शशिभूषण के साथ आप सभी का एक साझा मंच : हमारी आवाज़

ख़ानज़ादा बेगम तीसरे स्त्री शतक, 'स्त्री मुग़ल' की पहली कविता।कवि-कृतिकार : पवन करण। ख़ानज़ादा बेगम, तैमूरी शहज़ादी। बाबर की बड़ी बहन। जिसे जंग में पराजित बाबर की जान बचाने के लिए उज़्बेक सुल्तान मोहम्मद शैबानी ख़ान से विवाह करना पड़ा। वाचन : शशिभूषण

स्वामी विवेकानंद की कविता, 'जाग्रत देवता'।कविता 'जाग्रत देवता' वेदांत दर्शन, "यत्र जीव तत्र शिवरूप" की प्रतिध्वनि ही है। वाचन : शशिभूषण

23 जनवरी 2026ऐसा सुयोग कभी कभी घटता है। आज 23 जनवरी है। वसंत पंचमी। निराला जयंती और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पराक्रम दिवस। आज के दिन सुनिए महाप्राण निराला की तीन कविताएँ । शशिभूषण

स्वामी विवेकानंद का भाषणविश्व धर्म संसद शिकागोवाचन : शशिभूषणयुवा दिवस : 12 जनवरी 2024

बढ़ते रहना( अपनी छात्राओं के लिए )तुम जब पहली बार सामने पड़ी प्यारी बच्ची थी चाहे शांत चाहे शरारती चाहे चुप चाहे बातूनी चाहे लापरवाह चाहे उत्साही चाहे सीधी चाहे निर्भीक चाहे जीती चाहे हारी चाहे पास चाहे फ़ेलदौड़कर आयी चाहे उदास लौटीप्रशंसा पायी चाहे डाँट खायी तुम हँसी रोयी खेली नाची झगड़ी मिलकर रहीसम्मान किया शिकायत की तुमने सुना नहीं सुना माना नहीं माना किया नहीं कियाचिढ़ी परेशान किया गर्व दियाबीमार पड़ी मेरा भी काम कियातुम बड़ी हुई मैं तुम्हारी शादी में आया तुम्हें पढ़ा सुना देखा तुम्हारी नौकरी लगी तुमने ज़मीन लीघरवालों का इलाज करायाभाई बहनों को सँवारातुमने मेहनत की जूझीतुम्हारा नाम हुआ तुमने समाचार दिया गुरु पूर्णिमा शिक्षक दिवस की बधाई दीतुम कहीं मिली मैंने पहचान लिया तुमने पूछा- सर पहचाना? मैं बहुत पछताया तुम्हारे दोस्त माँ बाप रिश्तेदार सहकर्मी मिलेतुम्हारी बातें हुईंतुम भूल गयींतुम्हारी याद आ गयीतुम्हारी कितनी स्मृतियाँ हैंतुम बच्ची थी तब से लेकरतुम बड़ी हुई जैसे मेरे भीतर बड़ी हुई बढ़ते रहनाहमेशा खुश रहना• शशिभूषण10.01.2026

छाती पर लिखी गई समकालीन कहानीगुरुघासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर में वाचाल कुलपति द्वारा प्रमुख हिंदी कहानीकारों में से एक मनोज रूपड़ा को मिले अपमानजनक सभा निकाला घटनाक्रम पर प्रस्तुत है संगीत साधक और साहित्यकार डॉ रामकुमार सिंह की फ़ेसबुक कविता पोस्ट। हिंदी शिक्षक रहे डॉ रामकुमार सिंह इन दिनों अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर के केंद्रीय विद्यालय में प्राचार्य हैं। सभा से निकाले जाने के बाद लेखक बाहर नहीं गया—वह बस कहानी में चला गया।उसने देखा, कुलपति मंच नहीं थे,वो एक विशाल छाती बन चुके थे—फूली हुई, भाषणों से तनी हुई,और आत्मसम्मान के बटन से बंद।तभी एक लेखक चढ़ा,फिर दूसरा,फिर तीसरा—कोई जूते उतारकर,कोई पेन निकालकर।“अरे! यह क्या कर रहे हो?”छाती ने गुर्राकर पूछा।लेखकों ने कहा—“घबराइए नहीं महोदय,यह समकालीन कहानी है—इसे पढ़ा नहीं जाता,लिखा जाता है…वह भी वहीं,जहाँ सबसे ज़्यादा दबाव होता है।”एक ने पसलियों के बीचनायक रख दिया—जो सुनना चाहता है।दूसरे ने दिल के पासएक संवाद चिपकाया—“बोरियत सत्ता की बीमारी है।”तीसरे ने फेफड़ों परहाशिए के लोग बसा दिए—ताकि हर साँस मेंलोकतंत्र घुले।छाती हाँफने लगी।उस पर कहानी फैलती गई—बिना अनुमति,बिना अध्यक्षीय स्वीकृति।कुलपति बोले—“यह अनुशासनहीनता है!”लेखक हँसे—“जी हाँ,इसी अनुशासनहीनता सेसाहित्य पैदा होता है।”सभा तालियों से नहीं,खामोशी से भर गई—क्योंकि पहली बारकहानी मंच पर नहीं,छाती पर लिखी जा रही थी।और जब सब उतर गए,छाती पर पंक्ति रह गईं—“जो लेखक को बाहर करता है,वह अंततः कहानी के भीतर चला जाता है।कहानीकार सभा निकाला के बाद लेखक बिरादरी में सच्चा सम्मान पाता है।"०००

सावित्री बाई के काव्यांशभारत की पहली महिला शिक्षक सावित्री बाई का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा में माली समाज में हुआ। उनका विवाह ज्योतिबा फुले से हुआ। महात्मा फुले ने उनकी शिक्षा का दायित्व संभाला। सामाजिक विरोध का सामना करते सावित्री बाई ने सन 1848 में पुणे में लड़कियों के लिये पहला स्कूल स्थापित किया। सावित्री-ज्योतिबा दंपति ने कुल 18 स्कूल शुरू किये और चलाए। दलित समुदाय के उत्थान के लिये नेटिव मेल स्कूल, पुणे और सोसाइटी फॉर प्रमोटिंग द एजुकेशन ऑफ महार, मंग्स (Mangs) जैसे शैक्षिक ट्रस्टों की शुरुआत की। सन 1863 में, ज्योतिराव और सावित्री बाई ने बालहत्या प्रतिबंधक गृह की स्थापना की, जो कन्या भ्रूण हत्या रोकने और गर्भवती ब्राह्मण विधवाओं और बलात्कार पीड़ितों की सहायता के लिये भारत का पहला गृह था। अस्पृश्यता समाप्त करने के लिए सन 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना सावित्री बाई और ज्योतिराव फुले का एक महान समाज सुधार प्रदेय है। सावित्री बाई ने काव्य फुले (1854) और बावन काशी सुबोध रत्नाकर (1892) नामक दो प्रसिद्ध कृतियाँ लिखीं। 'गो, गेट एजुकेशन' सावित्री बाई की प्रसिद्ध कविता है। सावित्री बाई की जयंती के अवसर पर प्रस्तुत हैं मज़दूर बिगुल, समालोचन, स्त्रीकाल, फॉर्वर्ड प्रेस, द वायर, अनिता भारती, गूगल के सौजन्य से उनके कुछ काव्यांश:-सावित्री बाई के काव्यांश---------------------ज्ञान नहीं, विद्या नहींपढ़-लिखकर शिक्षित होने की मंशा नहींबुद्धि होकर भी उसे व्यर्थ गँवाएउसे कैसे कहें इंसान? *** ज्ञान के बिना सब खो जाता हैज्ञान के बिना हम जानवर बन जाते हैंइसलिए ख़ाली न बैठो और जा कर शिक्षा लोतुम्हारे पास सीखने का सुनहरा मौक़ा हैइसलिए सीखो और जाति के बन्धन तोड़ो। *** हमारे जानी दुश्मन कानाम है अज्ञानउसे धर दबोचोमज़बूत पकड़ कर पीटोऔर उसे जीवन से भगा दो। *** संसार में स्वाभिमान से जीने के लिएशिक्षा प्राप्त करोमनुष्यों का सच्चा गहना है शिक्षाविद्यालय जाओपहला काम है पढ़ाई, दूसरा काम खेल-कूदपढ़ाई से फुर्सत मिले तभी करो घर की साफ़-सफाईचलो, अब पाठशाला जाओ। *** जो वाणी से उच्चार करेवैसा ही बर्ताव करेवे ही नर नारी पूजनीयसेवा परमार्थपालन करे व्रत यथार्थऔर होवे कृतार्थवे सब वंदनीय। सुख हो दुखकुछ स्वार्थ नहीजो जतन से करे अन्यो का हितवे ही ऊँचे,मानवता का रिश्ता जो जानते हैं वे सबसावित्री कहे सच्चे संत। *** मेरी जन्मभूमिमुझे वंदनीय और दिल से प्यारीमैं उसका गौरव गीत गाती हूँ। चयन : शशिभूषण

उपन्यास : आनंद मठलेखक : बंकिमचंद्र चट्टोपाध्यायचौथा खंड, अंतिम अध्याय

वसीयतनामा लिखने जैसी कुछ गुफ़्तगू कवि : कात्यायनी वाचन : शशिभूषण (बया, अप्रैल-मार्च 2024)

धीरे-धीरे कवि : सर्वेश्वरदयाल सक्सेना वाचन : शशिभूषण

"चुनाव जंग और मीडिया" वक्ता : भाषा सिंह, जन पक्षधर जुझारू पत्रकार। आयोजक : राष्ट्रीय सांस्कृतिक यात्रा, ढाई आखर प्रेम 2023, इंदौर (म.प्र.)। स्थल : मध्य प्रदेश प्रेस क्लब, अभिनव कला समाज सभागार इंदौर। तिथि : 27 दिसंबर 2023, शाम 05.55 बजे।

सुबह के इंतज़ार में। विनीत तिवारी से बातचीत। प्रसंग: ढाई आखर प्रेम यात्रा। 26 दिसंबर 2023, सहस्त्र धारा नर्मदा, महेश्वर।

थोड़े से बच्चे और बाक़ी बच्चे कवि : चंद्रकांत देवताले वाचन : शशिभूषण

"जहाँ घर है वहाँ पेड़ है" कवि : संदीप नाईक वाचन : शशिभूषण

"माँ का मंत्रोच्चार", मार्मिक और अविस्मरणीय कहानी। कहानीकार, रवींद्र व्यास। वाचन, शशिभूषण।

उस तट पर भी जाकर दिया जला आना, पर पहले अपना यह आँगन कुछ कहता है जाना, फिर जाना! •केदारनाथ सिंह

प्रलेसं घोषणा पत्र. लेखक, कुमार अम्बुज-वीरेंद्र यादव. अठारहवाँ राष्ट्रीय सम्मेलन, 20, 21, 22 अगस्त 2023, जबलपुर(म. प्र.).

शिक्षकों से संवाद : कुमार अम्बुज, कवि-कहानीकार, सिनेमा चिंतक। विषय : गद्य कैसे समझें समझाएँ। 25 मई 2021, केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 3 भोपाल, क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल। सौजन्य : श्री सोमित श्रीवास्तव(उपायुक्त), डॉ ऋतु पल्लवी, सहायक आयुक्त(तत्कालीन प्राचार्य)

विशेषज्ञों ने कहा, "हुज़ूर वह हाथ की पकड़ में नहीं आता। वह स्थूल नहीं, सूक्ष्म है, अगोचर है। पर वह सर्वत्र व्याप्त है। उसे देखा नहीं जा सकता, अनुभव किया जा सकता है।" राजा सोच में पड़ गए। बोले, "विशेषज्ञो, तुम कहते हो वह सूक्ष्म है, अगोचर है और सर्वव्यापी है। ये गुण तो ईश्वर के हैं। तो क्या भ्रष्टाचार ईश्वर है?" विशेषज्ञों ने कहा, "हाँ, महाराज, भ्रष्टाचार अब ईश्वर हो गया है।" -सदाचार का तावीज़, हरिशंकर परसाई

इस कहानी का अंत अच्छा नहीं है। मैं चाहता हूँ कि आप उसे नहीं पढ़ें। और पढ़ें भी तो यह ज़रूर सोचें कि क्या इसका कोई और अंत हो सकता था? अच्छा अंत? अगर हाँ तो कैसे? - पार्टीशन(कहानी), स्वयं प्रकाश

"भारतीयता राष्ट्रवाद और साहित्य". वक्ता : विनीत तिवारी, कवि और सामाजिक कार्यकर्ता. संदर्भ : हिरोशिमा दिवस, 6 अगस्त, 2023. आयोजक : मध्य-प्रदेश प्रलेसं, देवास इकाई.

हिरोशिमा कवि : अज्ञेय वाचन : शशिभूषण हिंदी के युगपुरुष अज्ञेय की यह कविता 'हिरोशिमा दिवस' 6 अगस्त 2023 को रिकॉर्ड की गयी। कविता और आत्मकथ्य NCERT की पाठ्यपुस्तक 'कृतिका' भाग-दो(कक्षा 10) में संकलित हैं।

बुर्क़ा उतार लेना बेटा कवि: अरबाज़ ख़ान समय के साखी, मई-जून 2023

मैं कुछ कहना चाहता हूँ। कहना ज़रूरी हो गया है। शोर और बोलना बहुत है फिर भी सोचता हूँ- शायद कहना सुना जाय। (शशिभूषण)

हिंदवी संगत 18, शुक्रवार को कवि-लेखक-फ़िल्मकार देवीप्रसाद मिश्र से अंजुम शर्मा की बातचीत सुनकर यह मौखिक संदेश या तुरंत राय रिकॉर्ड करने से ख़ुद को रोक नहीं पाया। संदेश रिकॉर्ड करने, भेजने के बाद सोचा अगर राय में निजताओं का उल्लंघन नहीं हो, तो उसमें अनायास आ गयी कितनी ही बातों को व्यक्तिगत ही बनाये रखने में क्या भलाई? इसलिए यहाँ पब्लिश कर रहा हूँ।

इसे सुनिएगा। इस कविता को मैंने महान कहने से खुद को रोक लिया। यह शब्द क्योंकि अब घिस चुका है। आता नहीं इसका अभिप्राय पढ़-सुनकर। पढ़ना या सुनना और महसूस करना ही इस कविता के लिए सब विशेषण हैं।

"सक्रियता की चरम सीमा है निष्क्रियता. बड़बोलेपन की चरम परिणति है ख़ामोशी और तीरंदाज़ी की अंतिम पराकाष्ठा है धनुर्धारण से परहेज." -महाविज्ञ, कहानीकार : अत्सुशी नाकाजिमा.

"स्वतंत्रता दिवस की तारीख़ बदलने पर भी विचार किया जा सकता है।"

शमशेर बहादुर सिंह की कविता "काल तुझसे होड़ है मेरी"

शमशेर बहादुर सिंह की कविता, "अगर मैंने अरबी में प्रार्थना की"

रवीश कुमार की एक बात से डर लगता है।

"धार्मिक दंगों की राजनीति" शमशेर की ऐसी कविता है जो भारत के संदर्भ में वर्चस्व की राजनीति जिसमें धर्म एक हथियार होता है को पूरी तरह सामने रख देती है।

"तुमको पाना है, अविराम" अगर आप प्रेम से, प्रेम कविताओं से ज़रा भी खिंचते हैं तो यह कविता पढ़नी-सुननी चाहिए। पढ़ना अपनी सुविधा उपलब्धता से ही हो सकता है। इसलिए मैंने यहीं सुना दी है। सुनिएगा। बताएंगे सुनना कैसा रहा तो समझ लीजिए इतना ही मैं आपसे चाहता हूं। कविता से बहुत अधिक पा चुका हूं।

सड़क पर एक आदमी: दो मिनट कविता ढाई मिनट कविता पर बात।

अचेतना के लिए बिगब्रदर की "न्यूस्पीक" योजना यानी "थॉट क्राइम" रोकने के लिए शब्दों को नष्ट करना । यह जॉर्ज ऑरवेल के उपन्यास 1984 का अंश है । जिसे उज्जैन से रीवा जाते हुए 22 दिसंबर 2022 को दमोह-सागर के आस-पास चलती ट्रेन में रिकॉर्ड किया गया । इसे सुन-पढ़कर एहसास होता है कि भाषा भी शासन का हथियार होती है ।

मैं सोचा करता हूं/ देवताले जी कुछ भी पाल सकते थे/ कुत्तों गायों से उज्जैन भरा पड़ा है/ वे बेवजह अकेले पड़ते चले गए/ हालांकि जानता हूं अकेला पड़ना है- कवि हो या फ़ासिस्ट। (शशिभूषण)

मर्दानी सुना था तेज की अधिकारिणी पाया। माना जाता है कि सुभद्रा कुमारी चौहान की जानी-मानी कविता "झांसी की रानी" में वीरता है। लेकिन मुझे लगता आया है कि इस कविता में स्त्री के दुख और त्याग अधिक हैं। यह एक वीर स्त्री की दुख भरी कहानी ही है, जिसका बचपन में ब्याह हो गया। जिसने सबको अपनाया सबकुछ सहा किंतु बदले में वीरता ही लौटायी, बलिदान ही दिया। उसी दुख भरी कहानी को जिस सम्मान से कवयित्री ने अपनाया लक्ष्मीबाई को मर्दानी सुना था लेकिन तेज की सच्ची अधिकारिणी बताया; मैंने उसे वाणी में अपनाने की कोशिश में यह पाठ किया है। कितना सफल हो पाया हूं यह तो सुनने वाले ही बता सकते हैं। सुन कर बताएंगे तो अच्छा लगेगा -शशिभूषण

मत बनें अंधे हिंग्लिश में हैं धंधे: शशिभूषण

"मुझसे उम्मीद न करना कि मैं खेतों का बेटा होकर आपके चगले हुए स्वादों की बात करूँगा" - अवतार सिंह पाश

कहानी "ईदगाह" सुनिए. बहुत मन हुआ इसलिए यह कहानी सुनाई है. मुझे बच्चे हामिद से बचपन से बहुत प्यार है. "ईदगाह" कहानी कभी नहीं भूलती. यही दिल में आता है काश! मैं हामिद जैसा होता. हमारे घरों के बच्चे हामिद जैसे हों!

दो कविताएँ रोज़: पच्चीस हिंदी युवा स्त्री कवि। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2022 के उपलक्ष्य में कात्यायनी, अनामिका और पच्चीस हिंदी युवा स्त्री कवि के अंतर्गत "दो कविताएँ रोज़" श्रृंखला के अठारहवें दिन संध्या नवोदिता की दो कविताएं, "जब उम्मीदें मरती हैं" और "एक दिन जब हम नहीं रहेंगे"। पाठ एवं चयन: शशिभूषण।

दो कविताएँ रोज़: पच्चीस हिंदी युवा स्त्री कवि। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2022 के उपलक्ष्य में कात्यायनी, अनामिका और पच्चीस हिंदी युवा स्त्री कवि के अंतर्गत "दो कविताएँ रोज़" श्रृंखला के सत्रहवें दिन रेखा चमोली की दो कविताएं, "डरे हुए लोग" और "एक मां के होते"। पाठ एवं चयन: शशिभूषण।