Padhaku Nitin is a casual and long conversation-based podcast where Aaj Tak Radio host Nitin talks to experts and discuss a wide range of topics like history, war, politics, policy, ideologies, cinema, travelling, sports, nature and everything that is interesting. A single episode of the show can be as enriching as reading four books. As we say in the podcast,Chaar kitaabe padhne jitna gyaan milega Padhaku Nitin mein. कब कोई हक़ीक़त से मिथक बन जाता है? क्यों कोई कहानी सदियाँ पार करके हमारे सिरहाने आ बैठती है? कुछ नाम तो इंसानों की कलेक्टिव मेमोरी का हमेशा के लिए हिस्सा बन जाते हैं लेकिन पूरी की पूरी सभ्यता चुपचाप कैसे मिट जाती है? भाषा के ग्रामर से मिले कब, क्यों, कैसे, कहां, किसने ऐसे शब्द हैं जो सेंटेंस में जुड़ जाएँ तो सवाल पैदा करते हैं और सवालों के बारे में आइंस्टीन ने कहा था- The important thing is not to stop questioning. पढ़ाकू नितिन ऐसा ही पॉडकास्ट है जिसमें किसी टॉपिक का रेशा रेशा खुलने तक हम सवाल पूछने से थकते नहीं.

इंसान कई तरीकों से सीखता है. कभी सवाल करके, कभी Experiment करके और कभी दूसरों को देखकर. अब राष्ट्रों का भी यही हिसाब समझ आता है, वो भी ऐसे ही सीखते हैं. और जैसे राष्ट्र सीखता है, वैसे ही राष्ट्र के Citizens भी. अगर आपको ये सवाल परेशान करते हैं या जिज्ञासा पैदा करते हैं कि आखिर देश चलता कैसे है, Policy बनती कैसे है? सही विदेश नीति क्या होती है, गलत विदेश नीति क्या होती है? देश अपने Rise पर है या Fall पर? तो ये किताब आपके लिए है….How Nations Fail and the Unmaking of America's World. इस किताब को लिखा है Former Diplomat Rajiv Dogra ने. Padhaku Nitin के इस एपिसोड में हम Rajiv Dogra ये भी जानेंगे कि भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर वो कौन-सी Secret Deal थी? क्या Trump अमेरिका को पतन की ओर ले जा रहे हैं? China क्या सच में Superpower बन चुका है? और Russia ने आखिर अपना Superpower का दर्जा कैसे खो दिया? साथ ही समझेंगे Nations के Rise & Fall, Foreign Policy और Power Politics का वो खेल, जो तय करता है कि कोई देश दुनिया में ऊपर उठता है या धीरे-धीरे अपनी ताकत खो देता है.

11 सितंबर 2001. चार commercial planes hijack हुए। दो विमानों ने New York के World Trade Center के Twin Towers को टक्कर मारी। तीसरा विमान Washington D.C. के Pentagon से टकराया। और चौथा विमान Pennsylvania में crash हुआ। लेकिन 9/11 सिर्फ एक terrorist attack नहीं था। यह एक ऐसा moment था जिसने अमेरिका की foreign policy, Middle East की geopolitics, Afghanistan और Pakistan के साथ उसके रिश्तों और पूरी global security व्यवस्था को बदल दिया। इस episode में हम 9/11 को सिर्फ एक घटना की तरह नहीं, बल्कि एक पूरे operation की तरह decode करने की कोशिश करेंगे। आखिर उस दिन सुबह से लेकर आखिरी plane crash तक क्या हुआ? 19 hijackers कौन थे? उन्होंने चारों planes पर control कैसे हासिल किया? Al-Qaeda ने इतने बड़े और complex operation की planning कैसे की? क्या American intelligence agencies को पहले से कुछ warnings मिली थीं? Phoenix Memo और August 6 PDB में क्या लिखा था? Moussaoui का laptop investigation में इतना महत्वपूर्ण क्यों बना? उस दिन NORAD और US air defence system ने क्या किया? और सबसे बड़ा सवाल—इतनी सारी warnings के बावजूद attack को रोका क्यों नहीं जा सका? हम यह भी समझेंगे कि 9/11 के बाद अमेरिका ने War on Terror क्यों शुरू किया, Afghanistan में Taliban और Al-Qaeda के खिलाफ युद्ध कैसे शुरू हुआ और कुछ साल बाद Iraq War ने Middle East को किस तरह बदल दिया। और इस पूरी कहानी में Pakistan की भूमिका क्या थी? 25 साल बाद पीछे मुड़कर देखें तो सवाल सिर्फ यह नहीं है कि 9/11 को क्या हुआ था। सवाल यह भी है कि 9/11 के बाद दुनिया क्या बन गई? इस episode में Defence Journalist Sandeep Unnithan के साथ हम 9/11 की chronology, planning, intelligence failures, American response और पिछले 25 वर्षों में बदली global geopolitics को समझने की कोशिश करेंगे। इस episode में जानिए: • 9/11 की पूरी chronology • 19 hijackers और Al-Qaeda की planning • चारों hijacked flights की कहानी • Twin Towers और Pentagon पर हमला कैसे हुआ • Phoenix Memo और August 6 PDB क्या थे? • Moussaoui और उसके laptop का connection • NORAD और अमेरिकी air-defence response • Intelligence failure: warnings के बावजूद attack क्यों नहीं रुका? • Osama bin Laden और Al-Qaeda का role • Afghanistan में War on Terror • Pakistan और 9/11 के बाद की geopolitics • Iraq War और Middle East पर उसका असर • Guantanamo Bay, surveillance और global security • और 25 साल बाद—9/11 ने दुनिया को कितना बदल दिया? एक attack, चार planes, हजारों lives और उसके बाद शुरू हुई एक ऐसी global war जिसका असर आज भी दुनिया पर दिखाई देता है। Producer: Manav Dev Rawat Host: Nitin Thakur Sound: Suraj Singh

दुनिया को एक Tourist की नज़र से नहीं, बल्कि एक इतिहासकार की नज़र से देखना एक Interesting Choice हो सकता है. इसलिए जब भी कहीं आप घूमने जाएं, तो उस जगह के इतिहास को पढ़कर जाएं - ताकि कोई कहानी, कोई किस्सा और कोई महत्वपूर्ण detail मिस न हो जाए. दिल्ली सिर्फ भारत की राजधानी नहीं, बल्कि कई सदियों और कई शहरों की कहानी अपने भीतर समेटे हुए है. लाल किले और Chandni Chowk से लेकर दिल्ली के उजड़े किलों तक, इस शहर की हर इमारत के पीछे इतिहास की एक दिलचस्प कहानी छिपी है. इस एपिसोड में जानेंगे कि राष्ट्रपति भवन सांची स्तूप जैसा क्यों दिखाई देता है? दिल्ली के किलों का इतिहास क्या है? मुगलों से लेकर अंग्रेजों तक दिल्ली कैसे बदली? शाहजहां, मुमताज, औरंगजेब और नादिर शाह ने दिल्ली की कहानी को कैसे बदला? और Chandni Chowk से लेकर ब्रिटिश राज में बने राष्ट्रपति भवन तक, आज की दिल्ली आखिर कैसे बनी? Padhaku Nitin के इस खास एपिसोड में Historian Swapna Liddle के साथ जानिए दिल्ली के इतिहास की ऐसी ही अनसुनी और दिलचस्प कहानियां. Credits: Producer: Manoj Rajpurohit Host: Nitin Thakur Sound: Rohan Bharti

दुनिया को एक Tourist की नज़र से ना देखकर, एक इतिहासकार की नज़र से देखना एक Interesting Choice साबित हो सकता है. इसलिए Padhaku Nitin का हमेशा से एक मानना रहा है कि जब भी कहीं घूमो, तो पढ़ लिखकर घूमो ताकि कोई डिटेल मिस न हो जाए। ताकि कोई कहानी कोई किस्सा, मिस न हो जाए।आप में से बहुत सारे लोग दिल्ली आये होंगे, कभी काम से, कभी रहने, या उसके बारे में ऐतिहासिक किस्से भी सुने ही होंगे। अगर नहीं आए हैं तो जरूर आइए। यहां घूमिये, क्योंकि अगर आप हिस्ट्री प्रेमी हैं तो दिल्ली से दूर नहीं रह सकते।Padhaku Nitin के इस एपिसोड में कोशिश है कि दिल्ली की इस कहानी को 8 शहरों की कहानी के ज़रिए समझा जाए। कैसे तोमरों चौहानों की बसाई ढिल्लिका, सिरी, तुगलकाबाद, दीनपनाह, शाहजहानाबाद और आखिर में दिल्ली बनी!और ये कहानी सुनाने के लिए हमारे साथ है दिल्ली के इतिहास पर कम से कम आधा दर्जन किताब लिखने वाली हिस्टोरियन स्वप्ना लिडल। उनका स्वागत। आपका स्वागत है और एपिसोड दो हिस्सों में है, मन लगाकर सुनियेगा इस एपिसोड का अगला हिस्सा मिलेगा अगले हफ़्ते! Credits: Producer: Manav Dev RawatHost: Nitin ThakurSound: Rohan Bharti

Discovery ने 15 Aug को एक 2 part की Documentary Series रिलीज़ की है, Operation Sindoor पर. जिसका नाम है Declassified. Operation Sindoor मई 2025 में हुआ था, आपने हमने.. सबने उसे अपनी स्क्रीन्स पर देखा ही था.. लेकिन तबसे लेकर अब तक Operation से जुड़ी ऐसी बहुत सी Details थीं जो अबतक सामने नहीं आईं थीं. Declassified उनमें से कुछ पर बात करती है. कुछ का इशारा करती है. लेकिन जब हमने वो documentary देखी तो महसूस हुआ कि इससे अब भी ऐसे बहुत से सवाल निकलते हैं. जिनका जवाब मुझे तो नहीं मालूम.. आपको भी शायद ना हो. तो Padhaku Nitin के इस एपिसोड में इन्हीं सवालों के जवाब पाने की कोशिश में हैं हम. साथ में हैं Senior Defence Journalist Sandeep Unnithan. आख़िरी बार इनसे जब ऑपरेशन सफ़ेद सागर पर बात की थी तो आपको बहुत पसंद आई थी.. इस बार भी एपिसोड अंत तक सुनिएगा. Credits: Producer: Manav Dev Rawat Host: Nitin Thakur Sound: Suraj Singh

एक ज़माना था तब किसी देश के ताकतवर होने में एक अहम Factor होती थी उसकी Population. जिसकी जितनी Population उसकी उतनी बड़ी आर्मी.. उतने उसके पास काम करने वाले हाथ.. यानि एक बड़ा Asset. लेकिन बदलती दुनिया और बदलती कंडिशन के साथ.. हालात कुछ बदले भी हैं, अब Population हर सिर्फ़ एक Asset या Resource नहीं है. कई बार ये Liability भी है. कई सरकारों के लिए लगातार चिंता का विषय भी बना हुआ है.. ये Population भी अजीब चीज़ हुई है.. जिसके पास कम है.. वो बढ़ाने के लिए पैसा लगाने को तैयार है.. जैसे रूस, साउथ कोरिया.. दूसरी तरफ़ जिनके पास बहुत रहा.. उन्होंने इसे कंट्रोल करने के लिए पैसा लगाया.. जैसे चीन और एक दौर में भारत भी.. और जिन देशों ने अपने एक Asset को मैनेज करना सीख लिया.. उनकी हो गई चांदी.. तो आज पढ़ाकू नितिन के इस एपिसोड में Population को ही समझते हैं.. किसी के लिए Asset.. किसी के लिए Liability क्यों हैं? एक तरफ़ लगातार बढ़ती Population लेकिन दूसरी तरफ़ लगातार गिरती Fertility Rate.. चिंता का विषय क्यों है.. ऐसा क्यों है कि कुछ देश इतने भारी है जनसंख्या के लिहाज़ से.. कुछ इतने हल्के क्यों? क्योंकि ये बात वो है जो सड़क से लेकर संसद तक.. घर से लेकर Policy level तक. एक सबसे इंपोर्टेंट फैक्टर है. समझाने के लिए हमारे सामने हैं इन मामलों की एक्सपर्ट पूनम मुतरेजा.. Population Foundation of India नाम के Think Tank की Executive Director. ActionAid International and ActionAid India की Governing Council and Board Member.. National Academies of Sciences, Engineering, and Medicine (Washington DC) की भी मेंबर रहीं. और Grassroot लेवल पर घूम कर इस मुद्दे को समझा… Credits: Producer: Manav Dev Rawat Host: Nitin Thakur Sound: Rohan Bharti

Asstag का नाम सुना होगा आपने.. कमाल का कंटेट बनाते हैं ये … अगर नहीं देखा है.. तो खोज के देखिए.. क्योंकि Asstag की कहानी इस बात का प्रमाण है.. अब हर टैलेंट को मुंबई का मुंह नहीं ताकना पड़ता.. अब रास्ते खोजे ही नहीं.. खोदे भी जा सकते हैं. और आज हमारे साथ हैं इसी Asstag के Cofounder.. Content Creator.. क्रिकेटप्रेमी.. और शानदार Actor, Kushal Dubey. एक छोटा सा डिस्कलेमर दे दूं आपको.. Kushal के बारे में कल रात पढ़ते हुए मुझे यही समझ आया है कि Instagram पर आपको हंसाने वाले Kushal की Personality का सिर्फ़ एक हिस्सा है Asstag का कंटेंट.. क्योंकि यही कुशल, एक रंगकर्मी रहे हैं. Bhartendu Natya Academy में एक्टिंग की पढ़ाई की है.. गलियों में नुक्कड़ नाटक से लेकर.. स्टेज पर जयशंकर प्रसाद के नाटक करने तक. सुनने में आया है तगड़े फिल्मची है.. एक फिल्म ‘संतोष' के चलते कान्स का मुंह भी देख आएं हैं. मुंह दिखाई नाम की एक शानदार यूट्यूब सीरीज़ भी बना चुके हैं. तो Padhaku Nitin के इस एपिसोड में Kushal Dubey से सिर्फ़ Acting की बात ही नहीं.. सुनिए उन किताबों, नाटकों, संगीत, सिनेमा और जौनपुर के उन किरदारों की.. जिन्होंने Kushal Dubey को बनाया.. Credits:Producer: Manav Dev RawatHost: Nitin ThakurSound: Suraj Singh

साल 1999 का कारगिल युद्ध सिर्फ पहाड़ों पर नहीं, बल्कि आसमान में भी लड़ा गया था. भारतीय वायुसेना को 18,000 फीट की ऊंचाई पर बेहद मुश्किल हालात में लड़ना पड़ा. सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि दुश्मन पर हमला करना था, लेकिन लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पार नहीं करनी थी. इसी मिशन को नाम दिया गया ऑपरेशन सफेद सागर (Operation Safed Sagar). इस एपिसोड में जानिए कि पाकिस्तान ने कारगिल की योजना कैसे बनाई, भारतीय वायुसेना को कब और क्यों बुलाया गया, मिराज-2000 ने युद्ध का रुख कैसे बदल दिया, टाइगर हिल पर हुई एयर स्ट्राइक क्यों इतनी अहम थी और इज़राइल ने भारत की किस तरह मदद की. साथ ही समझिए कि भारतीय पायलटों ने LoC पार किए बिना दुश्मन के ठिकानों को कैसे निशाना बनाया. इन सभी सवालों के जवाब देने के लिए हमारे साथ हैं सीनियर डिफेंस जर्नलिस्ट संदीप उन्नीथन, जिन्होंने कई सालों तक भारत की डिफेंस और सिक्योरिटी को कवर किया है. अगर आप कारगिल युद्ध और भारतीय वायुसेना के सबसे अहम ऑपरेशन की पूरी कहानी जानना चाहते हैं, तो इस एपिसोड को आखिर तक ज़रूर देखें. Producer: Manoj Rajpurohit Host: Nitin Thakur Sound: Rohan Bharti

Aspirants TVF की उन चुनिंदा web series में से एक है, जिसे एक बार देखने के बाद उसके किरदार और उनकी कहानियां लंबे समय तक आपके साथ ठहर जाती हैं. Old Rajinder Nagar में रहकर UPSC की तैयारी करते तीन दोस्तों की कहानी ने लाखों दर्शकों को खुद से जोड़ा. इसी दुनिया में एक किरदार था Shwetketu Jha यानी SK Sir का - स्टूडेंट्स के बीच पॉपुलर, दोस्तों और रिश्तों की उलझनों के बीच फंसा एक ऐसा किरदार, जिसने अपनी सादगी और emotions से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी. Padhaku Nitin के इस episode में हमारे साथ हैं Abhilash Thapliyal. बातचीत सिर्फ Aspirants या SK Sir तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनके पूरे सफ़र को पढ़ने की कोशिश होगी - RJ की दुनिया से acting तक, TVF के किस्से, Aspirants का सफ़र, Anurag Kashyap के साथ काम करने का अनुभव और फिल्मों की दुनिया के Behind-the-Scenes किस्से. Credits: Producer: Manoj Rajpurohit Host: Nitin Thakur Sound: Suraj Singh

पैसा और व्यापार... दुनिया की असली ताकत यही है. लेकिन जब हम इतिहास की बात करते हैं, तो अक्सर इस सबसे अहम पहलू को नज़रअंदाज़ कर देते हैं. हम राजाओं के युद्ध, संधियां, नीतियां और राजनीति तो याद रखते हैं, लेकिन भूल जाते हैं कि इन सबके पीछे भी आखिरकार पैसा ही काम कर रहा था. इतिहास को देखने का यही नया नज़रिया देती है 'The Wealth Networks'. ये किताब इतिहास के बारे में बता तो रही है, लेकिन एक नई अप्रोच के साथ. लेखक का कहना है कि अगर इतिहास को सच में समझना है, तो पैसे का रास्ता ट्रेस कीजिए. जहां पैसा गया, वहीं इतिहास बना. आख़िर दिल्ली, मुंबई, पुणे, हैदराबाद और तिरुपति जैसे शहर वहीं क्यों बसे? एलोरा और अजंता की गुफाएं उसी जगह क्यों बनीं? खजुराहो वीरान क्यों हो गया? और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मूज़ आज जो अहम है, ये इतिहास में इतना अहम क्यों था? इन्हीं सवालों के जवाब देंगे 'The Wealth Networks' के लेखक अक्षय चव्हाण, इस खास बातचीत में. Credits: Producer: Manoj Rajpurohit Host: Nitin Thakur Sound: Suraj Singh

भारत ने मार्च 2025 में तय समय से पांच साल पहले 20% Ethanol Blending (E20) का लक्ष्य हासिल कर लिया. सरकार का दावा है कि इससे तेल आयात का खर्च घटा, किसानों को फायदा हुआ और प्रदूषण कम हुआ. लेकिन 2026 में सोशल मीडिया पर E20 को लेकर कई दावे वायरल हुए-इंजन खराब होने, माइलेज घटने, फ्यूल टैंक में कीड़े लगने और सरकार द्वारा रिपोर्ट छिपाने तक के आरोप लगे. वहीं, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इन दावों को चुनौती देते हुए कहा कि E20 से खराब हुई एक भी गाड़ी दिखाइए. क्या E20 को लेकर फैली बातें सच हैं या सिर्फ़ अफ़वाह? क्या भारत का Ethanol मॉडल सही दिशा में है, और इसका आपकी गाड़ी पर क्या असर पड़ता है? इन्हीं सवालों पर Automobile Expert अमित खरे के साथ देखिए यह खास चर्चा. Credits: Producer: Manoj Rajpurohit Host: Nitin Thakur Sound: Suraj Singh

Padhaku Nitin के इस खास एपिसोड में हमारे मेहमान हैं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके अभिनेता Adil Hussain। यह हमारी बातचीत का दूसरा पार्ट है.इस एपिसोड में सिर्फ फिल्मों की नहीं, बल्कि एक्टिंग की गहराइयों की बात होती है. एक अच्छा एक्टर कैसे बनता है? किसी किरदार को समझने और निभाने का सही तरीका क्या है? एक कलाकार अपनी सोच और भावनाओं पर कैसे काम करता है? इन सभी सवालों पर आदिल हुसैन खुलकर अपनी बात रखते हैं.बातचीत में उन्होंने अपने थिएटर के दिनों, शुरुआती संघर्ष, Naseeruddin Shah से मिली सीख, बड़े फिल्म सेट्स के अनुभव और एक कलाकार की सोच के बारे में भी दिलचस्प किस्से साझा किए हैं. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि ज़िंदगी के छोटे-छोटे फैसले कैसे हमारे करियर और व्यक्तित्व को प्रभावित करते हैं.अगर आप Acting, Theatre, Cinema या खुद को बेहतर बनाने में रुचि रखते हैं, तो यह एपिसोड आपके लिए ज़रूर देखने लायक है. Credits:Producer: Manoj Rajpurohit Host: Nitin ThakurSound: Aman Pal

इस खास एपिसोड में Padhaku Nitin के नए स्टूडियो के पहले मेहमान हैं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके अभिनेता Adil Hussain। इस बातचीत में सिर्फ फिल्मों की नहीं, बल्कि अभिनय, साहित्य, रंगमंच, किताबों, दर्शन और ज़िंदगी की गहरी बात होती है। आदिल हुसैन अपने शुरुआती संघर्ष, थिएटर के दिनों, अपने गुरु Naseeruddin Shah से मिली सीख, Sridevi के साथ काम करने के अनुभव, बड़े बॉलीवुड सेट्स के अनसुने किस्से और एक अभिनेता के भीतर चलने वाली प्रक्रिया के बारे में खुलकर बात करते हैं। साथ ही, अगर आप अच्छी फिल्में, किताबें और थिएटर देखना चाहते हैं, तो इस एपिसोड में आपको मिलेंगी Adil Hussain की बेहतरीन Recommendations—Peter Brook की Mahabharata से लेकर Sridevi की Sadma तक। इस एपिसोड में जानिए: • Theatre ने Adil Hussain को कैसे बदला? • Teacher Naseeruddin Shah से क्या सीखा? • Sridevi के साथ काम करने का अनुभव कैसा था? • बड़े Bollywood Sets के पीछे की अनसुनी कहानियाँ • Acting को Natural बनाने का उनका तरीका • Peter Brook की Mahabharata क्यों देखनी चाहिए? • कौन-सी किताबें और फिल्में हर कलाकार को देखनी चाहिए? • Cinema, Literature, Philosophy और Life पर गहरी बातचीत अगर आपको सिनेमा, थिएटर, किताबें और बेहतरीन बातचीत पसंद है, तो यह एपिसोड मिस मत कीजिए। Credits: Producer: Manav Dev Rawat Host: Nitin Thakur Sound: Suraj Singh

Fight Club का पहला नियम है - Fight Club के बारे में बात नहीं करनी चाहिए. लेकिन दुनिया भर में लोग Combat Sports, MMA और UFC के बारे में बात करते हैं, बहस करते हैं और दीवाने भी हैं. भारत में भी Cage Fighting का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. लेकिन क्या हम सच में इस खेल को समझते हैं? इस खास बातचीत में हमारे साथ हैं Siddharth Singh - Brazilian Jiu-Jitsu में भारत के पहले Black Belt, Submission Grappling में चार बार के विश्व विजेता और Crosstrain Fight Club के संस्थापक, जिसने भारत को पहला UFC फाइटर Anshul Jubli दिया. Producer: Manoj Rajpurohit Host: Nitin Thakur Sound: Aman Pal

सोशल मीडिया पर एक बाबा ऐसे हैं जिनको देखकर ऐसा ही लगता है कि आप पीपल की छांव में बैठे हों. पहला इसलिए क्योंकि उनके आसपास भी हमेशा हरियाली होती है. दूसरा इसलिए क्योंकि जिस तरह पीपल के सानिध्य में बुद्ध को ज्ञान मिला, इन बाबा के पास बैठकर भी ज्ञान भरपूर मिलता है. ज्ञान- प्रकृति का, सिविक सेंस का, पेड़ों का, पौधों का, आध्यात्म का भी और Climate Change का भी. ये ज्ञान आप पर भी बरसेगा क्योंकि इस स्टूडियो में आए हैं People's Favorite पीपल बाबा. क्योंकि हाल ही में आई है इनकी एक किताब Ghosts on People Trees. तो Padhaku Nitin में आज मिलिए Peepal baba से Producer: Manav Dev Rawat Host: Nitin Thakur Sound: Suraj Singh

एक समय था जब युद्ध की पहचान टैंक, फाइटर जेट और लाखों सैनिकों से होती थी। लेकिन आज 500 डॉलर का एक FPV ड्रोन करोड़ों डॉलर के हथियारों को तबाह कर सकता है। Ukraine-Russia War से लेकर Middle East के संघर्षों तक, ड्रोन ने युद्ध की परिभाषा ही बदल दी है। इस विशेष बातचीत में वरिष्ठ रक्षा पत्रकार Sandeep Unnithan के साथ समझिए कि ड्रोन आखिर इतने बड़े गेमचेंजर कैसे बने, सैन्य ड्रोन और आम DJI ड्रोन में क्या अंतर होता है, FPV Drones और Drone Swarms कितने खतरनाक हैं, और क्या भविष्य के युद्ध AI द्वारा संचालित मशीनें लड़ेंगी। इस एपिसोड में जानिए: • Drone Warfare का विकास और इतिहास • Ukraine-Russia War से मिले सबक • FPV Drones और Drone Swarms का खतरा • China, Pakistan और Drone Technology की दौड़ • AI-Guided Drones और Autonomous Weapons • क्या टैंक और फाइटर जेट्स अप्रासंगिक हो रहे हैं? • भारत की Drone Warfare तैयारियां • आतंकवाद और ड्रोन का भविष्य • 2035 का युद्ध कैसा दिखेगा? • क्या भविष्य के युद्ध सैनिक नहीं, सॉफ्टवेयर इंजीनियर तय करेंगे? अगर आप Defence, Geopolitics, Military Technology, AI, International Relations और Future Warfare में रुचि रखते हैं, तो यह एपिसोड आपके लिए है।

एक दौर था जब इंसान को Social Animal कहा जाता था। आज वह Social Media Animal बन चुका है। और सोशल मीडिया? वह एक विशाल जंगल है। इस जंगल में आग भी लगती है, जिन्हें हम Controversies कहते हैं। यहां मौसम भी बदलते रहते हैं, जिन्हें Trends कहा जाता है। कभी छोटे क्रिएटर्स बड़े-बड़े नामों को चुनौती देते हैं, कभी बड़े खिलाड़ी छोटे खिलाड़ियों को निगल जाते हैं, और कई बार तो पूरा सिस्टम ही बगावत के दौर से गुजरता है। लेकिन इस जंगल के सबसे ताकतवर जीव हैं — Content Creators। आज के दौर में कौन उनके जैसा नहीं बनना चाहता? लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंच, ब्रांड डील्स, सब्सक्राइबर्स, व्यूज़ और पहचान। बाहर से देखने पर यह दुनिया जितनी चमकदार लगती है, अंदर से उतनी ही जटिल भी है। क्योंकि कंटेंट बनाना एक बात है, लेकिन उससे लगातार और टिकाऊ तरीके से पैसा कमाना बिल्कुल दूसरी। यही सवाल मेरे मन में भी आया, जब मैंने हाल ही में "Creator to Crorepati" पढ़ी। यह किताब एक बेहद अहम सवाल उठाती है—क्या सभी Content Creators वास्तव में पैसा कमा पा रहे हैं? अगर नहीं, तो क्यों नहीं? और अगर हां, तो उसका सही रास्ता क्या है? इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए आज हमारे साथ मौजूद हैं इस किताब के लेखक, डिजिटल दुनिया के अनुभवी क्रिएटर और सोशल मीडिया के इस जंगल के एक बड़े खिलाड़ी — Aaditya Iyengar। Producer: Manav Dev Rawat Host: Nitin Thakur Sound: Rohan Bharti

खाने पीने से लेकर जगने सोने तक. हम सब Brands से घिरे हुए हैं. खाना मंगाना हो तो Zomato-Swiggy जैसे Brands. सोना हो तो गद्दे के Brands. जागना हो तो कौनसी Brand की चाय कॉफ़ी पीएंगे उसके Brands. यहां तक की जिस डिवाइस पर आप हमें देख पा रहे हैं, उसका भी एक Specific Brand और ये भी मुमकिन है कि इस पॉडकास्ट को चलाने से पहले भी किसी Brand का ad आपके Youtube पर आया होगा. सोचिए इतना घिरे हैं हम Brands से. और इसलिए ज़रूरी है कि जो Brands हमारे इतने आसपास रहते हैं, वो हमसे चाहते क्या हैं? सिर्फ़ हमारा पैसा? नहीं! और भी काफ़ी कुछ. ज़रूरत है ये समझते कि वो सोचते कैसे हैं? Padhaku Nitin के इस एपिसोड में Brands को समझने की कोशिश है. और किसी का true Character तभी reveal होता है, जब वो अपने Existence के लिए लड़ रहा हो. इसलिए आज Brands को समझेंगे. The Great Brand Wars के ज़रिए. बात करेंगे दुनिया के सबसे Creative और सबसे Brutal Brand Wars. कैसे दुनिया के बड़े बड़े Brands लड़ते हैं आपके और सिर्फ़ आपके Attention के लिए. और in the process बन जाते हैं Culture का हिस्सा. कई बार इस हद की आपकी Choices को Influence करने लगते हैं. हमारे साथ Expert भी ऐसी हैं जो इसपे बात करने के लिए Best हैं, क्योंकि वो रोज़ Brands के बारे में ही पढ़ाती हैं. हमारे साथ हैं Prof. Shailaja Manocha. Marketing की Professor हैं. Maharaja Agrasen Business School में. Producer- Manav Dev Rawat Host - Nitin Thakur Sound- Suraj Singh

संयम और कटौती. एक दौर था जब इन्हीं गर्मियों में शहर के कुछ मोहल्लों से बिजली की कटौती होती थी, और इतनी गर्मी में भी हम रखते थे संयम. हमारे घरों में भी जब जब कहीं से कोई विपत्ति आन पड़ती थी, बड़े बुज़ुर्गों की सलाह में संयम और कटौती दोनों शुमार होती थीं. पिछले दिनों कुछ ऐसा हुआ, कि भारत भर की जनता के कानों में ये शब्द फिर कौंधे. जब पीएम मोदी ने तेलंगाना के सिकंदराबाद में 7 Pointer की अपील की. पीएम मोदी की इस सलाह को देशभर में दो तरह से देखा गया. एक तरफ़ तो लोगों ने कहा कि मोदीजी इस West Asia और Hormuz संकट के समय में संयम और कटौती की सलाह दे रहे हैं. लेकिन दूसरी तरफ़ भर भर के उसकी इस अपील की आलोचनाएं भी हो रहीं हैं. ये दोनों बातें Subjective है. लेकिन जब कोई Economy के Professor इस सलाह, इसके Consequences या Faultlines को समझाएं तो मुमकिन है कि एक Objective Insight आप और हम दोनों पा सकें. Padhaku Nitin के इस एपिसोड में बात इसी पर हुई. सोना ख़रीदना छोड़ देने से क्या सब ठीक हो जाएगा? पूरा देश अगर सलाह मांग कर WFH कर भी ले, तो क्या Hormuz संकट हंसते खेलते बीत जाएगा? ये भी समझाया कि War होती ही किसी देश की Economy किस तरह बदल जाती है? Economist और Professor Arun Kumar से. Producer- Manav Dev Rawat Host - Nitin Thakur Sound- Aman Pal

आप दिलजीत दोसांझ को जानते हैं न? सोशल मीडिया के इस दौर में उनका नाम जाने बिना रह पाना मुश्किल है भी. सिंगर हैं. एक्टर भी हैं. उनके नाम पर भारत तो क्या. विदेशों में भी स्टेडियम के स्टेडियम भर जाते हैं. 30 अप्रैल 2026 को वो कैलगरी, कैनेडा में मौजूद एक ऐसे ही स्टेडियम में अपना शो कर रहे थे. अचानक उनकी नज़र भीड़ में कुछ लोगों पर पड़ी और गाते गाते रुक गए. दरअसल भीड़ में कुछ लोग खालिस्तान समर्थक झंडे लहरा रहे थे. दिलजीत ने पंजाबी में उन्हें डांट दिया. रिपोर्टस का मानना है कि दिलजीत ने उसके बाद सिक्योरिटी से इन झंडा लहराने वालों को बाहर भी निकाल दिया. इसके बाद फिर से मीडिया रिपोर्ट्स में खालिस्तान का कीवर्ड तैर गया. अक्सर तैरता ही रहता है. चाहे बात कनाडा भारत के संबंधों की हो. इंदिरा गांधी और Operation Blue Star की हो या अभी 5 मई 2026 को पंजाब में हुए बॉम्ब ब्लास्ट हों. एक नाम अक्सर तैर जाता है Khalistan. इस एपिसोड में आपको ये Khalistan Movement ही पूरी तरह समझा देते हैं. भारत के एक राज्य से उठा एक मूवमेंट कैसे कनाडा तक पहुंचा. कैसे भारत के लिए लगातार एक Internal Security का मसला बना रहता है. Operation Blue Star क्या था? क्यों खालिस्तानियों पर ये आरोप लगता है कि वो कश्मीर में Operate करने वाले आतंकवादियों से ज़्यादा कट्टर हैं? Padhaku Nitin का ये एपिसोड दरअसल, सिर्फ़ एक पॉडकास्ट नहीं है. बल्कि एक Masterclass है खालिस्तान को समझने के लिए. और हमारे आपके टीचर हैं आपके चहीते Counter-terrorism Expert अभिनव पंड्या. Producer- Manav Dev Rawat Host - Nitin Thakur Sound- Aman Pal

रोटी कपड़ा और मकान. The Ultimate Trio of Survival. एक दौर था जब किसी Individual की समृद्धि नापने के लिए ये मापक थे. लेकिन आज अल्टीमेट मापक है, नौकरी. वही नौकरी जिसके लिए लोग इतना पढ़ते लिखते हैं. इतनी Skills acquire करते हैं. और कई लोग तो इसके लिए दूर देश जाने के लिए तैयार हो जाते हैं. लेकिन हर बार सपना उतना सुनहरा हो जितना चमक रहा है, ज़रूरी नहीं. कई बार बाहर के किसी देश में काम करने गए लोगों के साथ धोखा होता है. Scams होते हैं. शोषण होता है. आज के पढ़ाकू नितिन में हम जिस किताब पर बात करने वाले हैं वो ऐसे ही Scams की कहानी है. वो भी वो Scams जो America में घटे. किताब की मानें तो सालों से घट रहे हैं. लगातार H1B Visa पर भारत से America पहुंचे लोगों के साथ. Padhaku Nitin में इस बार Tanul Thakur हैं. उस दुनिया को उन्होंने बहुत क़रीब से देखा है. खुद भी उसका शिकार होते होते बचे. और फिर सालों की मेहनत के बाद इस किताब में वो सारी कहानियां और इक्ट्ठी कीं. जिसे एक लाइन में Define करें तो कहेंगे. Indian Diaspora's Best Kept Secret.

आसमान के पार भी शायद कोई आसमान होगा। जो लोग इस जहान से रुख़सत पा जाते हैं, शायद वहाँ ठौर पाते होंगे। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो जाते-जाते ऐसी ख़ला छोड़ जाते हैं, जिसे भरने का कोई रास्ता समझ में नहीं आता। कुछ दिन पहले दुनिया ने एक ऐसी ही ख़ला महसूस की, जब मशहूर फ़ोटोग्राफ़र रघु राय ने दुनिया को अलविदा कहा। वही रघु राय, जिनकी तस्वीरों को अगर कोई chronological order में लगाए, तो आज़ादी से आज तक के सालों की सिलसिलेवार तस्वीर देख सकता है। इतना इतिहास, इतना charm है उनमें। इस यात्रा के बारे में हमने उनसे एक बार पहले Padhaku Nitin में बात की थी—वो भी सुनिएगा। ये एपिसोड रघु राय को ही tribute है—Padhaku Nitin की तरफ़ से भी और हमारे आज के मेहमान की तरफ़ से भी। मेरे साथ हैं India Today Group के Photo Editor, Bandeep Singh। Bandeep जी इंडस्ट्री के सबसे प्रतिष्ठित photojournalists में से एक हैं। एक photojournalist के craft पर बात करने के लिए, दूसरे photojournalist से बेहतर कौन होगा? और बंदीप जी और रघु राय के बीच कई connections और समानताएँ भी हैं। एपिसोड अंत तक देखिएगा। प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल

Crime and Punishment. यूं तो कहने को ये दोस्तोवेस्की के उपन्यास का नाम भी है. लेकिन Crime and punishment समाज का एक नंगा सच है. इन्हीं दोनों के बीच एक पूरा Penal System revolve करता है. Justice System revolve करता है. जिसके लिए बहुत ज़रूरी है Crime और Criminal की सोच और Behavior को समझना. Forensic Psychology यही करती है कुछ टूल्स के सहारे. जिनके बारे में सुनने को मिलता है Narco Test, Lie Detector, Brain Mapping. अब इनका मकसद एक हो सकता है- क्राइम सॉल्व करना. लेकिन इनके इर्द गिर्द अब भी कई Confusion है. तो आज एक Forensic Psychologist के ज़रिए एक Criminal के दिमाग में उतरते हैं. वो कैसे सोचता है. कैसे काम करता है. क्या क्राइम होने से पहले Criminal mind को identify किया जा सकता है? Padhaku Nitin के इस एपिसोड में हमारे साथ हैं Dr. Divya Dubey. Forensic Psychologist हैं. Op Jindal University में इसी Subject की Professor भी हैं. तिहाड़ से लेकर साबरमती जेल में जाती है Criminals की Counselling भी करती हैं.

जासूस, जासूसी ऑपरेशंस, ISI RAW CIA KGB MOSSAD. जबसे धुरंधर आई है जनता को एक बार फिर से Covert Operation की दुनिया में रस आने लगा है. आना Logical भी है, बात राज़ की हो तो उसे जानने की उत्सुकता भी उतनी ही होती है. आज के एपिसोड में बात करेंगे एक Covert Operation की. और कोई ऐसे वैसे नहीं India के सबसे बड़े Covert Operation की, जिसे अंजाम दिया Special Forces ने. पहले बता दूं कि ये ऑपरेशन Surgical Strike से भी बड़ा था. लेकिन आज भी इसकी बात नहीं होती. क्यों नहीं होती? क्यों इतने बड़े ऑपरेशन पर किसी ने बात नहीं की. क्या था ये ऑपरेशन? यही कहानी कहती है ये किताब Operation X. लिखने वाले यूं तो इस किताब के दो हैं, Captain MNR Samant और Senior Defence Journalist Sandeep Unnithan. लेकिन आज Captain साहब हमारे साथ नहीं है. 2019 में किताब आने के कुछ हफ़्तों पहले उनका निधन हुआ. हमारे साथ हैं Defence Journalist, Sandeep Unnithan. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: सूरज सिंह

Gangs of Wasseypur का एक बहुचर्चित सीन है. जिसमें रामाधीर सिंह जी इस बात का वर्णन करते हैं कि सिनेमा का समाज से रिश्ता क्या है? और आप भी जानते ही हैं. चाहे पापा की दी हुई घुड़की पर तड़कता भड़कता दिलीप कुमारनुमा कमबैक देना हो, या गर्लफ्रेंड की आंखों की तारीफ़ करके रिश्ते मधुर बनाने हों. Filmein और अगर आयाम को थोड़ा बड़ा करें तो पॉप कल्चर इसमें हमेशा काम आया है. इस बात को तो आप भी चलते फिरते कह ही देते हैं हम लोग. लेकिन आज पढ़ाकू नितिन के इस एपिसोड में 90s के दशक पर बात करेंगे. समझेंगे कि जब दुनिया और देश में इतना कुछ बदल रहा था. तभी म्यूज़िक सिनेमा टीवी शोज़ और Ads इतने क्यों बदले? 90s के वो गाने इतने पसंद क्यों आते हैं? Late 90s के Rock Bands, Indie Bands आज भी इतने अचानक से रील्स पर क्यों चल निकलते हैं? क्या इस बड़े रिव्ल्यूशन के पीछे एक बड़ा कारण इकॉनमी और पॉलिटिक्स भी है? और इसका राज़ भी खोलेंगे कि 90s के गानों को रिमिक्स करके आदित्य धर जैसे फिल्म मेकर्स क्यों इस्तेमाल करते हैं? आपको पता चलेगा कि इसकी भी पॉलिटिक्स है! हमारे साथ हैं प्रॉफेसर, हिस्टोरियन, पॉप कल्चर Enthusiast Arup Chatterjee. फिलहाल OP Jindal University में पढ़ाते हैं. प्रतिष्ठित अखबारों के लिए बड़े इंट्रेस्टिंग आर्टिकल्स लिखते हैं. 3 किताबें लिख चुके हैं. सुनिए पूरा एपिसोड

मार्च 2026 के आख़िरी हफ़्ते में एक ख़बर आई—पाकिस्तान के बहावलपुर में एक व्यक्ति मारा गया। यह था जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक और 2001 के संसद हमले के मास्टरमाइंड मसूद अज़हर का बड़ा भाई, मोहम्मद ताहिर अनवर। अब ध्यान खींचने वाली बात क्या थी? किसने मारा—नहीं पता। कैसे मारा—नहीं पता। यही एक पैटर्न सा बनता दिख रहा है। पिछले 5-6 सालों में भारत की धरती पर आतंक फैलाने का इरादा रखने वाले कई पाकिस्तानी और खालिस्तानी आतंकियों को अलग-अलग मौकों पर इसी तरह मौत के घाट उतारा गया है। किसने मारा—नहीं पता। और फिर एक शब्द सामने आता है—“Unknown Men।” पाकिस्तान आरोप लगाता है कि ये RAW के लोग हैं, लेकिन RAW इन आरोपों को तवज्जो ही नहीं देता। अगर आपने धुरंधर 2 देखी है, तो उसमें भी इस तरह के ऑपरेशंस का इशारा मिलता है। लेकिन धुरंधर 2 तो एक फिल्म है… असल में क्या हो रहा है? क्या R&AW जैसी एजेंसियां वाकई ऐसे ऑपरेशंस को अंजाम देती हैं? CIA और ISI जैसी एजेंसियों पर भी ऐसे आरोप लगते रहे हैं। तो सोचा, जासूसी की इस दुनिया में थोड़ा गहराई से उतरते हैं—RAW की वर्किंग को समझते हैं, केस स्टडीज़ के ज़रिए, पुराने उदाहरणों के ज़रिए। और इसलिए आज हमारे साथ हैं इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट Abhinandan Mishra। ये पहले नेवल ऑफिसर रह चुके हैं, नॉवेल लिख चुके हैं, बैंक PO भी रहे हैं और वकालत की पढ़ाई भी की है। लेकिन सबसे खास बात—इन्होंने इंटेलिजेंस एजेंसियों की कार्रवाई पर विस्तार से लिखा है। इनसे पूछेंगे सारे सवाल। जानेंगे सब। क्योंकि ये है Padhaku Nitin—जहां हम मानते हैं, लाइफ़ है छोटी… जानना सब है। प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: रोहन भारती

भारत एक ऐसा देश है. जहां तीन कोस में भाषा और पानी ही नहीं. कहानियां भी बदल जाती हैं. क्योंकि हर गांव की अपनी एक लेगसी है. हर गांव के अपने हीरोज़. लेकिन हरियाणा और राजस्थान के कुछ गांवों की विशेषता ही यही है कि वहां रहने वाले लोग जानवरों और प्रकृति से इतना प्रेम करते हैं कि उनके लिए अपनी जान तक दे सकते हैं. ये समाज ही बिश्ननोई समाज के नाम से जाता है, जिनके लिए प्रकृति एक धर्म है. पढ़ाकू नितिन के इस एपिसोड में हमारी मेहमान इसी समाज पर गहरी रिसर्च कर चुकीं एडवोकेट अनु लाल है. हाल ही में उनकी किताब आई “Bishnoi and the blackbuck” नाम से तो हमने सोचा इसी मुद्दे पर उनसे खुल के बात की जाए. रेशा रेशा खोला जाए. वही किया है, एपिसोड पूरा देखिएगा सुनिएगा. क्योंकि ज़िंदगी छोटी सी है जानना सब है. शुरुआत यहीं से कीजिए.

सोशल मीडिया पर Dhurandhar 2 का बहुत शोर है. कोई गानों की तारीफ़ कर रहा है. कोई एक्टर्स की. कोई कहानी की. लेकिन ये पॉडकास्ट कोई फिल्म रिव्यू नहीं है. क्योंकि Padhaku Nitin के इस एपिसोड में हमने की है फिल्म के किरदारों की बात. फिल्म में कई किरदार हैं, जो या तो सच्चे किरदारों से inspired हैं. जैसे राकेश बेदी द्वारा निभाया गया जमील जमाली का किरदार या फिर वो सच्चे किरदार ही हैं जैसे रहमान बलोच, SP Aslam Chaudhary. लेकिन अब क्योंकि फिल्म में क्या सही है, क्या फिक्शन इसकी Lines Blurred हैं. तो हमने सोचा इस Line को थोड़ा क्लियर किया जाए. बताया जाए कि इन किरदारों की असल कहानी क्या है? किस हद तक ये Inspired हैं? हमारे मेहमान है Senior Journalist और अब तो Bestselling Author भी अनिरुध्य मित्रा. सालों साल से अंडरवर्ल्ड पर रिसर्च करते हैं. सिर्फ़ भारत के ही नहीं, पाकिस्तान के भी. Covert Operation, Intelligence Agencies पर पढ़ना लिखना आपका शौक़ पैशन और प्रोफेशन भी है. और मज़ेदार बात ये है इनकी किताब Delhi Directives का थीम भी Dhurandhar से कई जगह तो हूबहू मिलता है. कैसे मिलता है ये भी पूछा. बाकि पॉडकास्ट Dhurandhar स्पेशल है ही, चिंता मत कीजिए Spoilers नहीं दिए हैं. एपिसोड पूरा सुनिएगा और शेयर भी कीजिएगा

Toxic Work Culture... ये शब्द हम रोज़ सुनते हैं, मीम्स में देखते हैं, दोस्तों की शाम की रैंट में सुनते हैं. लेकिन Legally इसका मतलब क्या है? और सबसे ज़रूरी, आप इससे बच कैसे सकते हैं?वकील रावी बीरबल से हमने पूछे आपके मन के सारे सवालToxic Work Culture की Legal Definition क्या है?70 घंटे काम करवाना Legal है या नहीं?बॉस चिल्लाए तो Employee के क्या Rights हैं?POSH Act असल में काम कैसे करता है?Overwork, Harassment, और Hostile Environment Law की नज़र में कहाँ खड़े हैं ये?प्रड्यूसर: मानव देव रावतसाउंड मिक्स: सूरज सिंह

Padhaku Nitin के इस एपिसोड में हमारे मेहमान हैं मुक्काबाज़, राइटर और दिल से एक्टर Vineet Kumar Singh. आपने उन्हें कई फिल्मों में देखा ही होगा. कभी गैंग्स ऑफ़ वसेपुर के छरहरे दानिश ख़ान. कभी Ugly Film में Police Station में रिपोर्ट लिखवाने ऐसे पहुंचे घबराए हुए Casting Director के तौर पर. कभी Boxer जैसी कड़ी बॉडी लिए मुक्काबाज़ के श्रवण बने. कभी हाथ में पन्ने लेकर SuperBoys of Malegaon में चिल्लाते दिखे ‘Writer सबका बाप होता है'. छावा में जब संभाजी से संवाद किया तो लोगों की आंखें भरी. और इनका सबसे लेटेस्ट काम आपको देखने को मिलेगा. Netflix पर आई वेब सीरीज़ Hello Bachhon में. Vineet इस सीरीज़ में Physicswallah के CEO और Star Teacher Alakh Pandey का किरदार निभा रहे हैं. ये पॉडकास्ट पूरा सुनिएगा और हां, उसके बाद Netflix पर जाकर Hello Bacchon भी देखिएगा. दोनों में मज़ा आना पक्का है. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: रोहन भारती

हमने कुछ महीने पहले ज़ुबिन गर्ग पर एक लंबी चौड़ा पॉडकास्ट किया था. उनके गानों की चर्चा हुई, उनके किस्से सुने हमने लेकिन जाते जाते हमारे गेस्ट ने एक बात कही- जब 2026 में असम चुनाव होगा तो ज़ुबिन गर्ग एक बड़ा मुद्दा साबित होगा. असम चुनाव का ऐलान हो चुका है. पार्टियों ने ज़मीन पर उतर कर जनता की सुध लेनी शुरू कर दी है. Screening Committees अब चुनावी चेहरों पर मंथन करना शुरू कर चुकी हैं. Strategies बन चुकी हैं. तो हमने सोचा कि Pre-Chunav माहौल में एक ऐसा पॉडकास्ट तो कर ही लिया जाए. जिससे कि हमारे देखने सुनने वालों को पता तो चले कि असम चुनाव इतना ख़ास है क्यों? हिंदी भाषी ऑडियंस को इस बात का अंदाज़ा तो हो कि दरअसल असम के मुद्दे क्या हैं? वहां बड़ी बड़ी पार्टियां कौनसी हैं? बड़े चेहरे कौनसे हैं?Padhaku Nitin का ये एपिसोड Assam पर ही. और मेहमान हैं Kaushik Deka, India Today North East के एडिटर हैं. India Today Magazine के Managing Editor हैं. इस बात को कहने में कोई दो राए नहीं है कि असम पर इनसे ज़्यादा बेहतर एक्सपर्ट आपको नहीं मिल सकता, क्योंकि Experience और Insight दोनों तगड़े हैं इनके. एपिसोड पूरा सुनिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: रोहन भारती

देश के कोने कोने से आवाज़ें आ रहीं हैं. AQI डबल से ट्रिपल डिजिट हुआ जा रहा है इसका ख़्याल कीजिए. हवा में जो ज़हर घुलता जा रहा है इसका ख़्याल कीजिए. क्योंकि WHO के आंकड़े ऐसा बताते हैं कि दुनिया की 99% जनता, Air Pollution के सीधे ख़तरों से प्रभावित है. न उनका दिल सुरक्षित है, न दिमाग और न फेंफड़े. अब जब बात इतनी गंभीर है, तो इस पर बात होना भी Urgent हो जाता है. तो याद रखिए, Padhaku Nitin का ये एपिसोड सिर्फ़ इंट्रेस्टिंग ही नहीं बेहद Urgent भी है. आज बात करेंगे की Air Pollution की समस्या को Solve करने में हम कहां पीछे रह रहे हैं? क्या Policy Making की कमी है? या क्या हम इस प्रॉबल्म को Misjudge कर रहे हैं? क्या Pollution के चलते सिर्फ़ हमारी Society ही नहीं, Economy भी धीमे धीमे नुकसान उठा रही है? फोकस दिल्ली पर भी करेंगे. पूछेंगे कि क्या AQI को टेंप्रेचर का स्केल बता देना या पानी छिड़क देना Monitoring Scales के आसपास. किसी भी तरह से Pollution को मिटाने के लिए कोई वैज्ञानिक तरीका है? यही पूछा है इस एपिसोड में जाने माने Environmentalist Chandra Bhushan जी से. पिछले दो दशकों से ये लगातार Environment से जुड़े मुद्दों पर गहरी रिसर्च करते हैं, करवाते हैं. Panels का हिस्सा होते हैं और उस चर्चा से और भी आगे बढ़कर चीज़ें समझाते हैं जहां Air Pollution की चर्चा दिल्ली की गाड़ियों से शुरू होती है. iForest (International Forum for Environment, Sustainability और Technology) नाम की प्रतिष्ठित संस्था के CEO भी हैं. एपिसोड पूरा सुनिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल

सिनेमा सिर्फ़ मनोरंजन ही नहीं, किसी समाज को, उसकी जड़ों और उसके culture को समझने का एक रास्ता भी है. सिनेमा के अंदर वह ताकत है कि आप 2026 में किसी थिएटर में बैठकर The Godfather देखें, तो मुमकिन है आपको लगे कि World War II अभी-अभी खत्म हुआ है. उसी थिएटर में बैठकर Interstellar देखें, तो महसूस हो कि दुनिया खत्म होने के कगार पर है. और अगर ओए लक्की! लक्की ओए! देखें, तो समझ आए कि दिल्लीवालों की complexities क्या हैं. Cinema एक subjective माध्यम भी है. दो अलग-अलग लोग एक ही फिल्म को अलग नजरिए से देख सकते हैं और इस पर बहस कर सकते हैं कि क्या वह फिल्म किसी propaganda का हिस्सा है या सच्चाई दिखाती है. आपने धुरंधर, छावा और The Kashmir Files को लेकर हुए बवाल भी देखे होंगे. क्योंकि आजकल फिल्मों पर propaganda cinema होने के आरोप पहले से ज़्यादा लगने लगे हैं. Padhaku Nitin के इस एपिसोड में फिल्म journalist Mihir Pandya और documentary filmmaker Eshan Sharma के साथ इसी मुद्दे को टटोलेंगे. ये सिनेमा को पढ़ते भी हैं और पढ़ाते भी हैं, एक अलग नजरिए के साथ. इन्होंने हाल ही में propaganda cinema पर एक workshop भी की है. इसलिए आज हम इन्हीं से समझेंगे कि propaganda cinema आखिर होता क्या है. क्या propaganda-less cinema जैसी कोई चीज होती भी है. क्या सिनेमा सिर्फ एक छलावा है. क्या cinema की अपनी politics होती है, और क्या politics के बिना cinema संभव है. अंत तक बने रहिएगा. चैनल Subscribe करना भी न भूलिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल

फरवरी 2026 आ चुका है. साथ ही आ चुका है इस साल का बजट भी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कल लोकसभा में Union Budget 2026 पेश किया. 83 मिनट का भाषण दिया. कई ऐलान किए. और अब हर साल की तरह बजट पर प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं. सरकार बजट के फायदे गिना रही है. विपक्ष नुकसान. प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि इस साल बजट हमारे युवाओं के सपनों का बिंब है और नेता प्रतिपक्ष कह रहे हैं कि युवा और किसान परेशान है और बजट ज़रूरी मुद्दों को एड्रेस नहीं कर रहा. Experts समझाने में जुटे हैं कि भारी Economic Terms में लबरेज़ बजट. आपके हमारे लिए क्या समेटे हुए है? तो चलिए हम भी एक ऐसे ही Expert की शरण लेते हैं जो हमको समझाएं कि क्या वाकई इस साल का बजट थोड़ा बोरिंग है, जैसा कि सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं हैं. या फिर कुछ ऐसे Undertones समेटे हुए है जो फिलहाल हमें समझ नहीं आ रहे लेकिन समझना ज़रूरी है. हमारे साथ है हमारे पुराने मेहमान Economist Arun Kumar जी. Yale, Columbia University जैसी Universities में Lectures दे चुके हैं. दुनियाभर में बुलाए जाते हैं. JNU में 30 साल इकॉनमिक्स पढ़ा चुके हैं. खासियत ये है इनकी कि आसान भाषा में सब समझाकर चौंका देते हैं. गुरुवार आने वाला पढ़ाकू नितिन का एपिसोड इस बार आपके लिए सोमवार ही ले आए हैं. पूरा देखिएगा और प्यार दीजिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: सूरज सिंह

पढ़ाकू नितिन में ऐसा कम होता है जब हम स्टूडियो से बाहर निकलते हों. लेकिन इस बार हम सिर्फ़ स्टूडियो से ही नहीं शहर, यहां तक की राज्य से भी बाहर आ गए हैं. पढ़ाकू नितिन की टीम पहुंच गई है पंजाब के जालंधर. इस एपिसोड में हम घूमे जालंधर की मशहूर Lovely Professional University में. 150 से ज़्यादा कोर्सेज़, 35 हज़ार से ज़्यादा स्टूडेंट्स—Agriculture, Robotics, Management, Technology, Liberal Arts, Law और न जाने कितने ऐसे कोर्सेज़। दिमाग में सवाल आया कि आख़िर इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी चलती कैसे है? स्कूली शिक्षा की खामियों की बात तो हम अक्सर सुनते रहते हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी लेवल पर ये मामला कैसा है? यूनिवर्सिटीज़ करोड़ों के प्लेसमेंट्स कैसे करवाती हैं? एक वर्ल्ड-क्लास यूनिवर्सिटी कैसी होती है? क्या भारत में कोई वर्ल्ड-क्लास यूनिवर्सिटी है? और ये भी कि जब एक ही कैंपस में 40 से ज़्यादा देशों के स्टूडेंट्स पढ़ते हों, अलग-अलग राज्यों से, अलग-अलग पृष्ठभूमि से लोग आते हों—तो इतना सब कुछ मैनेज कैसे होता है? ये सारे सवाल हमने पूछे अपनी LPU की Pro-VC, Mrs. Rashmi Mittal से। प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: रोहन भारती

जीने का हक़ सभी को है, ये तो हमारा संविधान भी कहता है. लेकिन बार-बार इसका उल्लंघन होना हमें सवाल पूछने मजबूर करता है. कुछ ही दिन पहले, नोएडा के सोफ़्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता एक हादसे का शिकार हो गए, ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में उनकी कार पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी. और ये सिर्फ़ एक घटना नहीं, रिकॉर्ड्स बताते हैं कि 2004 से 2015 के बीच क़रीब ऐसे 40 लाख मामले देखने को मिले हैं. ये आंकड़े हालात का अंदाज़ा तो देते हैं, लेकिन असलियत इससे कहीं ज़्यादा गहरी है. ‘पढ़ाकू नितिन' के इस एपिसोड में हमारे मेहमान हैं केटी रवींद्रन, School of Planning and Architecture में Urban Design Department के डीन. उनसे हमने पूछा कि क्या हम अपने शहरों को अब तक Flawless क्यों नहीं बना पाए? क्यों Bangalore का Traffic अब भी बदनाम है? क्यों Monsoon आते ही बार बार ये डर सताता है कि पार्किंग में खड़ी गाड़ी डूब न जाए? पिछले साल Old Rajinder Nagar के Basement का मामला भी आपको याद होगा. तो सोचा क्यों न एक Expert से समझा जाए कि आखिर ये शहर बसाए कैसे जाते हैं? क्या इन्हें बसाते वक्त ऐसे Sustainable Methods के बारे में नहीं सोचा जाता कि Traffic न लगे. जानेंगे Noida, Gurugram, Delhi, Chandigarh, Bangalore, London, New York, Paris किस तरह से Urban Planning के लिहाज़ से शानदार या Flawed हैं. सुनिए पूरा पॉडकास्ट और हां, लाइक शेयर Subscribe करना न भूलिए प्रड्यूस: मानव और माज़ साउंड मिक्सिंग: अमन पाल

न जाने कितनी ही बॉलीवुड फिल्मों के क्लाइमेक्स सीन और न जाने कितने ही भारतीयों के आम जीवन का हिस्सा रही है यह रेल. भारतीय मिडिल क्लास की यादों का एक बड़ा हिस्सा रेलवे से जुड़ा है. लेकिन रेलवे की यात्राओं को रोमांटिसाइज़ करना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी यह समझना भी है कि रेलवे, कई दूसरी सरकारी संस्थाओं की तरह, अव्यवस्था से अछूता नहीं रहा है. रेलवे के मुताबिक, पिछले पांच सालों में खाने से जुड़ी 19,000 से ज़्यादा शिकायतें दर्ज हुई हैं. 2021–22 में शिकायतें करीब 1,000 थीं, 2023–24 में यह संख्या 7,000 के पार पहुंच गई और 2024–25 में 6,000 से ज्यादा हो गई. ये आंकड़े हालात का अंदाज़ा तो देते हैं, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज़्यादा गहरी है. ‘पढ़ाकू नितिन' के इस एपिसोड में हमारे साथ एक ऐसे व्लॉगर हैं, जो इसी हकीकत को लगातार सामने लाते रहते हैं. वे ट्रेनों में सफर करते हैं, छोटी हो या लंबी दूरी, हर यात्रा में. जहां 14 रुपये की पानी की बोतल 20 में बेची जाती है, वहां सवाल उठाते हैं. महंगा खाना बेचा जाता है, तो शिकायत दर्ज कराते हैं. इस दौरान होने वाली झड़पों को भी वे बेहद सहजता से संभालते हैं. इनका नाम है शाहनवाज़. सोशल मीडिया पर ये “पीटर क्लिप्स” के नाम से मशहूर हैं. आपने इनकी रील्स और वीडियो ज़रूर देखी होंगी. आज देखिए इनका पहला पॉडकास्ट, जहां हमने रेलवे में भ्रष्टाचार, यात्रियों की परेशानियों और उनकी आंखों देखी अव्यवस्थाओं पर खुलकर बातचीत की है. प्रड्यूसर : मानव देव रावत साउंड मिक्सिंग: अमन पाल

Nostalgia किसी Time Machine की तरह होता है न? एक बार हिट किया नहीं कि आप पहुंच जाते हैं एक दूसरे Time-Space में. Music अक्सर इस तरह के Nostalgias के लिए Trigger साबित होता है. जो आपको 2026 में बैठे बैठे भी कई दशकों पहले की यात्रा मिनटों में करवा लाता है. तो चलिए आपको उस दौर में ले चलते हैं, Mid 1990s. जब Indie Pop किसी ठंडी हवा के झोंके की तरह Audience के कानों को कुछ शानदार Earworms दे रहा था. कुछ नए Bands, नए Sounds, नए Styles जो आज भी लोगों को याद हैं. आज हमारे साथ एक ऐसे ही Artist हैं जिन्होंने शुरूआत Popularity Indie Pop के दौर में पाई लेकिन फिर Bollywood में आकर भी खूब धूम मचाई. ये वही आर्टिस्ट हैं, जिन्होंने जो छुआ उसे सोना बना दिया. चाहे Silk Route के गाने हों, Rockstar की Album या Singles. इन्होंने कभी निराश नहीं किया. हमारे साथ हैं Playback Singer और Musician Mohit Chauhan. जिनका नया गाना सिर्फ़ सुरीला ही नहीं है, Social Cause के लिए Contributor भी है. पॉडकास्ट पूरा सुनिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल

दिसंबर सुनते ही दिमाग में क्या आता है? साल का आखिरी महीना. मगर पिछले एक ऐसी किताब आई जिसे पढ़कर, दिसंबर एक और कारण से याद आएगा. कारण है राम जन्मभूमि विवाद का. जब आप इस विवाद की टाइमलाइन देखेंगे तो आपको पैटर्न नज़र आएगा कि इस विवाद से जुड़े लगभग सारे बड़े घटनाक्रम दिसंबर में ही घटे फिर चाहे इस मामले में पहला मुकदमा दर्ज होना हो… या बाबरी मस्जिद का गिरना. और इसी दिसंबर में हम बात करने जा रहे हैं रामजन्मभूमि विवाद पर. वो भी उनसे जो Literally ‘भगवान के वकील' रहे हैं. हमारे साथ हैं आज दो वकील, अनिरुद्ध शर्मा और श्रीधर पोटराजू. आपको 2019 का रामजन्मभूमि केस याद है न? इस केस में राल लला विराजमान को रिप्रेज़ेंट करने वालों में ये दोनों शामिल थे. इन दोनों ने हाल ही में मिलकर एक किताब लिखी जिसका नाम है Case for Ram. ये किताब दरअसल उस मुकदमे के पीछे की कहानी है. ये किताब सुप्रीम कोर्ट में हुई बहसों को समेटे हुए है. ये किताब समेटे हुए है उन तैयारियों की तफसील जो सुप्रीम कोर्ट में एक केस लड़ने के लिए की जाती है. भयंकर डिटेलिंग के भरा हुई किताब है, उतना ही डीटेल्ड ये पॉडकास्ट भी है. पूरा सुनिएगा

बांग्लादेश. कभी ये नाम सुनकर ऐसा लगता था जैसे कोई ऐसा पड़ोसी है जिसके यहां से आदान प्रदान चलता रहता है. तभी आपके यहां खीर ज़्यादा बनी तो वहां पहुंचा दी, उधर से पराठे ज़्यादा बने तो इधर आ गए. ऐसा नज़दीकी रिश्ता. कारण था बांग्लादेश के बनने में जो सहायता भारत ने की थी. पिछले दो सालों में इसी पड़ोसी ने आंतरिक तौर पर काफ़ी उथल पुथल देखी. बांग्लादेश के राष्ट्रपिता कहे जाने वाले बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की मूर्तियां वहीं के लोगों ने गिराई. उनकी बेटी और बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को वहां से तुरंत भागना पड़ा. भारत ने उन्हें अपने यहां शरण भी दी. मगर भारत-बांग्लादेश का ऐसा रिश्ता आखिर बना कैसे? 1971 में हुआ क्या था? ईस्ट पाकिस्तान से बांग्लादेश तक का सफ़र तय करने में ऐसे कौन कौन से पड़ाव थे जिनके बारे में दुनिया को पता ही नहीं है? और जब ये हो रहा था तो दुनिया भर में क्या घट रहा था? इसी सवाल को Address करती है Iqbal Chand Malhotra और Subroto Chattopadhyay की क़िताब Bangladesh: Humiliation, Carnage, Liberation, Chaos. और किताब के दोनों लेखक हैं हमारे मेहमान. मिलेंगे सारे सवालों के जवाब. सुनिएगा पूरा एपिसोड प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: रोहन भारती

कश्मीर के इतिहास से आप और हम अनभिज्ञ तो नहीं हैं। हम उसकी ख़ूबसूरती, उसके कल्चर से जिस तरह वाक़िफ़ हैं, उसके सबसे बड़े दुर्भाग्य से भी उसी तरह वाक़िफ़ हैं। और उसका दुर्भाग्य यह है कि वह पाकिस्तान की शाह-रग है। उसका प्लेग्राउंड है। वह प्लेग्राउंड जहाँ पाकिस्तान अपनी उन ख़ुराफ़ातों को अंजाम देता है, जिससे भारत को प्रेशराइज़ किया जा सके। लिहाज़ा, कश्मीर से आने वाली छोटी-से-छोटी ख़बर भी एक प्रायोरिटी बन जाती है। हाल ही में हमारे हाथ एक किताब लगी. यह किताब कश्मीर की बिगड़ी हुई तहरीर की कहानी सुनाती है। कहानी सुनाती है उस जिहाद गेम की, जो पाकिस्तानी इंटेलिजेंस एजेंसी ISI कई सालों तक कश्मीर में खेलती रही है। यह किताब आपको ले चलती है पाकिस्तान के डार्क वॉर के बीचों-बीच। किताब का नाम है The Jihad Game और लेखक हैं Abhinav Pandya। अभिनव पांडेय कश्मीर में कई वर्षों तक रहकर काउंटर-इंसर्जेंसी पर ग्राउंड रिसर्च कर चुके हैं। जम्मू-कश्मीर में टेररिज़्म और काउंटर टेररिज़्म पर ही उनकी Ph.D. भी है। पढ़ाकू नितिन के एपिसोड में हम उनकी इसी किताब पर बात करेंगे। समझेंगे कि आखिर पाकिस्तान किस तरह लश्कर, जैश और हिज़्बुल जैसे संगठनों के ज़रिए सालों-साल कश्मीर में ऑपरेट करता रहा है? और सबसे अहम — यह भी समझेंगे कि किस तरह ये संगठन कश्मीर के यूथ को Radicalize करते हैं? प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल

बांग्लादेश. कभी ये नाम सुनकर ऐसा लगता था जैसे कोई ऐसा पड़ोसी है जिसके यहां से आदान प्रदान चलता रहता है. तभी आपके यहां खीर ज़्यादा बनी तो वहां पहुंचा दी, उधर से पराठे ज़्यादा बने तो इधर आ गए. ऐसा नज़दीकी रिश्ता. कारण था बांग्लादेश के बनने में जो सहायता भारत ने की थी. पिछले दो सालों में इसी पड़ोसी ने आंतरिक तौर पर काफ़ी उथल पुथल देखी. बांग्लादेश के राष्ट्रपिता कहे जाने वाले बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की मूर्तियां वहीं के लोगों ने गिराई. उनकी बेटी और बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को वहां से तुरंत भागना पड़ा. भारत ने उन्हें अपने यहां शरण भी दी. मगर भारत-बांग्लादेश का ऐसा रिश्ता आखिर बना कैसे? 1971 में हुआ क्या था? ईस्ट पाकिस्तान से बांग्लादेश तक का सफ़र तय करने में ऐसे कौन कौन से पड़ाव थे जिनके बारे में दुनिया को पता ही नहीं है? और जब ये हो रहा था तो दुनिया भर में क्या घट रहा था? इसी सवाल को Address करती है Iqbal Chand Malhotra और Subroto Chattopadhyay की क़िताब Bangladesh: Humiliation, Carnage, Liberation, Chaos. और किताब के दोनों लेखक हैं हमारे मेहमान. मिलेंगे सारे सवालों के जवाब. सुनिएगा पूरा एपिसोड. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल