जमशेद क़मर सिदà¥à¤¦à¥€à¤•ी के साथ चलिठकहानियों की उन सजीली गलियों में जहां हर नà¥à¤•à¥à¤•ड़ पर à¤à¤• नया किरदार है, नठक़िसà¥à¤¸à¥‡, नठà¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ के साथ ये कहानियां आपको कà¤à¥€ हसाà¤à¤‚गी, कà¤à¥€ रà¥à¤²à¤¾à¤à¤‚गी और कà¤à¥€ गà¥à¤¦à¤—à¥à¤¦à¤¾à¤à¤‚गी à¤à¥€ चलिà¤, गà¥à¤œà¤¼à¤°à¥‡ वकà¥à¤¤ की यादों को कहानियों में फिर जीते हैं, नठकी तरफ बढ़ते हà¥à¤ पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ को समेटते हैं. सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ हैं ज़िंदगी के चटख रंगों में रंगी, इंसानी रिशà¥à¤¤à¥‹à¤‚ के नरà¥à¤® और नà¥à¤•ीले à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ की कहानियां, हर इतवार, सà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥€à¤¬à¥‰à¤•à¥à¤¸ में. Jamshed Qamar Siddiqui narrates the stories of human relationships every week that take the listener on the rollercoaster of emotions, love, and laughter. Stories are written by Jamshed and by his fellow writers that talks about the various colors of life conflicts from father-son relationships to love triangle. Stories that let you be someone else for some time to see this world from a different angle.

एक Physics Professor के कमरे में अचानक एक अजनबी लड़की आती है और दावा करती है कि वो 300 साल बाद की दुनिया से आई है. वो खुद को एक Time Traveller बताती है. Professor Tabassum पहले उसकी बात सुनकर हँस देती हैं, उन्हें लगता है कि ये किसी तरह का मज़ाक है. लेकिन जब वो रहस्यमयी लड़की धीरे-धीरे ऐसी बातें बताना शुरू करती है, जो सिर्फ़ Professor Tabassum जानती हैं, तो कहानी का हर सच बदलने लगता है और फिर बात आती है Professor के इकलौते बेटे की मौत की… आख़िर कौन थी वो लड़की और टाइम ट्रैवल को धार्मिक किताबों में ढूंढने वाली Professor ने अपने बेटे का क़त्ल क्यों था? सुनिए कहानी के आख़िरी हिस्से में. Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Sound - Rohan Bharti

एक Physics Professor के कमरे में अचानक एक अजनबी लड़की आती है और दावा करती है कि वो 300 साल बाद की दुनिया से आई है. वो खुद को एक Time Traveller बताती है. Professor Tabassum पहले उसकी बात सुनकर हँस देती हैं, उन्हें लगता है कि ये किसी तरह का मज़ाक है. लेकिन जब वो रहस्यमयी लड़की धीरे-धीरे ऐसी बातें बताना शुरू करती है, जो सिर्फ़ Professor Tabassum जानती हैं, तो कहानी का हर सच बदलने लगता है. आख़िर कौन थी वो लड़की और टाइम ट्रैवल को धार्मिक किताबों में ढूंढने वाली Professor ने कौन सा राज़ दुनिया से छिपा रखा था? देखिए आगे की कहानी दूसरे एपिसोड में. साउंड मिक्सिंग: रोहन भारती

एक Physics Professor के कमरे में अचानक एक अजनबी लड़की आती है और दावा करती है कि वो 300 साल बाद की दुनिया से आई है. वो खुद को एक Time Traveller बताती है. Professor Tabassum पहले उसकी बात सुनकर हँस देती हैं, उन्हें लगता है कि ये किसी तरह का मज़ाक है. लेकिन जब वो रहस्यमयी लड़की धीरे-धीरे ऐसी बातें बताना शुरू करती है, जो सिर्फ़ Professor Tabassum जानती हैं, तो कहानी का हर सच बदलने लगता है. - कौन है ये लड़की? - क्या वाकई वो 300 साल भविष्य से आई है? - उसे Professor Tabassum के अतीत के बारे में इतना कुछ कैसे पता है? - और सबसे बड़ा सवाल... उसने Professor का कौन-सा खतरनाक राज़ दुनिया के सामने खोलने की धमकी दी है? BHEDIA (भेड़िया) एक gripping Hindi Murder Mystery Thriller है, जिसमें Time Travel, Suspense, Mystery, Crime और एक छिपे हुए रहस्य की कहानी है जो एक-दूसरे से जुड़ती जाती है. कहानी सुनिए, सुराग पकड़िए और देखिए सच कहाँ छिपा है... Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Producer - Maaz Siddiqui Camera - Rahul Singh Shoot Courtesy - Arvind Chaudhary & Team Video Editor - Ajeet Singh Sound - Rohan Bharti

जन्माष्टमी के मौके पर आज स्टोरीबॉक्स में ख़ास कहानी जो दरअसल नज़ीर अकबराबादी की एक मसनवी है. इसका नाम है 'कृष्ण जन्मकथा' जिसमें भगवान कृष्ण के जन्म, कंस की साज़िशें और वसुदेव का उन्हें उफ़नती हुई यमुना से गोकुल ले जाने के सारे मंज़र हैं. सुनिए नज़ीर अकबराबादी की लिखी कथा जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Sound - Suraj Singh & Rohan Bharti

ये कहानी एक ऐसे अमीर रईस की है जो चालीस साल के बाद अपने उस इश्क़ की तरफ़ लौटता है जिसे वो जवानी में छोड़ आया था. वो इश्क़ जो उसे इसलिए छोड़ना पड़ा क्योंकि वो बगावत नहीं कर पाया था अपने वालिद से... लेकिन अब जब वो उम्र के उस मोड़ पर है जहां वो तन्हा है, अकेला है तो वो उस आफ़रीन को ढूंढता है जिसे छोड़कर आया था. अब आफ़रीन कैसी है, कहां है, क्या हुआ था उसके साथ और क्या वो खां साहब को दोबारा अपनाएगी? देखिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी 'आख़िरी उम्र का इश्क़' स्टोरीबॉक्स में. Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Sound - Suraj Singh & Rohan Bharti

ज़िंदगी में सब कुछ कीजिएगा लेकिन कभी पुरानी कार मत ख़रीदना. क्योंकि जिस दिन आप पुरानी कार ख़रीद लेंगे उसी दिन से आपके बुरे दिन शुरू हो जाएंगे. हमने भी अपनी ज़िंदगी में एक बार ये ग़लती की थी. एक पुरानी सी खटारा हमें पसंद आ गई क्योंकि बड़ी सस्ती थी. कार खरीद ली गई लेकिन उस दिन के बाद से हम भूल गए कि चैन की नींद क्या होती है? ऐसा कोई महीना नहीं गुज़रा जब गाड़ी को उसके ससुराल यानि कारखाने न ले जाना पड़ा हो. कारखाने वाला जो आदमी था वो हर महीने मेरी तनख्वाह में बराबर का हिस्सेदार हो गया था. स्टोरीबॉक्स में इस हफ़्ते सुनिए कॉमेडी कहानी 'मैंने पुरानी कार क्यों ख़रीदी?' जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Sound - Suraj Singh & Rohan Bharti

ये कहानी है कारगिल जंग में शहीद हुए कैप्टन अनुज नैय्यर की, जो सगाई की अंगूठी उंगली में पहने जंग के मोर्चे पर जाने की तैयारी कर रहे थे. तभी उन्होंने अपने कमांडिग ऑफ़िसर से पूछा कि "सर, क्या मुझे अंगूठी पहनकर जंग में जाना चाहिए? क्योंकि अगर मैं वापस नहीं आया तो ये अंगूठी दुश्मनों के हाथ लग जाएगी". सुनिए सच्ची कहानी उस जांबाज़ की जिसने महज़ 24 साल की उम्र में अपने मुल्क के लिए मुहब्बत की राह में अपनी जान कुर्बान कर दी. फ़ैशन इंस्टीट्यूट जाने की तमन्ना रखने वाले, बॉम्बे बॉइज़ म्यूज़िक एल्बम के फ़ैन और बिना एनेस्थीसिया पैर में टांके लगवाने वाले अनुज नैय्यर की ज़िंदगी के अनसुने पहलुओं को देखिए स्टोरीबॉक्स के इस खास ‘स्वतंत्रता दिवस स्पेशल एपिसोड' में. Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Sound - Suraj Singh

ये कहानी है उर्दू के शायर दाग़ देहेलवी की, जिनको ख़ूबसूरती का आशिक़ कहते हैं और बोला जाता है कि उनके कई औरतों से रिश्ते रहे. मुगल बादशाह के बेटे से उनकी मां की शादी हुई तो वो लाल क़िले में रहने लगे जिसके बाद उनके पास हर ऐश ओ आराम था. दाग़ देहेलवी ने बचपन में ज़िंदगी की बदसूरत यादों को आसपास फैली रंगीनियों से भरने की कोशिश की, लेकिन उससे बड़ी हक़ीकत ये है कि उनके काम ने उर्दू शायरी को नई ज़मीन और नया आसमान दिया. सुनिए दाग़ के पिता को अंग्रेज़ी हुकूमत ने क्यों मारा था? और कहानी उस मर्डर मिस्ट्री की जिसका राज़ खुला एक फारसी में लिखे हुए ख़त से, देखिए पूरा एपिसोड स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी के साथ. Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Sound - Suraj Singh

उस साल दिल्ली शहर की एक सड़क पर एक ही जगह बार-बार एक्सीडेंट्स हो रहे थे. ये सारे एक्सीडेंट्स टैक्सी ड्राइवर्स के थे. नौ टैक्सी ड्राइवर्स की मौत हो चुकी थी और अब डर के मारे टैक्सी ड्राइवर्स ने उस तरफ़ से गुज़रना बंद कर दिया था. मरते-मरते एक ड्राइवर ने एक बार बताया कि इन सारी मौतों के पीछे एक लड़की है, जो ले रही है इंतक़ाम. देखिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी हॉरर कहानी “वो कौन थी?”.Narrator - Jamshed Qamar SiddiquiSound - Rohan Bharti

ये कहानी है एक ऐसे शहर की जहां सब कुछ ठीक था. यहां की जनता न आंदोलन करती थी और न ही किसी तरह का विरोध दर्ज करती थी, इसकी वजह ये थी कि इस शहर में दफ़्तर बहुत थे. हर आदमी या तो दफ़्तर से आ रहा होता था या दफ़्तर जा रहा होता था, लेकिन एक दिन यहां कुछ ऐसा हुआ कि जनता सड़कों पर आ गई? क्या हुआ था उस दिन और क्यों ये आंदोलन शुरु हो गया? इस बार स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से सुनिए 'एक प्रोटेस्ट की कहानी'.Narrator - Jamshed Qamar SiddiquiSound - Suraj Singh

अंसारी साहब के लालची रिश्तेदारों को वसीयत में क्या मिला? किसे मिली अंसारी साहब की पुरानी कार और किसको मिलेगा उनका मकान, नानी का पीतल वाला पानदान किसके पास जाएगा और किसकी झोली में जाएगा घर में रखा हुआ कैश? वसीयत अब पढ़ी जाएगी. सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी 'अंसारी साहब की अजीब वसीयत' का दूसरा और आख़िरी हिस्सा. Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Producer - Maaz Siddiqui Sound - Suraj Singh

ये कहानी है कानपुर में रहने वाले एक चचा की जिनकी दौलत पर उनके लालची रिश्तेदारों की नज़र थी. लेकिन चचा के इंतकाल के बाद जब उनकी वसीयत पढ़ी गई तो रिश्तेदारों के होश उड़ गए. क्या लिखा था चचा ने अपनी वसीयत में, कौन थी हुमैरा जिसके दो आंसू उनकी असली दौलत बन गई. सुनिए जमशेद कमर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी 'कानपुर वाले चचा की वसीयत' स्टोरीबॉक्स में. Narrator - Jamshed Qamar SiddiquiProducer - Maaz SiddiquiSound - Suraj SinghVideo Editor - Manmeet Singh Design - JP Singh

ये कहानी है सिनेमा के उस जीनियस की, जिसने अपने दौर से बहुत आगे की फिल्में बनाईं. ऐसी फिल्में, जिन्हें समझने के लिए शायद दुनिया तैयार नहीं थी. एक कामयाब अभिनेता, बेमिसाल निर्देशक... जो एक सुबह अपने कमरे में हमेशा के लिए खामोश हो गया. एक ऐसा शख्स जिसने टेलीफ़ोन ऑपरेटर की नौकरी से सफ़र शुरू किया और आगे चलकर भारतीय सिनेमा के सबसे करिश्माई फ़िल्मकारों में गिना जाने लगा - गुरु दत्त. इस बार सुनिए स्टोरीबॉक्स में गुरु दत्त की कहानी, जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. Producer - Maaz Siddiqui Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Sound - Aman Pal & Suraj Singh

ये कहानी है 29 साल पहले दिल्ली के सबसे भीषण अग्निकांड की, जहां एक थिएटर बन गया था गैस चेंबर. 59 लोगों की मौत हुई जिनमें बहुत सारे बच्चे भी शामिल थे. क्यों भड़की थी ये आग, थियेटर के अंदर क्या हुआ था, सिनेमा हॉल के दरवाज़े पर कुर्सियां किसने लगाईं, ज़हरीली गैस एसी के वेंट से अंदर कैसे आई और रेस्क्यू ऑपरेशन कैसे चला? देखिए पूरी कहानी 'स्टोरीबॉक्स' में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. Producer - Maaz Siddiqui Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Sound - Aman Pal

कहानी देश के सबसे बड़े किडनैपिंग केस की. वो कहानी जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. सड़क से संसद तक कोहराम मच गया, प्रधानमंत्री का इस्तीफ़ा मांगा गया और विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सर पर भीड़ का पत्थर इतनी तेज़ लगा कि उनका कुर्ता खून से लाल हो गया. ये कहानी है क्राइम की सबसे कुख्यात जोड़ी - रंगा और बिल्ला की. सुनिए 'स्टोरीबॉक्स' में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. Producer - Maaz Siddiqui Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Sound - Aman Pal

मुहब्बत के शायर बशीर बद्र की ज़िंदगी के वो क़िस्से जिसमें सिर्फ़ उनकी शायरी नहीं, उनका सेंस ऑफ़ ह्यूमर, उनकी इंसानियत और उनकी हाज़िर जवाबी का पता मिलता है. बशीर बद्र को सीतापुर में एक सुरमे वाले ने क्यों डांटा, उन्होंने एक ट्रेन टीसी को बीस रुपये का नोट क्यों दिया और मुशायरे में उन्होंने राजिंदर सिंह बेदी की आंखों के बारे में क्या मज़ेदार बात कही, बता रहे हैं स्टोरीबॉक्स में इस हफ्ते जमशेद क़मर सिद्दीक़ी. Producer - Maaz Siddiqui Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Sound - Suraj Singh & Rohan Bharti

मुंशी प्रेमचंद की मौत के 90 साल बाद एक शख्स को मिली उनकी लिखी हुई एक डायरी. क्या था उस डायरी में जिसके बाद इलाके में मच गया हड़कंप, और कौन था वो ज़िला कलेक्टर जिसने हर कीमत पर उसे आम जनता से छिपाए रखने की कोशिश की? सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी 'प्रेमचंद की सीक्रेट डायरी' स्टोरीबॉक्स में. Producer - Maaz Siddiqui Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Sound - Aman Pal

मैं जिस जंगली इलाके में गाड़ी खराब होने की वजह से फंस गया था, वहां सौ साल पहले नील के खेत हुआ करते थे. जंगल के बीचोंबीच मैं एक पुराने मकान में रात भर के लिए ठहर गया, जहां एक अंग्रेज़ अफ़सर की मौत हुई थी. उस रात जो हुआ मैं कभी भूल नहीं पाऊंगा. सुनिए सत्यजीत रे की कहानी 'इंडिगो' का एक हिस्सा स्टोराबॉक्स में. Producer - Maaz Siddiqui Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Sound - Aman Pal & Rohan Bharti

महरौली में रहने वाले शमशुद्दीन का बकरा पूरी दिल्ली में मशहूर था. जमनापारी था, बड़े-बड़े कान, घुमावदार सींघ और तन के खड़ा हो जाए तो पूरा गधा मालूम होता था. शमशुद्दीन एक रोटी खुद कम खा सकते थे, मगर अपने बकरे को बिना चने खिलाए उन्हें नींद नहीं आती थी. लेकिन आख़िर एक रात को ऐसा क्या हुआ कि पूरा मोहल्ला उस बकरे के बाल को तावीज़ बनाकर पहनना चाहता था. स्टोरीबॉक्स में इस बार सुनिए 'शमशुद्दीन का बकरा 'स्टोरीबॉक्स' जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. Producer - Maaz Siddiqui Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Sound - Rohan Bharti

लखनऊ में एक थे वकील साहब जो बड़े उर्दू दां थे. उन्हें उर्दू से इस क़दर इश्क़ था कि किसी को ग़लत उर्दू बोलते सुन लें तो फ़ौरन टोक देते थे, पर क्या हुआ जब उनकी इकलौती बेटी इरम को इश्क़ हो गया एक ऐसे रीलबाज़ लड़के से जो शक्कर को भी सक्कर बोलता था और लखनऊ को नखलऊ. स्टोरीबॉक्स में इस बार सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से उन्हीं की लिखी कहानी 'लखनऊ वाले वकील साहब'. Producer - Maaz Siddiqui Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Video Editor - Manmeet Singh Sawhney Design - JP Singh Shoot Courtesy - Arvind Chaudhary & Team Sound - Suraj Singh

कैसा हो अगर कभी कहीं घूमते हुए किसी सुनसान जगह पर आपको मिल जाए आपका एक 'हमशक्ल' जिसकी आवाज़ भी आपकी जैसी ही हो. बातचीत में पता चलता है कि उसका और आपका शहर भी एक है और उसकी जेब में उतने ही पैसे हैं जितने आपकी जेब में. आप की पहली प्रेमिका के नाम से लेकर, कॉलेज में आए नंबर तक सब कुछ एक जैसा है... ऐसे में क्या आप जानना चाहेंगे कि ये अजनबी कौन है और आप दोनों के बीच इतनी समानताएं क्यों हैं? कहीं ये कोई साज़िश तो नहीं, जो इस कहानी को एक क़त्ल तक ले जाती है. सुनिएसत्यजीत रे की लिखी थ्रिलर कहानी 'हमशक्ल' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. Producer - Maaz Siddiqui Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Sound - Suraj Singh

सिर्फ़ दस पैसे के लिए दादी से लड़ाई करके घर से भागा 'चक्कू' गुस्से में रेलवे स्टेशन पहुंच गया और चलती ट्रेन में बैठ गया, लेकिन ट्रेन में बैठने के बाद उसने देखी एक दूसरी दुनिया जहां गरीबी थी, दर्द था और थी एक लावारिस लाश. सुनिए गुलज़ार की लिखी कहानी 'दस पैसे और दादी' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. Producer - Maaz Siddiqui Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Sound - Aman Pal

कहानी सआदत हसन मंटो पर बनाए एक किरदार नफ़ासत हसन की, जो लिखी उनके दोस्त देवेंद्र सत्यार्थी साहब ने. ये उन्होंने उस कहानी के जवाब के तौर पर लिखी जो मंटो ने लिखी थी 'देवेंद्र' को 'हरेंद्र' बनाकर. तो सुनिए कहानी नफ़ासत हसन की जिसने नई नौकरी मिलने की खुशी में दोस्तों को एक दावत दी, दावत में किन मौलाना से हो गया नफ़ासत का झगड़ा और किसे शक हुआ कि नफ़ासत एक फ्रैंच राइटर की लिखी बातों को अपनी कहानियों में लिख देता है? स्टोरीबॉक्स में सुनिए 'मंटो V/s सत्यार्थी' सीरीज़ की दूसरी और आख़िरी कहानी जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग: अमन पाल

रमेश एक तरक्की पसंद कहानीकार है जिसे बड़े-बड़े राइटर्स और शायरों को अपने घर दावत पर बुलाने का शौक है, एक रोज़ उसके घर पर एक ऐसा राइटर आता है जिसके आने के बाद रमेश को अफ़ सोस होता है कि काश उसे न बुलाया होता, सुनिए सआदत हसन मंटो की कहानी 'तरक्की पसंद' स्टोरीबॉक्स के इस खास सेगमेंट 'मंटो V/s सत्यार्थी' के पहले हिस्से में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से साउंड मिक्सिंग: अमन पाल

ये कहानी है एक ऐसे चचा कि जो मुहल्ले में होने वाली लड़ाइयों में ऐसे बीच-बचाव कराते थे कि लड़ाई और भड़क उठती थी. सुनिए इम्तियाज़ अली ताज की लिखी कॉमेडी कहानी ‘चचा छक्कन' का हिस्सा 'मोहल्ले की लड़ाई' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग: सूरज सिंह

इच्छा मृत्यु का एक केस जिसे अदालत ने ख़ारिज कर दिया, उस मामले ने एक डॉक्टर को कैसे बना दिया क़ातिल? और कौन था निरंजन जिसने डॉक्टर को मजबूर किया कि वो अपने ही एक मरीज़ का ऑपरेशन थियेटर में इलाज के दौरान क़त्ल कर दें. सुनिए 'स्टोरीबॉक्स' में कहानी, इच्छा मृत्यु, का तीसरा हिस्सा जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग: सूरज सिंह

एक मरीज़ की इच्छा मृत्यु की याचिका कोर्ट ने नामंज़ूर कर दी. उसका दर्द और तकलीफ़ देखकर डॉक्टर मिर्ज़ा ने दया दिखाते हुए उसे ज़हर का इंजेक्शन लगा दिया, लेकिन मरीज़ की मौत के बाद डॉक्टर को पता चला कि ये इच्छा मृत्यु दरअसल एक साज़िश थी. वो एक ऐसे जाल में फंस गया है जो उसकी मौत तक पीछा नहीं छोड़ेगा. सुनिए 'स्टोरीबॉक्स' में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी, इच्छा मृत्यु, का दूसरा हिस्सा. साउंड मिक्सिंग: अमन पाल

एक डॉक्टर क्यों मजबूर था अपने मरीज़ की जान लेने के लिए? उसने ऑपरेशन थियेटर में अपने मरीज़ का क़त्ल किस तरह प्लान किया कि वो देखने में हादसा लगे? क़ातिल डॉक्टर का नैशनल हॉस्पिटल में भर्ती उस मरीज़ से क्या रिश्ता था, जिसने कोर्ट से अपने लिए मांगी थी इच्छा मृत्यु, सुनिए स्टोरीबॉक्स की नई कहानी जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग: सूरज सिंह

एक रोज़ बुआ अचानक कहीं गुम हो गईं. हमने बहुत ढूंढा उन्हें, रेलवे स्टेशनों पर, बस अड्डों पर, मंदिरों में और हर उस जगह जहां वो हो सकती थीं लेकिन वो नहीं मिलीं. कहां गईं थीं बुआ, क्या इसलिए गायब हुईं क्योंकि फूफा उस पर हाथ उठाते थे या इसलिए क्योंकि वो इस दुनिया से ऊब गई थीं... सुनिए अतुल तिवारी की लिखी कहानी 'पैदल जाती एक औरत' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से साउंड मिक्सिंग: अमन पाल

विक्रांत हमेशा कहता रहा कि फ़बीहा असल में थी, लेकिन सारे सबूत यही इशारा कर रहे थे कि फ़बीहा नाम की कोई लड़की कभी थी ही नहीं. क्या डॉ खान और इंस्पेक्टर कुशाल सुलझा पाएंगे इस गुत्थी को? क्या था कहानी के पीछे का असल राज़? - सुनिए 'वहम' के दूसरे और आख़िरी हिस्से में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग: अमन पाल

पागलख़ाने की अंधेरी कोठरी से विक्रांत बार-बार चीखते हुए कहता था कि फ़बीहा उसकी एक दोस्त थी, उसके साथ थी. लेकिन पुलिस का मानना था कि फ़बीहा नाम की कोई लड़की कभी थी ही नहीं, वो सिर्फ़ विक्रांत के मन का वहम था - सुनिए स्टोरीबॉक्स की नई कहानी 'वहम' जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग: रोहन भारती और अमन पाल

चौधरी साहब के दादा एक ज़माने में दारोग़ा थे, बढ़िया आमदनी थी, ठाठ थे. उनके दो बेटे हुए फिर दोनों बेटों के बच्चे. जब ये बच्चे बड़े हुए तब तक चौधरी खानदान के पास न तो खानदानी दौलत बची थी और न ही रईसी... लेकिन पीरबख्श ने अपने दादा के वक्त की इज़्ज़त को ढोल में पोल बना रखा था. घर के अंदर भले सब फटे हाल थे लेकिन दरवाज़े पर ऐसा रेशमी पर्दा लटकाया था कि लगता था बड़ी शान वाले लोग हैं - सुनिए यशपाल की लिखी कहानी 'पर्दा' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंद मिक्सिंग : सूरज सिंह

नव्या की ज़िंदगी बस कुछ पलों की मेहमान थी, डॉक्टरों ने भी हाथ खड़े कर दिए थे. नव्या ने अपने पिता दीवान साहब, जो कचहरी में बड़े क्लर्क थे, उन्हें अपनी एक अजीब आख़िरी ख्वाहिश बताई. सुनिए एक शादीशुदा डॉक्टर और एक मरती हुई मरीज़ के बीच पनपते हुए एक अनकहे रिश्ते की कहानी - मरीज़ की आख़िरी ख्वाहिश स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.

हकीम अहसानुल्लाह साहब के पास एक ऐसा नुस्खा था जिसके बारे में कहा जाता था कि बेऔलाद लोग अगर पान में दबाकर खा लें तो औलाद हो जाती है. शायरी के शौकीन हकीम साहब जब मुशायरे में पहुंचते तो देखते कि लोग वहां अपनी भैंस लेकर आए होते थे कि हकीम साहब एक पान इसे भी खिला दें - सुनिए मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी की एक तहरीर 'धीरजगंज का मुशायरा' का एक हिस्सा स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्स: सूरज सिंह

वो शायर था लेकिन उसका असली काम कब्रें खोदना था. वो उसी कब्रिस्तान में रहता था जहां काम करते हुए उसके पिता ने उसे शायरी भी सिखाई और कब्र खोदना भी... वही पिता जिनके साथ हुए एक हादसे को वो उनकी मौत के बाद भुलाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन एक रोज़ कब्रिस्तान के गेट पर उसे एक खूबसूरत चेहरा दिखाई दिया और उसे पता चला एक राज.... सुनिए कहानी 'दिल आज शायर है' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग : सूरज सिंह

उस आदमी की ख्वाहिश बस इतनी थी कि वो अख़बार में अपना नाम छपा हुआ देखना चाहता था. इस एक ख्वाहिश के लिए वो कुछ भी करने को तैयार था. तो उसने अपनी मौत का प्लान बनाया. सुनिए यशपाल की लिखी कहानी 'अख़बार में नाम' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.

उन्हें किराए का मकान चाहिए था लेकिन उनके पास कोई कागज़ नहीं था. उनकी भाषा भी अलग थी और कपड़े भी कुछ अलग परिवेश के थे, पर उनकी एक कहानी थी. एक उदास कहानी जो उन्होंने बताई तो मैं ना नहीं कर पाया लेकिन कुछ दिनों बाद मुझे उनकी ख़ौफनाक सच्चाई पता चली... सुनिए कहानी 'किराए का मकान' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग - सूरज सिंह

"मेरे तो तीन-तीन डिब्बे घी के महीने में निकल जाते हैं. नौकरों के लिए डालडा रखा हुआ है लेकिन कौन जाने ये मुए हमें डालडा खिलाते हों और खुद देसी घी हड़प जाते हों. आज के ज़माने में किसी का एतबार नहीं किया जा सकता, मैं ताले तो लगा नहीं सकती. ये दूसरा नौकर मथरा सात रोटियां सवेरे और सात रोटियां गिनकर शाम को खाता है और बहन, बीच में इसे दो बार चाय भी चाहिए... और घर में जो मिठाई हो वो भी इसे दो. लेकिन मैं कहती हूं, “ठीक है, कम से कम टिका तो है, भई आजकल किसी नौकर का भरोसा थोड़ी है. कब कह दे - मैं जा रहा हूँ. ये भी मुझे यही कहते हैं, 'कुत्ते के मुंह में हड्डी दिए रहो तो नहीं भौंकेगा" - सुनिए भीष्म साहनी की मशहूर कहानी 'साग मीट' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग - सूरज सिंह

वो नास्तिक थे, कभी किसी धर्म या मज़हब को नहीं माना... पूरी ज़िंदगी कहते रहे कि मौत के बाद कुछ नहीं है... एक रोज़ अचानक उन्हें दिल का दौरा पड़ा और दुनिया से विदा हो गए... अंधेरे के उस पार दोबारा उनकी आंख खुली, वो एक अजीब जगह थी... और सामने थे गॉड - सुनिए स्टोरीबॉक्स में कहानी 'एक नास्तिक की GOD से मुलाक़ात' जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग : अमन पाल

साल की आखिरी रात थी. पूरा शहर जश्न में डूबा हुआ था, लेकिन तभी पुलिस की तरफ़ से ऐलान हुआ कि कुछ संदिग्ध शहर में देखे गए हैं. उन दिनों मैं एक कैफे़ में सिक्योरिटी ऑफ़िसर के तौर पर काम कर रहा था. मैं ऑन-ड्यूटी था कि तभी मेरी नज़र एक शख्स पर पड़ी जो जश्न मना रहे लोगों को घूर रहा था... कौन था वो आदमी? उसके इरादे क्या थे? सुनिए स्टोरीबॉक्स की नई कहानी 'एक क्रिमिनल की न्यू ईयर नाइट' जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.

एक थे बन्ने भाई, कानपुर में उनकी कोयले की दुकान थी जहां दिन भर वो ग्राहकों के साथ झकमारी करते थे लेकिन शाम को घर आते ही सफ़ेद सिल्क का कुर्ता-पायजामा पहनते, कंधे पर डाल लेते एक नकली पशमीना शॉल और फिर मोहल्ले के पास वाली चाय की दुकान पर बैठकर ऐसी फलसफ़ी टाइप की बातें करते थे कि लगता था उनसे बड़ा बुद्दिजीवी, उनसे बड़ा इंटलैक्चुअल पूरे शहर में कोई नहीं है. मीर-ओ-ग़ालिब की शायरी हो या मुल्कों की सियासत... सब पर ऐसी राय रखते थे कि मुहल्ले वाले दांतों में उंगली दबा लेते थे. फिर एक रोज़ मोहल्ले में एक नया लड़का आया और वो बन्ने भाई के लिए बवाल-ए-जान बन गया. सुनिए पूरी कहानी स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से

डिप्टी साहब वैसे तो आदमी बड़े सख्त मिज़ाज थे. दफ़्तर में तो उनके एक दस्तखत से बड़े-बड़े फ़ैसले हो जाते थे लेकिन घर में डिप्टी साहब की ज़रा नहीं चलती. बेगम साहिबा ज़रा गुस्से वाली थीं और जिस सुबह उन्हें ग़ुस्सा आ गया तो फिर लोग देखते थे कि बेचारे डिप्टी साहब का क्या हाल होता था. एक सुबह मैं किसी फ़ाइल पर उनके दस्तखत लेने उनके घर पहुंचा तो देखा कि डिप्टी साहब कमीज़ और टाई लगाए कुर्सी पर बैठे थे मगर उनकी पतलून गायब थी. बेचारे एक पटरे वाली नेकर पहने हुए बार-बार घड़ी की तरफ देख रहे थे. मैंने पूछा 'क्या हुआ? सब ख़ैरियत तो है' फिर जो उन्होंने वजह बताई, वो सुनकर मुझे बड़ी हैरत हुई. सुनिए चौधरी मोहम्मद अली रुदौलवी की एक तहरीर 'बीवी कैसी होनी चाहिए?' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.