विज्ञान, साक्ष्य और ज़िम्मेदार व्यवहार के आधार पर स्वास्थ्य प्रणालियों में सुरक्षित और नैतिक तरीक़े से जोड़ने पर रहा.यूएन न्यूज़ की अंशु शर्मा ने, शिखर सम्मेलन के दौरान, आयुष मंत्रालय के जामनगर स्थित आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसन्धान संस्थान की निदेशक डॉक्टर तनुजा मनोज नेसारी के साथ ख़ास बातचीत की, जिसमें उन्होंने शिखर सम्मेलन की प्रमुख प्राथमिकताओं, उभरते साक्ष्यों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवाचारों व आगे की दिशा पर विस्तृत जानकारी दी.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:सूडान और ग़ाज़ा में हिंसा के कारण, आम लोगों की पीड़ाएँ हैं जारी, यूएन एजेंसियों के यथासम्भव सहायता प्रयास भीबच्चों पर सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए, कुछ ऑस्ट्रेलिया में लगी पाबन्दियाँप्रकाश उत्सव दीपावली बना अब वैश्विक त्यौहार, यूनेस्को की जीवन्त विरासत सूची में मिली जगहमहिलाओं का स्वास्थ्य केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवारों के लिए है अहम, भारत में WHO की जागरुकता मुहिमदुनिया के अनेक देशों में बढ़ रहा है, पारम्परिक चिकित्सा पद्यति का प्रयोग. अगले सप्ताह नई दिल्ली में WHO सम्मेलन

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:दक्षिणपूर्व एशिया के अनेक देशों में बाढ़ का क़हर, 1 करोड़ से अधिक लोगों पर गाज.सूडान में हिंसक युद्ध की आग फिर भड़की, और ग़ाज़ा में लोगों के लिए चिकित्सा सुविधा बनी दूर की कौड़ी.मलेरिया पर नियंत्रण में हुई है प्रगति, मगर दवा प्रतिरोध से उपज रहा है एक नया जोखिम.एक भारतीय किशोर - देव करन को मिला यूएन सम्मान, तालाब साफ़ करने की उनकी मुहिम ला रही है रंग.समाज में, विकलांगजन के वास्तविक समावेशन से ही होती है समाज की असल प्रगति.

दिल्ली से सटे नोएडा के 17 वर्षीय देव करन ने ग्रामीण इलाक़ों में तालाबों की अनदेखी को नज़रअन्दाज़ करने के बजाय, कुछ ऐसा करने का बीड़ा उठाया, जिसने अनेक तालाबों की सफ़ाई के लिए, लोगों नई ऊर्जा भर दी है. देव करन ने इस काम के लिए वर्ष, 2024 में Pondora नामक संस्था शुरू की - एक ऐसी पहल जो सामुदायिक भागेदारी और किफ़ायती तकनीक की मदद से भारत के तालाबों का मानचित्रण, पुनर्स्थापन और संरक्षण करती है. उनकी परियोजना, अहम जल-स्रोतों को बचाने व टिकाऊ जल प्रबन्धन के बारे में युवजन व समुदायों को जागरूक एवं सक्रिय बनाती है.देव करन को, जिनीवा स्थित यूएन मुख्यालय में आयोजित युवा कार्यकर्ता सम्मेलन (YAS25) में सम्मानित दुनिया के पाँच चुनिन्दा युवा परिवर्तनकारियों में स्थान मिला है. यह सम्मेलन तकनीक के ज़रिए सामाजिक एवं पर्यावरणीय बदलाव ला रहे युवाओं को पहचान देता है.इस वर्ष सम्मेलन का विषय था “From Hashtag to Action”, यानि ऑनलाइन आवाज़ों को वास्तविक ज़मीनी बदलाव में बदलना.यूएन न्यूज़ हिन्दी की अंशु शर्मा ने, जिनीवा से हाल ही में भारत वापिस लौटे देव करन के साथ, नई दिल्ली स्थित यूएन कार्यलय में ख़ास बातचीत की और उनकी परियोजना के बारे में जानकारी हासिल की.

इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:दुनिया भर में, हज़ारों महिलाएँ, अपनों के ही हाथों होती हैं हिंसा की शिकार, इस माहौल में बड़े हो रहे, करोड़ों बच्चे भी संकट में.करोड़ों बच्चे, ख़सरा से बचाने वाली वैक्सीन से हैं वंचित, नतीजतन, 95 हज़ार लोगों की मौतें.दिल्ली की हवा में घुल रहा है विषैला प्रदूषण, स्वास्थ्य आपदा जैसे बने हालात.17 साल की उम्र में एचआईवी से संक्रमित हुईं पूजा मिश्रा. मगर, डर और कलंक को पीछे छोड़कर, कैसे बनीं युवाओं की आवाज़.रियाद में आयोजित वैश्विक सम्मेलन UNIDO) में, मानवता व पृथ्वी की भलाई पर केन्द्रित औद्योगिक विकास पर ज़ोर.

पटना की पूजा मिश्रा का विवाह, 15 वर्ष की आयु में करा दिया गया था और 17 साल की छोटी सी उम्र में उन्हें मालूम हुआ कि वो एचआईवी से संक्रमित हो गई थीं. तब से अब तक अनगिनत चुनौतियों का सामना करते हुए, आज पूजा का संक्रमण पूरी तरह दबा हुआ है, और वो देशभर के युवाओं की मज़बूत आवाज़ बन चुकी हैं. पूजा अब, भारत में एचआईवी के साथ जी रहे लोगों का राष्ट्रीय गठबन्धन (NCPI+) की राष्ट्रीय युवा समन्वयक के रूप में, युवाओं के अधिकार, मानसिक स्वास्थ्य और इलाज जारी रखने की अहमियत पर काम करती हैं और अपने यूट्यूब चैनल “Youth Speak Now” से हज़ारों युवाओं तक भरोसेमन्द जानकारी पहुँचाती हैं.पूजा मिश्रा ने, विश्व एड्स दिवस (1 दिसम्बर) के अवसर पर यूएन न्यूज़ हिन्दी की सहयोगी अंशु शर्मा के साथ एक ख़ास बातचीत में बताया कि किस तरह वह डर और कलंक से निकलकर, नेतृत्व करने और युवाओं को प्रोत्साहित करने के मुक़ाम तक पहुँचीं; और क्यों वह चाहती हैं कि सभी युवा अपनी दवा, अपने हक़ और अपनी आवाज़ के साथ मज़बूती से खड़े हों.

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...कॉप30 अपने अन्तिम चरण में, जलवायु संकल्पों को ठोस वास्तविकता में बदलने का इम्तेहान.42 करोड़ बच्चे अत्यधिक निर्धनता में जीवन बिताने को विवश, अफ़्रीका और एशिया में है अधिक संख्या.डिजिटल जगत में बढ़ती हिंसा की शिकार बनती महिलाएँ, क़ानूनी सुरक्षा क्यों है ज़रूरी...दुनिया भर में क़रीब साढ़े 3 अरब लोग, आज भी सुरक्षित शौचालय से वंचित, पर्याप्त धन व पक्के इरादे की ज़रूरत.सुरक्षा परिषद में वीटो शक्ति से उत्पन्न होता गतिरोध एक बड़ी समस्या, बहुपक्षीय संस्थाओं में कमज़ोर पड़ता भरोसा.

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...ब्राज़ील के बेलेम में, यूएन जलवायु शिखर सम्मेलन – COP30 में वैश्विक सरगर्मियाँ, स्वास्थ्य, खाद्य असुरक्षा और प्रवासन जैसे मुद्दों को भी जलवायु कार्रवाई में शामिल किए जाने पर ज़ोर.यूएन मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने, सूडान के अल फ़शर में हुए अत्याचारों को बताया - अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के रिकॉर्ड पर धब्बा.ग़ाज़ा में यूएन सहायता प्रयास जारी, इस बीच 90 प्रतिशत बच्चे मानसिक रोगों की चपेट में.धन की कमी से डगमगा रही है टीबी यानि तपैदिक का अन्त करने की मुहिम, हालाँकि उपचार में सफलता भी.एशिया प्रशान्त के अनेक देशों में, अतिरिक्त पोषण से युक्त गेहूँ और चावल की आपूर्ति से, बच्चों व महिलाओं को अनेक लाभ.

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...हिंसक टकराव से जूझ रहे सूडान के अल फ़शर शहर में आम लोगों पर भयावह अत्याचारों को अंजाम दिए जाने की ख़बरें, यूएन ने हिंसा पर विराम लगाने का किया आग्रहब्राज़ील के बेलेम में जलवायु सम्मेलन कॉप30 से पहले, महासचिव का आग्रह, बढ़ते तापमान की रफ़्तार को थामना होगासामाजिक विकास के लिए संकल्पों को वास्तविक बदलाव में तब्दील करने के आहवान के साथ दोहा में शिखर बैठक का समापनअफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम पोस्त की खेती पर प्रतिबन्ध के बाद उसमें गिरावट का रुझान जारीक़ानून व्यवस्था की पुनर्बहाली से होकर जाती है, लोकतंत्र की राह, सुनिएगा एक बातचीत

हिंसक संघर्ष से गुज़र रहे या फिर शान्ति समझौते के बाद लोकतंत्र की दिशा में आगे बढ़ने के लिए इच्छुक देशों में कोर्ट-कचहरी, जेल, क़ानून व्यवस्था अक्सर ध्वस्त हो चुकी होती है, और इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि वहाँ क़ानून के शासन को फिर से बहाल किया जाए. दक्षिण सूडान में यूएन शान्तिरक्षा मिशन (UNMISS) में ‘क़ानून का शासन व सुरक्षा क्षेत्र में सुधार' विभाग के निदेशक अनीस अहमद ने यूएन न्यूज़ हिन्दी के सचिन गौड़ के साथ बातचीत में बताया कि ढह चुकी क़ानून व न्यायिक व्यवस्था को फिर से खड़ा करने के लिए मोबाइल कोर्ट समेत अन्य दीर्घकालिक उपायों का सहारा लिया जाता है ताकि आमजन की समस्याओं का निपटारा हो और संस्थाओं में लोगों का भरोसा फिर से जग सके.कृत्रिम बुद्धिमता (एआई), टैक्नॉलॉजी, भ्रामक, जानबूझकर फैलाई जाने वाली ग़लत जानकारी जैसी समस्याओं से न्यायिक व क़ानून व्यवस्था की पुनर्बहाली में चुनौतियाँ और गहरी हुई हैं. उन्होंने कहा कि हर देश, हर समाज की तस्वीर अलग होती हैं, और इसलिए वहाँ स्थानीय सन्दर्भ के अनुरूप ही समाधान विकसित किए जाते हैं.

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...सूडान के अल फ़शर में, हाल के दिनों में RSF की भयावह हिंसा में साढ़े चार सौ से अधिक लोगों का जनसंहार. भारी संख्या में लोगों का पलायन.पूरे ग़ाज़ा पट्टी में, हाल के इसराइली हवाई हमलों के बावजूद, यूएन एजेंसियाँ सहायता प्रयासों में सक्रिय, इसराइली हमलों में 100 से अधिक लोगों की मारे जाने की ख़बरें.यूक्रेन में ऊर्जा ठिकानों पर रूस के सिलसिलेवार हमलों पर गहरी चिन्ता, युद्ध ले रहा है - टैक्नोलॉजी टकराव का रूप.संयुक्त राष्ट्र के युवा मामलों के सहायक महासचिव डॉक्टर फ़ेलिपे पाउलियर ने अपनी भारत यात्रा के दौरान, देशभर के अनेक युवा परिवर्तनकारियों से की मुलाक़ात.क्या ऐसा सम्भव है कि सामाजिक विकास के मार्ग में कोई भी पीछे नहीं छूटे. कुछ ऐसे ही मुद्दों पर प्रगति का जायज़ा लेने के लिए, 4-6 नवम्बर को, दोहा में हो रहा है – दूसरा विश्व सामाजिक विकास सम्मेलन.